CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन से पहले दिल्ली में सख्ती, नेहा बोरा समेत कई प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए गए

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नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस द्वारा घर से हिरासत में लिए जाने का दावा सोशल मीडिया पर सामने आया है। CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले आए इस दावे पर पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। हिरासत के कारण और कानूनी आधार स्पष्ट नहीं हैं।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध के बीच AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने का दावा सामने आया है। सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे पोस्ट में कहा गया है कि पुलिस उन्हें उनके घर से अपने साथ ले गई। हालांकि, खबर लिखे जाने तक दिल्ली पुलिस की ओर से कथित हिरासत के कारण, स्थान या कानूनी आधार को लेकर कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान उपलब्ध नहीं था। ऐसे में फिलहाल इसे सोशल मीडिया पर सामने आए दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।


नेहा बोरा ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का किया था ऐलान

यह दावा ऐसे समय सामने आया है जब नेहा बोरा ने शुक्रवार को जंतर-मंतर पर CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया था। द टेलीग्राफ ने 25 सितंबर को प्रकाशित अपनी रिपोर्ट में भी बताया था कि AISA अध्यक्ष ने शुक्रवार को ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की घोषणा की थी। चुनाव आयोग और SIR को लेकर जारी विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग तेज होने की बात कही गई है। इसी क्रम में नेहा बोरा ने प्रदर्शन का ऐलान किया था। इससे पहले Cockroach Janta Party यानी CJP ने भी ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे में इस्तीफा देने की मांग करते हुए देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी थी। CJP ने मांग पूरी नहीं होने पर ‘Jantar Mantar 2.0’ आयोजित करने की बात कही थी।


सोशल मीडिया पोस्ट में हिरासत को लेकर क्या दावा

सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट में दावा किया गया कि दिल्ली पुलिस ने नेहा बोरा को उनके घर से अपने साथ लिया। पोस्ट में इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे प्रस्तावित आंदोलन से भी जोड़ा गया है। हालांकि, ऐसा कोई स्वतंत्र प्रमाण उपलब्ध नहीं है जिससे यह कहा जा सके कि अगर नेहा बोरा को हिरासत में लिया गया, तो उसकी वजह ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन ही था। यही कारण है कि इस मामले में दिल्ली पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अभी तक हिरासत के समय, स्थान और कारण को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।


‘अवैध हिरासत’ के दावे पर क्या स्थिति

सोशल मीडिया पोस्ट में कार्रवाई को लेकर ‘अवैध हिरासत’ का सवाल भी उठाया गया है, लेकिन केवल सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर ऐसा निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। यह स्पष्ट होना जरूरी है कि पुलिस ने नेहा बोरा को किस कानूनी प्रावधान के तहत रोका या हिरासत में लिया, क्या उन्हें कोई नोटिस दिया गया था और उन्हें कहां ले जाया गया। इन तथ्यों की जानकारी सामने आने के बाद ही हिरासत की वैधता को लेकर कोई कानूनी निष्कर्ष निकाला जा सकता है।


कौन हैं नेहा बोरा और क्यों बढ़ा विरोध

नेहा बोरा All India Students’ Association यानी AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की शोधार्थी हैं। हाल के महीनों में वह छात्र आंदोलनों से जुड़े प्रदर्शनों में सक्रिय रही हैं। जुलाई में जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन के दौरान उन्होंने करीब 23 दिनों तक भूख हड़ताल की थी। इसके बाद भी वह परीक्षा, भर्ती और छात्र आंदोलनों से जुड़े कई प्रदर्शनों में शामिल रही हैं। CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध उस रिपोर्ट के बाद और तेज होने की बात कही गई जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने बीते करीब 10 महीनों में चुनाव आयोग के विभिन्न फैसलों पर कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज की थीं। CJP ने इसी विवाद के बीच ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, SIR से जुड़े फैसलों की स्वतंत्र जांच और कुछ अन्य मांगों को लेकर अभियान शुरू किया है। संगठन ने 48 घंटे में इस्तीफा नहीं होने पर देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है। वहीं, चुनाव आयोग का पक्ष है कि बहु-सदस्यीय संस्था में अलग-अलग राय सामान्य विचार-विमर्श का हिस्सा है और अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए जाते हैं।


अब दिल्ली पुलिस के जवाब का इंतजार

फिलहाल मुख्य सवाल यही है कि नेहा बोरा को वास्तव में हिरासत में लिया गया है या नहीं और अगर लिया गया है तो किस आधार पर। जब तक दिल्ली पुलिस या AISA की ओर से हिरासत के समय, कारण और मौजूदा स्थिति की विस्तृत जानकारी सामने नहीं आती, तब तक सोशल मीडिया पर किए जा रहे बड़े दावों को स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।

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