गाजियाबाद में अखिलेश यादव के आपत्तिजनक पोस्टरों से सियासी घमासान, सपा ने की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
- Shiv Kumar
- 26 Aug, 2026
गाजियाबाद: गाजियाबाद के रमते राम रोड, चौधरी मोड़, गांधीनगर कट और मोदीनगर समेत कई इलाकों में सपा प्रमुख अखिलेश यादव की तस्वीर वाले आपत्तिजनक पोस्टर लगाए जाने से राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। पोस्टरों में अखिलेश यादव को निशाना बनाने के साथ जातिगत टिप्पणियां किए जाने का दावा है। मामले की जानकारी मिलते ही समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष फैजल हुसैन, प्रदेश सचिव अभिषेक गर्ग समेत पार्टी कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और नाराजगी जताई। सपा नेताओं ने पोस्टरों को पार्टी और अखिलेश यादव की छवि खराब करने की कोशिश बताते हुए निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि पोस्टर किसने लगवाए और इसके पीछे किसकी भूमिका है। प्रशासन और नगर निगम की टीम ने सार्वजनिक स्थानों पर लगाए गए पोस्टरों को हटवा दिया है। सपा ने अब पुलिस, कमिश्नर और जिलाधिकारी को शिकायत देने की तैयारी की है।
कई इलाकों में लगाए गए आपत्तिजनक पोस्टर
रमते राम रोड, चौधरी मोड़, गांधीनगर कट और मोदीनगर के व्यस्त चौराहों पर रात के समय पोस्टर लगाए जाने की बात सामने आई है। पोस्टरों में अखिलेश यादव की तस्वीर के साथ जयंत चौधरी को लेकर टिप्पणी और ब्राह्मण, वैश्य तथा स्वर्ण जातियों से संबंधित आपत्तिजनक भाषा इस्तेमाल किए जाने का दावा है। पोस्टरों पर समाजवादी पार्टी को निशाना बनाते हुए भी टिप्पणी लिखी गई थी। खास बात यह है कि पोस्टरों पर किसी व्यक्ति, संस्था या विज्ञापनदाता का स्पष्ट नाम दिखाई नहीं दिया। सपा कार्यकर्ताओं ने मौके पर पहुंचकर पोस्टरों का जायजा लिया और इसे राजनीतिक साजिश करार देते हुए विरोध जताया। हालांकि, पोस्टर किसने लगवाए, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
सपा ने निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की
सपा जिला अध्यक्ष फैजल हुसैन और प्रदेश सचिव अभिषेक गर्ग ने कहा कि पार्टी इस मामले को गंभीरता से ले रही है। नेताओं का आरोप है कि अखिलेश यादव की लोकप्रियता और पार्टी के बढ़ते जनाधार से परेशान होकर विरोधियों की ओर से इस तरह का अभियान चलाया जा रहा है। सपा नेताओं ने स्पष्ट किया कि जाति या किसी समाज के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा पार्टी की विचारधारा नहीं है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध लोकतांत्रिक तरीके से होना चाहिए। पार्टी कमिश्नर और जिलाधिकारी को ज्ञापन देने के साथ पुलिस में शिकायत दर्ज कराकर पोस्टर लगाने वालों की पहचान और कार्रवाई की मांग करेगी।
पोस्टर हटाए गए, अब जिम्मेदारों की तलाश
आपत्तिजनक पोस्टरों की सूचना के बाद प्रशासन और नगर निगम की टीम सक्रिय हुई और सार्वजनिक स्थानों से पोस्टर हटाए गए। इसके बाद फिलहाल स्थिति सामान्य है, लेकिन पोस्टर लगाने वालों की पहचान को लेकर सवाल बना हुआ है। यदि ये पोस्टर किसी अधिकृत विज्ञापन स्थल या यूनिपोल पर लगाए गए थे, तो अनुमति और संबंधित एजेंसी की भूमिका की भी जांच हो सकती है। सपा नेताओं का कहना है कि पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि इस अभियान के पीछे कौन लोग हैं। दरअसल, अखिलेश यादव के जयंत चौधरी को लेकर दिए गए बयान के बाद प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी तेज है और इसी विवाद के बीच गाजियाबाद में पोस्टर सामने आए हैं।
Leave a Reply
Your email address will not be published. Required fields are marked *






