दिल्ली में साइबर ठगी के चार नेटवर्क का भंडाफोड़, लोगों के नाम पर बैंक खाते और फर्जी सिम जारी कर ठगों को बेचते थे आरोपी

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दिल्ली पुलिस ने साइबर ठगी के चार नेटवर्क का खुलासा कर छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में 70 बैंक खातों और 187 फर्जी सिम कार्ड का पता चला। पुलिस ने 125 शिकायतों को नेटवर्क से जोड़ा है, जिनमें 1.59 करोड़ रुपये की ठगी शामिल है।

दिल्ली पुलिस की आउटर नॉर्थ जिला साइबर थाना टीम ने साइबर ठगी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए चार अलग-अलग नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस ने इन मामलों में कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि आरोपी लोगों को बीमा, नौकरी और आर्थिक लाभ का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। इसके बाद इन खातों की बैंक किट साइबर ठगों तक पहुंचा दी जाती थी। पुलिस ने करीब 70 ऐसे बैंक खातों का पता लगाया है, जिन्हें ठगी के नेटवर्क को उपलब्ध कराया गया था। इसके अलावा लोगों की जानकारी के बिना 187 अतिरिक्त सिम कार्ड जारी कराने और मोबाइल में APK फाइल डाउनलोड करवाकर बैंक खातों से रुपये निकालने वाले गिरोह का भी खुलासा हुआ है। पुलिस के अनुसार, चारों ऑपरेशन के दौरान राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज 125 शिकायतों का संबंध इन नेटवर्क से मिला है। इन शिकायतों में करीब 1.59 करोड़ रुपये की ठगी की रकम शामिल है। गिरफ्तार आरोपियों के पास से मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक, नकदी और अन्य सामान बरामद किया गया है। पुलिस अब इन नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और ठगी की रकम के लेनदेन की जांच कर रही है।


बीमा और आर्थिक लाभ का लालच देकर खुलवाए 70 बैंक खाते

पहले मामले में पुलिस ने 19 वर्षीय देवेंद्र उर्फ सचिन को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी अपने साथी मोहित के साथ शाहबाद डेयरी इलाके में रहने वाले लोगों को बीमा और आर्थिक लाभ का लालच देकर बैंक खाते खुलवाता था। इसके बाद खाताधारकों के एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक और अन्य बैंक दस्तावेज अपने कब्जे में लेकर हैदराबाद में सक्रिय साइबर ठगी के नेटवर्क तक पहुंचाता था। जांच में सामने आया कि आरोपी और उसका साथी अब तक करीब 70 बैंक खाते इस नेटवर्क को उपलब्ध करा चुके थे। इन खातों में आने वाली ठगी की रकम का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा आरोपी कमीशन के रूप में रखता था, जबकि बाकी रकम दूसरे खातों में भेज दी जाती थी। पुलिस को इस नेटवर्क से जुड़ी नौ NCRP शिकायतें मिली हैं, जिनमें करीब 14.51 लाख रुपये की ठगी का संबंध सामने आया है। पुलिस ने देवेंद्र के पास से पांच मोबाइल फोन, 10,030 रुपये नकद, दो बैंक पासबुक, सात चेकबुक, आठ एटीएम कार्ड, एक पीओएस मशीन और यामाहा R15M बाइक बरामद की है। मामले में मोहित की भूमिका की भी जांच की जा रही है, जो फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद है।


ग्राहकों की जानकारी के बिना जारी किए 187 सिम कार्ड, तीन गिरफ्तार

दूसरे मामले में पुलिस ने अतुल, समीर उर्फ सैम और पंकज को गिरफ्तार किया है। यह मामला एक व्यक्ति के क्रेडिट कार्ड से करीब 1.11 लाख रुपये की साइबर ठगी से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, अतुल एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया का सिम कार्ड डीलर था। जब कोई ग्राहक एयरटेल का सिम लेने पहुंचता था, तो वह उसकी दो बार फोटो खींचता था। पहली फोटो साफ नहीं होने का बहाना बनाकर दूसरी फोटो लेने के बाद ग्राहक के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर उसके नाम पर अतिरिक्त वीआई सिम जारी करवा लेता था। आरोप है कि इन सिम कार्डों को समीर और पंकज को करीब 1,500 रुपये प्रति सिम के हिसाब से बेचा जाता था। जांच में पता चला कि वर्ष 2026 के दौरान इस तरीके से करीब 187 सिम कार्ड जारी किए गए। पुलिस ने इस नेटवर्क से जुड़ी 114 साइबर अपराध शिकायतों की पहचान की है, जिनमें करीब 1.40 करोड़ रुपये की रकम शामिल है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन सिम कार्डों का इस्तेमाल किन-किन साइबर अपराधों में किया गया और नेटवर्क से अन्य कौन लोग जुड़े हैं।


