दिल्ली होटल अग्निकांड: धुएं ने छीनी 20 से अधिक जिंदगियां, अवैध कमरों और फायर सुरक्षा में लापरवाही, एंट्री और एग्जिट का रास्ता एक

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मालवीय नगर होटल अग्निकांड में अधिकांश लोगों की मौत धुएं से दम घुटने के कारण हुई। जांच में अवैध कमरों, एकमात्र निकास मार्ग और फायर सुरक्षा की गंभीर खामियां सामने आई हैं। हादसे में 22 लोगों की जान गई, जबकि कई घायल अब भी अस्पताल में भर्ती हैं।

दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश स्टे बीएंडबी होटल में हुए भीषण अग्निकांड ने राजधानी को झकझोर दिया है। इस हादसे में 22 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई घायल अस्पतालों में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। शुरुआती जांच और डॉक्टरों की रिपोर्ट से सामने आया है कि अधिकांश लोगों की मौत आग की लपटों से नहीं, बल्कि जहरीले धुएं के कारण दम घुटने से हुई। साकेत स्थित अस्पताल में लाए गए 39 लोगों में से 18 को मृत घोषित किया गया, जबकि कई मरीजों की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है। घटना ने एक बार फिर दिल्ली में फायर सेफ्टी व्यवस्था और अवैध निर्माणों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि होटल में क्षमता से कई गुना अधिक कमरे संचालित किए जा रहे थे और आपातकालीन निकास की पर्याप्त व्यवस्था भी नहीं थी।


धुएं ने बनाया मौत का जाल, बचने के लिए लोगों ने लगाई छलांग

विशेषज्ञों के अनुसार आग लगने के बाद सबसे बड़ा खतरा धुएं से होता है। होटल में भी यही हुआ। प्लास्टिक, पीवीसी और अन्य सिंथेटिक सामग्री के जलने से निकली जहरीली गैसों ने कमरों में फंसे लोगों को कुछ ही मिनटों में बेहोश कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार तीसरी और चौथी मंजिल पर फंसे लोग खिड़कियों से नीचे झांकते हुए मदद की गुहार लगा रहे थे। जब धुआं तेजी से कमरों में भरने लगा तो कई लोगों ने जान बचाने के लिए ऊंचाई से छलांग लगा दी। इससे कई लोगों के हाथ-पैर, पेल्विक बोन और रीढ़ की हड्डी तक में गंभीर चोटें आईं। अस्पताल में भर्ती कई मरीजों का इलाज आईसीयू में चल रहा है। इस बीच गिनी के एक नागरिक की जान केवल इसलिए बच गई क्योंकि वह घटना से कुछ देर पहले अपने पिता से मिलने अस्पताल चले गए थे।


जांच में सामने आईं गंभीर खामियां, प्रशासन ने शुरू की कार्रवाई

प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि होटल को केवल छह कमरों की अनुमति मिली थी, लेकिन वहां करीब 25 कमरे संचालित किए जा रहे थे। इमारत में प्रवेश और निकास के लिए केवल एक ही रास्ता था। एक बेसमेंट, भूतल और पांच मंजिलों वाली इमारत में सिर्फ एक सीढ़ी थी, जबकि खिड़कियां भी बंद थीं। इससे धुआं बाहर नहीं निकल सका और पूरी इमारत चिमनी की तरह काम करने लगी। आग लगने के बाद सेंसर आधारित गेट भी बंद हो गए, जिससे लोगों के बचने की संभावना और कम हो गई। हादसे के बाद होटल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। दिल्ली नगर निगम ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं और आसपास के अन्य होटलों व व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की भी जांच की जा रही है। विशेषज्ञों और आरडब्ल्यूए संगठनों ने राजधानी में फायर ऑडिट, तकनीकी निरीक्षण और सख्त सुरक्षा मानकों को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग उठाई है।

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