दिल्ली मेट्रो की एयरपोर्ट लाइन में सरकार पर सवाल उठाने वाले पोस्टर, अज्ञात के खिलाफ FIR

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दिल्ली मेट्रो की एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन की ट्रेन में सरकार के कामकाज पर सवाल उठाने वाले दो पोस्टर मिलने से हड़कंप मच गया। पुलिस ने सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और मेट्रो रेलवे कानून के तहत अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

नई दिल्ली। दिल्ली मेट्रो की एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन पर चल रही ट्रेन के भीतर सरकार के कामकाज पर सवाल उठाने वाले दो पोस्टर मिलने के बाद पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पोस्टरों में देश में हाल के वर्षों में हुए बदलावों को लेकर नौ दावे किए गए थे और लोगों से ऑनलाइन समूह से जुड़ने की अपील की गई थी। इसके लिए क्यूआर कोड भी छापा गया था। मामला 20 अक्टूबर को सामने आया, जब ट्रेन ऑपरेटर तरुण चौधरी ने निरीक्षण के दौरान एक सीट पर चिपके पोस्टर देखे। उन्होंने उन्हें हटाकर वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी। इसके बाद पोस्टर पुलिस को सौंपे गए। घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और मेट्रो के भीतर राजनीतिक प्रचार को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।


ट्रेन की सीट पर चिपके मिले दोनों पोस्टर

जानकारी के मुताबिक, एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन की ट्रेन यशोभूमि स्टेशन पहुंचने के बाद ऑपरेटर तरुण चौधरी ने केबिन और यात्रियों के बैठने वाले हिस्से का निरीक्षण शुरू किया। इसी दौरान उन्हें एक सीट पर दो काले-सफेद पोस्टर चिपके दिखाई दिए। पोस्टर हटाने के बाद उन्होंने ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर और संबंधित अधिकारियों को जानकारी दी। बाद में इन्हें द्वारका सेक्टर-21 स्टेशन कंट्रोलर के माध्यम से पुलिस के हवाले किया गया। एक पोस्टर पर ‘यू कैन चेंज योर ओन लाइफ’, ‘वोटिंग प्रोटेस्ट’, ‘स्पेक्ट्रम ऑफ इंगेजमेंट’ और ‘कम्युनिटी बिल्डिंग रिफॉर्म’ जैसे संदेश लिखे थे। दूसरे पोस्टर में ‘डिसेटिस्फाइड? यू आर नॉट अलोन’ शीर्षक के साथ सरकार की योजनाओं और अभियानों पर सवाल उठाए गए थे। पुलिस ने दोनों पोस्टर जब्त कर लिए हैं।


सार्वजनिक संपत्ति और मेट्रो कानून के तहत केस

पुलिस ने इस मामले में दिल्ली प्रिवेंशन ऑफ डिफेसमेंट ऑफ पब्लिक प्रॉपर्टी एक्ट, 2007 और मेट्रो रेलवे ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस एक्ट, 2002 की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। फिलहाल किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं हुई है और मुकदमा अज्ञात आरोपितों के खिलाफ दर्ज किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टर किसने लगाए, यह पता लगाने के लिए मेट्रो परिसर और स्टेशनों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। जांच में स्पेशल सेल को भी शामिल किया गया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पोस्टर ट्रेन के भीतर किस स्टेशन पर लगाए गए और उन्हें लगाने वाले लोग कितनी देर तक मेट्रो में मौजूद रहे। क्यूआर कोड से जुड़े ऑनलाइन समूह और उसके संचालकों की भी जांच की जा रही है।


मेट्रो में राजनीतिक संदेशों को लेकर बढ़ी निगरानी

मेट्रो ट्रेनों और स्टेशनों में बिना अनुमति पोस्टर, पर्चे या प्रचार सामग्री लगाना नियमों का उल्लंघन माना जाता है। एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन पर हुई इस घटना ने यात्रियों के बीच भी चर्चा छेड़ दी है, क्योंकि यह मार्ग इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और नई दिल्ली जैसे महत्वपूर्ण केंद्रों को जोड़ता है। अधिकारियों के सामने अब दोहरी चुनौती है—एक ओर यात्रियों की सुरक्षा और साफ-सफाई व्यवस्था बनाए रखना, दूसरी ओर सार्वजनिक परिवहन को राजनीतिक प्रचार का मंच बनने से रोकना। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां पोस्टरों की छपाई, भाषा और क्यूआर कोड के डिजिटल रिकॉर्ड से सुराग जुटा रही हैं। पुलिस की अगली कार्रवाई आरोपितों की पहचान और ऑनलाइन समूह की गतिविधियों के सत्यापन पर निर्भर करेगी।

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