Delhi Building Collapse: चार मंजिला इमारत गिरी, 50-60 छात्र फंसे, PG में रहते थे, कई मलबे में दबे, आतिशी ने की जांच की मांग

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दिल्ली के सत्य निकेतन में बारिश के बीच चार मंजिला इमारत ढह गई। मलबे में छात्रों समेत कई लोगों के फंसे होने की आशंका है। एनडीआरएफ, दमकल और पुलिस की टीमें लगातार बचाव अभियान चला रही हैं और कुछ छात्रों को बाहर निकालकर अस्पताल भेजा गया है।

दिल्ली में पिछले तीन दिनों से लगातार हो रही बारिश के बीच रविवार को दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में बड़ा हादसा हो गया। मोती बाग स्थित सत्य निकेतन में एक चार मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। बताया जा रहा है कि इमारत में छात्र पीजी के तौर पर रह रहे थे और हादसे के वक्त बड़ी संख्या में छात्र अंदर मौजूद थे। स्थानीय भाजपा विधायक अनिल शर्मा के मुताबिक, मलबे के अंदर से कुछ छात्रों के फोन भी आ रहे हैं। वहीं ताजा जानकारी के अनुसार करीब 50 से 60 छात्रों के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। शुरुआती प्रयास में कुछ छात्रों को बाहर निकाला गया है और उन्हें अस्पताल भेजा गया है। सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग, एनडीआरएफ और अन्य बचाव एजेंसियां मौके पर पहुंच गईं। मलबे में फंसे लोगों की तलाश के लिए युद्ध स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है।


मलबे के अंदर से छात्रों के फोन आने का दावा

घटनास्थल पर पहुंचे भाजपा विधायक अनिल शर्मा ने हादसे को बेहद हृदयविदारक बताया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग जगहों से छात्र पढ़ाई के लिए दिल्ली आते हैं और इस इमारत में पीजी में रहते थे। विधायक ने बताया कि कुछ छात्रों के फोन मलबे के अंदर से आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल यह बताना मुश्किल है कि अंदर पांच, 10 या 20 छात्र हैं, लेकिन कुछ लोगों के फंसे होने की जानकारी मिल रही है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री ने पूरी टीम को मौके पर भेजा है और सरकार की प्राथमिकता मलबे में फंसे छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालना है। प्रशासन की ओर से अभी फंसे लोगों की सटीक संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।


एनडीआरएफ और डॉग स्क्वॉड ने संभाला मोर्चा

मलबे में फंसे लोगों का पता लगाने के लिए एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंच गई है। बचावकर्मी डॉग स्क्वॉड की मदद से मलबे के अंदर जिंदा लोगों की मौजूदगी का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। दमकल विभाग की कई गाड़ियां भी राहत कार्य में जुटी हैं। मौके पर जेसीबी और अन्य जरूरी उपकरणों की मदद से मलबा हटाया जा रहा है। दिल्ली पुलिस और प्रशासन की टीमें भी घटनास्थल पर मौजूद हैं। अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती मलबे को सावधानी से हटाते हुए अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने की है। बचाव अभियान लगातार जारी है और हर संभावित स्थान की जांच की जा रही है।


10 से 15 छात्रों को निकालने की जानकारी

डूसू अध्यक्ष आर्यन मान ने बताया कि करीब 10 से 15 छात्रों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाले जाने की जानकारी है। उनके मुताबिक, इमारत में कुल करीब 15 से 20 छात्र मौजूद हो सकते थे और बचाव अभियान के दौरान कुछ छात्रों को निकालकर अस्पताल भेजा गया है। हालांकि, फंसे छात्रों की संख्या को लेकर अलग-अलग जानकारी सामने आ रही है। कुछ लोगों के मुताबिक मलबे में 50 से 60 छात्रों के फंसे होने की आशंका है। ऐसे में प्रशासन रजिस्ट्रेशन और पीजी से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर वास्तविक संख्या पता करने की कोशिश कर रहा है। बाहर निकाले गए छात्रों की हालत के बारे में फिलहाल विस्तृत आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।


आतिशी ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की

हादसे को लेकर दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने भी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना बेहद दुखद और चिंताजनक है। उन्होंने प्रशासन से राहत और बचाव अभियान पूरी तत्परता से चलाने की अपील की और मलबे में फंसे लोगों को जल्द सुरक्षित बाहर निकालने की मांग की। आतिशी ने घटना की उच्चस्तरीय जांच कराने और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निर्माण और सुरक्षा मानकों की भी गंभीरता से जांच होनी चाहिए।


मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा- सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हादसे पर चिंता जताते हुए कहा कि मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने और प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता देने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पूरी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और सभी संबंधित एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं। मौके पर एनडीआरएफ, डीडीएमए, दमकल विभाग, दिल्ली पुलिस, एमसीडी और नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों की टीमें राहत-बचाव अभियान में जुटी हैं। एहतियात के तौर पर आसपास की इमारत को भी खाली कराया गया है, ताकि किसी अन्य हादसे की आशंका को टाला जा सके।

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