बिजली कनेक्शन के नाम पर ठगी, 20 हजार रुपये में बैंक खाते बेचने का आरोप

तीसरे मामले में पुलिस ने सुमित नाम के आरोपी को गिरफ्तार किया है। यह मामला टाटा पावर का नया बिजली कनेक्शन दिलाने के नाम पर करीब 1.15 लाख रुपये की ठगी से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने ऑनलाइन बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया था। इसी दौरान एक व्यक्ति ने खुद को टाटा पावर का कर्मचारी बताकर संपर्क किया और आवेदन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक लिंक भेजा। लिंक पर जानकारी भरने के बाद शिकायतकर्ता के खाते से एक लाख रुपये और 15,800 रुपये निकाल लिए गए। जांच में पता चला कि ठगी की एक लाख रुपये की रकम सुमित के इंडियन ओवरसीज बैंक खाते में पहुंची थी। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में सुमित ने बताया कि उसने अपने परिचित विक्की चौहान के कहने पर खाता खुलवाया था और बैंक किट तथा सिम कार्ड समेत उसे 20 हजार रुपये में सौंप दिया था। जांच में सुमित के नाम पर दो अन्य बैंक खाते भी मिले, जिन्हें कथित तौर पर विक्की को दिया गया था। पुलिस को करीब 4.5 लाख रुपये के संदिग्ध लेनदेन से जुड़ी दो शिकायतें मिली हैं। इस मामले में दो साइबर ठगी के केस सुलझाने का दावा किया गया है। पुलिस विक्की चौहान की तलाश कर रही है।


APK फाइल से एमसीडी इंस्पेक्टर को लगाया 6.5 लाख का चूना

चौथे मामले में पुलिस ने पंजाब के जालंधर से सौरव नाम के आरोपी को गिरफ्तार किया है। यह मामला दिल्ली नगर निगम के एक इंस्पेक्टर से करीब 6.5 लाख रुपये की साइबर ठगी से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, पीड़ित को एक APK फाइल डाउनलोड कराई गई थी। फाइल इंस्टॉल होने के बाद मोबाइल और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी साइबर ठगों तक पहुंच गई और खाते से रुपये निकाल लिए गए। जांच में सामने आया कि सौरव कथित तौर पर झारखंड के जामताड़ा, गुजरात और पंजाब में सक्रिय साइबर ठगी के नेटवर्क के लिए रकम के लेनदेन का काम संभालता था। पुलिस का दावा है कि आरोपी ऑनलाइन सोना खरीदने, गिफ्ट कार्ड और क्रेडिट कार्ड बिल भुगतान के जरिए ठगी की रकम खपाता था। इसके बदले वह लगभग 30 प्रतिशत कमीशन लेता था। जांच में उसकी भूमिका करीब 3.73 करोड़ रुपये की ठगी की रकम को अलग-अलग माध्यमों से खपाने में सामने आई है। उसके मोबाइल से 29 बैंक खातों, 85 डेबिट-क्रेडिट कार्ड और 10 मास्क्ड कार्ड समेत कुल 124 खातों और कार्डों से संबंधित जानकारी मिली है। पुलिस उसकी बेकरी फैक्ट्री और महिंद्रा XUV700 की भी जांच कर रही है। आरोपी के खिलाफ पहले से दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में आठ मामले दर्ज बताए गए हैं।


125 शिकायतों का नेटवर्क से संबंध, पीड़ितों को रकम वापस कराने का दावा

दिल्ली पुलिस के अनुसार, चारों मामलों की जांच के दौरान कुल 125 NCRP शिकायतों को इन साइबर ठगी नेटवर्क से जोड़ा गया है। इनमें करीब 1.59 करोड़ रुपये की ठगी की रकम शामिल है। पुलिस ने आरोपियों के पास से कुल आठ मोबाइल फोन, आठ एटीएम कार्ड, सात चेकबुक, दो बैंक पासबुक, 10,030 रुपये नकद, एक पीओएस मशीन, एक यामाहा R15M बाइक और एक पॉकेट राउटर बरामद किया है। जांच में फर्जी तरीके से जारी सिम कार्ड, दूसरे लोगों के नाम पर खुलवाए गए बैंक खाते और मोबाइल एप्लीकेशन फाइल के जरिए ठगी करने के अलग-अलग तरीके सामने आए हैं। पुलिस के मुताबिक, MRM पोर्टल के माध्यम से साइबर ठगी के पीड़ितों को अब तक 74.94 लाख रुपये वापस कराए जा चुके हैं। वहीं, इन मामलों में शिकायतकर्ताओं को कुल 1.12 करोड़ रुपये रिफंड कराए जाने की जानकारी दी गई है। पुलिस अब फरार आरोपियों, बैंक खातों के इस्तेमाल और संदिग्ध लेनदेन की जांच कर रही है।

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