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हाथरस हादसा मामले में सुनवाई टली, 10 मार्च को होगी अगली सुनवाई, भगदड़ में गई थी 121 लोगों की जान

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हाथरस हादसा मामले में सुनवाई टली, 10 मार्च को होगी अगली सुनवाई, भगदड़ में गई थी 121 लोगों की जान
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Noida: 2 जुलाई 2024 को हाथरस में मानव मंगल मिलन सद्भावना समागम कार्यक्रम के दौरान हुए हादसे मामले में कोर्ट में सुनवाई टल गई. वकीलों की हड़ताल की वजह से मामले की सुनवाई नहीं हो सकी. अब 10 मार्च को इस मामले की अगली सुनवाई होगी.

10 मार्च को अगली सुनवाई

वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. एपी सिंह ने कहा कि हड़ताल की वजह से हाथरस हादसा मामले में सुनवाई नहीं हुई. अदालत से 10 मार्च को अगली तारीख मिली है. उन्होंने कहा कि न्यायिक आयोग की रिपोर्ट आ गई है और उसमें कहा गया है कि अधिकारी दोषी थे और ये आयोजक थे. हमारी तरफ से ये कहना है कि 1100 शपथ पत्र दिए हैं, जिनमें घायल, घयालों के परिवार और प्रत्य़क्षदर्शी के बयान शामिल हैं. इनमें अलग-अलग राज्यों से आए लोग भी शामिल हैं.

20 वर्षों से चल रहा समागम कार्यक्रम

उन्होंने कहा कि इसमें साफ तौर पर था कि एक आपराधिक घटना के लिए षडयंत्र रची गई और उसके द्वारा इस घटना को अंजाम दिया गया. हमरी परमिशन 80 हजार की थी और उतने ही लोग उसमें थे और उसमें अधिकारियों ने क्या किया उसपर हम कुछ नहीं कह सकते हैं, लेकिन आयोजकों की तरफ से सारी सावधानी बरती गई. पिछले 20 वर्षों से मानव मंगल मिलन सद्भावना समागम चला आ रहा है. इस दौरान कहीं कोई घटना नहीं घटी.

षडयंत्र के तहत हुई घटना

उन्होंने कहा कि पूरे देश में खासकर पूरे उत्तर भारत में समय समय पर मानव मंगल मिलन सद्भावना समागम का आयोजन होता रहा है. हर महीने के प्रथम मंगलवार को होता रहा है. कभी कोई घटना नहीं घटी है. यह षड्यंत्र था, एक साजिश थी, जो कि न्यायिक आयोग की रिपोर्ट भी विधानसभा में रखे जाने के बाद सब खुलासा भी होगा और सब कुछ सामने आ जाएगा. उन्होंने कहा कि जो प्रोसेस चल रहा उसमें हमें शासन, प्रशासन, न्यायिक आयोग, माननीय अदालत, हाईकोर्ट पर पूरा भरोसा है. हमें न्याय की पूरी उम्मीद है. न्याय मिलेगा और न्याय मिलेगा.

हाथरस घटना में 121 बच्चों-महिलाओं की हुई थी मौत

बता दें कि 2 जुलाई 2024 को यूपी के हाथरस में नारायण साकार हरि उर्फ भोले बाबा उर्फ सूरज पाल के सत्संग में भगदड़ मच गई थी. इस भगदड़ में महिलाओं और बच्चों समेत 121 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 150 से अधिक लोग घायल हुए थे. यह घटना जिले के फुलारी गांव में हुई थी. आरोप है कि सत्संग में 80 हजार लोगों के होने की अनुमति थी, जबकि इसमें दो लाख से अधिक भीड़ जुटने का दावा किया जा रहा था. 

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