हिमांशु भाऊ गैंग के दो गुर्गे गिरफ्तार, विदेश में बैठे गैंगस्टर के इशारे पर शूटरों तक पहुंचाते थे पैसे और हथियार
- Shiv Kumar
- 30 Oct, 2026
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने विदेश में बैठे गैंगस्टर हिमांशु भाऊ के नेटवर्क से जुड़े दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, दोनों आरोपी गैंग के शूटरों को पैसे और हथियार पहुंचाने के साथ उनके ठहरने और पहचान छिपाने का इंतजाम करते थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गाजियाबाद के पसौंडा निवासी 25 वर्षीय मुर्सलीन उर्फ गुल्लू और हरियाणा के भिवानी निवासी 20 वर्षीय नवीन के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके कब्जे से एक पिस्टल और पांच जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। जांच में सामने आया है कि दोनों विदेश में बैठे हिमांशु भाऊ के निर्देश पर काम करते थे और सुरक्षित इंटरनेट आधारित कम्युनिकेशन ऐप के जरिए उसके संपर्क में रहते थे। पुलिस का दावा है कि दोनों की गिरफ्तारी से गैंग के आर्थिक और लॉजिस्टिक नेटवर्क के बारे में अहम जानकारी मिली है।
विशाखापत्तनम में शूटरों के संपर्क में आया था मुर्सलीन
पुलिस के अनुसार, मुर्सलीन जनवरी 2026 में विशाखापत्तनम में हिमांशु भाऊ गैंग के दो शूटरों के संपर्क में आया था। ये शूटर दिल्ली-एनसीआर में वारदात करने के बाद वहां छिपे हुए थे। इसके बाद मुर्सलीन गैंग के लिए काम करने लगा। वह हिमांशु भाऊ की ओर से भेजे गए पैसे शूटरों तक पहुंचाता था। इसके अलावा उनके होटल में ठहरने के लिए फर्जी पहचान पत्रों का इंतजाम भी करता था। पुलिस का कहना है कि अगस्त 2026 में गैंग के शूटरों की गिरफ्तारी के बाद हिमांशु भाऊ ने मुर्सलीन को शूटर के तौर पर तैयार करना शुरू कर दिया था। उसे हथियार भी उपलब्ध कराए गए थे। गिरफ्तारी के समय वह कथित तौर पर टारगेट किलिंग या रेकी के लिए निर्देश मिलने का इंतजार कर रहा था।
बैंक खाते से पैसे पहुंचाने के बाद हथियारों की सप्लाई करने लगा नवीन
मुर्सलीन से पूछताछ के बाद पुलिस ने हरियाणा के भिवानी से नवीन को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, गैंग के शूटरों ने उसे भी अपने नेटवर्क में शामिल किया था। शुरुआत में नवीन अपने बैंक खाते के जरिए हिमांशु भाऊ की ओर से भेजी गई रकम को आगे पहुंचाने में मदद करता था। बाद में वह गैंग के लिए हथियारों की सप्लाई करने लगा। पुलिस का दावा है कि दोनों आरोपी सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म के जरिए विदेश में बैठे गैंगस्टर के संपर्क में रहते थे। इसी माध्यम से उन्हें निर्देश मिलते थे और गैंग की गतिविधियों का तालमेल बनाया जाता था।
युवाओं को नेटवर्क में शामिल कर अलग-अलग जिम्मेदारियां दे रहा था गैंग
स्पेशल सेल की जांच में सामने आया है कि विदेश में बैठे गैंग के सरगना युवाओं को अपने नेटवर्क में शामिल कर रहे थे। कुछ को शूटर के तौर पर तैयार किया जा रहा था, जबकि दूसरे युवाओं से पैसे पहुंचाने, हथियारों की सप्लाई और फरार शूटरों के ठहरने का इंतजाम कराने जैसे काम लिए जा रहे थे। पुलिस के अनुसार, मुर्सलीन ने दूसरी कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी और पेंटर का काम करने लगा था। विशाखापत्तनम में काम के दौरान वह गैंग के शूटरों के संपर्क में आया और उनकी जीवनशैली से प्रभावित होकर नेटवर्क में शामिल हो गया। वहीं, नवीन नौवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़कर बढ़ई का काम करने लगा था। पुलिस का कहना है कि स्कूल के दिनों में ही वह गलत संगत में पड़ गया था। मैसूर में उसकी मुलाकात गैंग के शूटरों से हुई थी। नवीन पहले भी हत्या के प्रयास के एक मामले में शामिल रहा है।
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