DBA डिग्री से कॉरपोरेट करियर को मिल रही नई उड़ान, सीईओ बनने का बन रहा बड़ा रास्ता, जाने अपने काम की खबर

top-news
DBA यानी डॉक्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन अब कॉरपोरेट सेक्टर में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। यह डिग्री अनुभवी प्रोफेशनल्स को CEO, CXO और ग्लोबल लीडरशिप रोल तक पहुंचाने में मदद कर रही है। भारत और विदेशों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।

कॉरपोरेट जगत में लंबे समय से एमबीए और पीएचडी को ही सबसे बड़ी मैनेजमेंट डिग्री माना जाता रहा है, लेकिन अब बिजनेस सेक्टर में एक नई और तेजी से लोकप्रिय हो रही डिग्री DBA यानी डॉक्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन चर्चा में है। यह डिग्री खासतौर पर उन प्रोफेशनल्स के लिए तैयार की गई है, जो कई सालों तक कॉरपोरेट सेक्टर में काम करने के बाद अब टॉप लीडरशिप तक पहुंचना चाहते हैं। पिछले कुछ वर्षों में भारत के साथ-साथ अमेरिका, यूरोप और खाड़ी देशों में भी DBA की मांग तेजी से बढ़ी है। बड़ी कंपनियां अब ऐसे प्रोफेशनल्स को प्राथमिकता दे रही हैं, जिनके पास मैनेजमेंट का अनुभव होने के साथ रिसर्च आधारित रणनीतिक समझ भी हो। यही वजह है कि कई अनुभवी अधिकारी अब एमबीए के बाद DBA की ओर रुख कर रहे हैं। यह डिग्री सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि बिजनेस की वास्तविक समस्याओं का समाधान खोजने पर आधारित मानी जाती है।


क्या है DBA और क्यों बढ़ रही इसकी लोकप्रियता

DBA यानी डॉक्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन को मैनेजमेंट क्षेत्र की सर्वोच्च डिग्री माना जाता है। यह पारंपरिक पीएचडी से अलग होती है क्योंकि इसका फोकस थ्योरी की बजाय प्रैक्टिकल बिजनेस सॉल्यूशन पर रहता है। इस कोर्स में एडमिशन के लिए आमतौर पर एमबीए की डिग्री और 3 से 10 साल तक का कॉरपोरेट अनुभव जरूरी माना जाता है। यही कारण है कि इसे अनुभवी प्रोफेशनल्स की डिग्री कहा जाता है। DBA करने वाले छात्र बिजनेस स्ट्रैटेजी, लीडरशिप, मार्केट रिसर्च, फाइनेंस और कॉरपोरेट मैनेजमेंट से जुड़ी समस्याओं पर रिसर्च करते हैं। यह कोर्स ज्यादातर पार्ट टाइम, ऑनलाइन या हाइब्रिड मोड में कराया जाता है ताकि नौकरी के साथ पढ़ाई जारी रखी जा सके। भारत में आईआईएम, ISB, SPJIMR और BITS पिलानी जैसे संस्थान DBA के समकक्ष प्रोग्राम ऑफर कर रहे हैं। इसके अलावा कई विदेशी यूनिवर्सिटी भी भारतीय छात्रों के लिए ऑनलाइन DBA प्रोग्राम चला रही हैं।


पीएचडी से अलग है DBA का मकसद

DBA और पीएचडी दोनों डॉक्टरेट स्तर की डिग्रियां हैं, लेकिन दोनों का उद्देश्य अलग होता है। पीएचडी का फोकस मुख्य रूप से अकादमिक रिसर्च और विश्वविद्यालयों में अध्यापन पर रहता है, जबकि DBA सीधे कॉरपोरेट सेक्टर और बिजनेस लीडरशिप से जुड़ा हुआ है। DBA करने वाले प्रोफेशनल्स का लक्ष्य CEO, CXO, बिजनेस कंसल्टेंट या ग्लोबल मैनेजमेंट रोल तक पहुंचना होता है। इस डिग्री को पूरा करने में आमतौर पर 3 से 5 साल का समय लगता है। इसमें शुरुआती वर्षों में कोर्सवर्क और बाद के वर्षों में रिसर्च प्रोजेक्ट या थीसिस पर काम किया जाता है। खास बात यह है कि DBA पूरी करने के बाद उम्मीदवार कानूनी और अकादमिक रूप से अपने नाम के आगे ‘डॉ.’ भी लगा सकते हैं। कॉरपोरेट दुनिया में DBA धारकों को काफी सम्मान मिलता है और कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां ऐसे उम्मीदवारों को रणनीतिक पदों पर नियुक्त करना पसंद करती हैं।


विदेशों में भी बढ़ रही DBA की डिमांड

अमेरिका, यूरोप, यूके और खाड़ी देशों में DBA की मांग तेजी से बढ़ रही है। कई इंटरनेशनल कंपनियां ऐसे प्रोफेशनल्स को प्राथमिकता दे रही हैं जिनके पास मैनेजमेंट अनुभव के साथ डॉक्टरेट स्तर की बिजनेस समझ हो। यदि किसी मान्यता प्राप्त विदेशी संस्थान से DBA किया जाए तो यह डिग्री दुनियाभर में वैध मानी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में DBA कॉरपोरेट सेक्टर की सबसे प्रतिष्ठित डिग्रियों में शामिल हो सकती है। यही वजह है कि अब भारत के युवा मैनेजर्स और वरिष्ठ अधिकारी भी इस डिग्री को करियर ग्रोथ का बड़ा माध्यम मानने लगे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *