जीडीएस भर्ती में चयन के बाद क्या काम करना होता है? जानें सैलरी, नौकरी की स्थिति और तीनों पदों की जिम्मेदारियां
- Shiv Kumar
- 03 Sep, 2026
ग्रामीण डाक सेवक यानी जीडीएस भर्ती को लेकर उम्मीदवारों के मन में कई सवाल रहते हैं। चयन होने के बाद आखिर काम क्या करना होता है? बीपीएम, एबीपीएम और डाक सेवक में क्या अंतर है? क्या जीडीएस केंद्र सरकार की पक्की नौकरी होती है या इसे अस्थाई नियुक्ति माना जाता है? इसके अलावा सैलरी को लेकर भी उम्मीदवारों के बीच काफी भ्रम रहता है। अगर आप भी जीडीएस भर्ती की तैयारी कर रहे हैं या चयन के बाद मिलने वाली जिम्मेदारियों को समझना चाहते हैं, तो इन बातों को जानना आपके लिए जरूरी है।
जीडीएस भर्ती में कौन से पद होते हैं?
ग्रामीण डाक सेवक भर्ती के तहत मुख्य रूप से तीन पदों पर नियुक्ति होती है। इनमें ब्रांच पोस्टमास्टर यानी बीपीएम, असिस्टेंट ब्रांच पोस्टमास्टर यानी एबीपीएम और डाक सेवक शामिल हैं। तीनों पद डाक विभाग से जुड़े हैं, लेकिन इनकी जिम्मेदारियां अलग-अलग होती हैं। बीपीएम को शाखा डाकघर के रोजाना के कामकाज की जिम्मेदारी संभालनी होती है। एबीपीएम, बीपीएम के काम में सहायता करता है, जबकि डाक सेवक की तैनाती डाकघर के अलावा छंटाई कार्यालय, मेल कार्यालय, वितरण केंद्र और विभाग के दूसरे कार्यालयों में भी हो सकती है।
ब्रांच पोस्टमास्टर का क्या काम होता है?
ब्रांच पोस्टमास्टर यानी बीपीएम किसी शाखा डाकघर के रोजाना के कामकाज की जिम्मेदारी संभालता है। इसमें डाकघर से जुड़े काम के साथ इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक की सेवाएं भी शामिल होती हैं। बीपीएम को शाखा डाकघर का संचालन करने, ग्राहकों को सेवाएं देने, डाक की आवाजाही और वितरण की व्यवस्था देखने और डाक विभाग की सेवाओं व उत्पादों का प्रचार करने जैसे काम करने होते हैं। जरूरत पड़ने पर उसे असिस्टेंट ब्रांच पोस्टमास्टर की जिम्मेदारियां भी संभालनी पड़ सकती हैं। वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से सौंपे गए दूसरे काम भी बीपीएम को करने होते हैं। बीपीएम पद पर चयन होने के बाद उम्मीदवार को शाखा डाकघर चलाने के लिए जगह की व्यवस्था अपने खर्च पर करनी होती है। इसके साथ ही उसे उसी गांव में रहना होता है जहां संबंधित शाखा डाकघर संचालित किया जाता है। इसलिए बीपीएम पद के लिए केवल चयन होना ही जरूरी नहीं है, बल्कि इस पद से जुड़ी इन शर्तों को पूरा करना भी जरूरी होता है।
असिस्टेंट ब्रांच पोस्टमास्टर क्या करते हैं?
असिस्टेंट ब्रांच पोस्टमास्टर यानी एबीपीएम, शाखा डाकघर में बीपीएम की सहायता करता है और कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालता है। एबीपीएम को डाक टिकट और डाक सामग्री बेचने, घर-घर डाक पहुंचाने और डाक की आवाजाही से जुड़े काम करने होते हैं। इसके अलावा इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक से जुड़े जमा, भुगतान और दूसरे लेनदेन भी उसकी जिम्मेदारी में शामिल होते हैं। एबीपीएम को डाक विभाग की सेवाओं और उत्पादों का प्रचार भी करना होता है। जरूरत पड़ने पर वह बीपीएम के काम भी संभाल सकता है। वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से दिए गए दूसरे विभागीय काम भी उसे करने पड़ सकते हैं। एबीपीएम के लिए यह भी जरूरी है कि वह संबंधित डाकघर के वितरण क्षेत्र के भीतर रहे।
डाक सेवक को क्या काम करना होता है?
डाक सेवक की तैनाती केवल गांव के डाकघर में ही नहीं होती। उसे डाकघर, छंटाई कार्यालय, मेल कार्यालय, ट्रांजिट मेल कार्यालय, वितरण केंद्र या विभाग के किसी दूसरे कार्यालय में भी लगाया जा सकता है। डाकघर में डाक सेवक को टिकट और डाक सामग्री की बिक्री, घर-घर डाक पहुंचाने और इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक से जुड़े जमा व भुगतान जैसे काम करने पड़ सकते हैं। छंटाई या मेल कार्यालय में डाक सेवक को डाक, डाक थैलों और पार्सल संभालने की जिम्मेदारी मिल सकती है। वितरण केंद्र पर डाक और पार्सल की छंटाई, आवाजाही और वितरण से जुड़े काम करने होते हैं। इसके अलावा पोस्टमास्टर या संबंधित अधिकारी की सहायता करना भी उसकी जिम्मेदारी का हिस्सा होता है। विभाग की जरूरत के अनुसार डाक सेवक को प्रचार-प्रसार और कारोबार से जुड़े काम भी सौंपे जा सकते हैं।
जीडीएस पक्की सरकारी नौकरी होती है?
जीडीएस को लेकर सबसे ज्यादा भ्रम इसकी नौकरी की स्थिति को लेकर रहता है। आसान भाषा में समझें तो जीडीएस को केंद्र सरकार की नियमित सरकारी नौकरी के समान नहीं माना जाता। जीडीएस नियमित केंद्रीय कर्मचारी या संघ की नियमित सिविल सेवाओं के कर्मचारी नहीं होते। उनकी सेवा शर्तें ग्रामीण डाक सेवक (आचरण एवं नियुक्ति) नियम, 2020 और समय-समय पर किए गए संशोधनों के तहत तय होती हैं।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि जीडीएस कुछ महीनों या सीमित अवधि के लिए मिलने वाली सामान्य अस्थाई नौकरी है। आधिकारिक नियमों के अनुसार जीडीएस सिविल पद पर होते हैं, लेकिन संघ की नियमित सिविल सेवाओं से बाहर होते हैं। चयन के बाद वे निर्धारित नियमों के तहत 65 वर्ष की आयु तक सेवा में बने रह सकते हैं। इसलिए इसे आसान तरीके से ऐसे समझ सकते हैं कि जीडीएस नियमित केंद्र सरकार के कर्मचारी वाली पक्की नौकरी नहीं है, लेकिन इसे सामान्य ठेके या कुछ महीने की अस्थाई नौकरी कहना भी सही नहीं होगा। जीडीएस के लिए अलग सेवा व्यवस्था है, जिसके तहत नियुक्ति और सेवा की शर्तें तय की जाती हैं।
हर महीने कितनी सैलरी मिलती है?
जीडीएस में मिलने वाला पारिश्रमिक पद और लागू नियमों के अनुसार अलग-अलग होता है। बीपीएम, एबीपीएम और डाक सेवक के लिए अलग स्तर पर पारिश्रमिक निर्धारित किया जाता है। इसके अलावा लागू नियमों के अनुसार मिलने वाले भत्ते और सुविधाएं भी उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण होती हैं। इसलिए किसी भर्ती में आवेदन करने से पहले उम्मीदवार को उस समय जारी आधिकारिक विज्ञापन में दिए गए पारिश्रमिक और दूसरी शर्तों को जरूर देखना चाहिए। सिर्फ जीडीएस पद होने के आधार पर नियमित केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बराबर वेतन मिलने की उम्मीद करना सही नहीं है। पद, काम और लागू नियमों के आधार पर मिलने वाली राशि अलग हो सकती है
Leave a Reply
Your email address will not be published. Required fields are marked *






