जयपुर में Exam के बीच बत्ती गुल! 49 छात्रों की परीक्षा फिर होगी
- Babli Ansari
- 22 Aug, 2026
जयपुर। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की एक और परीक्षा शनिवार को अव्यवस्था की भेंट चढ़ गई। ऑल इंडिया आयुष पोस्ट ग्रेजुएट एंट्रेंस टेस्ट के दौरान जयपुर के श्री सत्य साईं पीजी कॉलेज केंद्र पर बिजली गुल होते ही परीक्षा केंद्र में अफरा-तफरी मच गई। जानकारी के मुताबिक, केंद्र पर 192 अभ्यर्थी परीक्षा दे रहे थे, लेकिन 49 छात्र ऐसे रहे जो पावर कट की वजह से अपनी परीक्षा पूरी नहीं कर सके। कुछ देर बाद जनरेटर चालू किया गया, मगर तब तक कई कंप्यूटर सिस्टम बंद हो चुके थे और छात्रों का समय बर्बाद हो चुका था।
परीक्षा केंद्र पर क्या हुआ
मामला सुबह उस वक्त बिगड़ा जब ऑनलाइन मोड में चल रही परीक्षा के बीच अचानक सप्लाई चली गई। छात्रों के आरोप हैं कि बैकअप व्यवस्था भी समय पर काम नहीं आई। कई अभ्यर्थियों को पहले कमरे से बाहर निकाला गया, फिर ग्राउंड में जमा किया गया। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक बिजली करीब 15 मिनट तक गुल रही, लेकिन उसी दौरान परीक्षा का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो गया। परीक्षा केंद्र पर मौजूद छात्रों ने जमकर हंगामा किया और व्यवस्था पर सवाल उठाए। बताया जा रहा है कि कई मशीनें रीस्टार्ट होने में भी लंबा वक्त लगाती रहीं, जिससे अंदर का माहौल और बिगड़ गया।
NTA और तकनीकी जिम्मेदारी पर सवाल
सूत्रों के अनुसार, NTA ने बाद में माना कि 49 अभ्यर्थी परीक्षा पूरी नहीं कर पाए और उनके लिए री-एग्जाम की घोषणा कर दी। एजेंसी ने इन छात्रों की परीक्षा 1 सितंबर को सुबह 10 बजे राजस्थान कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग फॉर वूमेन, जयपुर में कराने का फैसला किया है। एनटीए ने इस परेशानी पर अफसोस जताया है, लेकिन इस घटना ने परीक्षा संचालन की तैयारी और तकनीकी बैकअप को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परीक्षा में देरी, बिजली कटौती और कंप्यूटर ठप होने की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं, लेकिन इस बार मामला सीधे मेडिकल प्रवेश परीक्षा से जुड़ा है, इसलिए छात्रों का गुस्सा और तेज दिखा।
छात्रों की नाराजगी और आगे की तस्वीर
जयपुर में यह घटना सिर्फ एक केंद्र की गड़बड़ी नहीं, बल्कि उस भरोसे पर चोट मानी जा रही है जिस पर पूरी परीक्षा व्यवस्था टिकी होती है। अभ्यर्थियों का कहना है कि महीनों की तैयारी और लंबा इंतजार एक झटके में बेकार हो गया। कई छात्रों ने इसे सिस्टम की लापरवाही बताया और मांग की कि प्रभावित सभी परीक्षार्थियों को बराबरी का मौका मिलना चाहिए। अब नजरें 1 सितंबर की री-एग्जाम पर हैं, लेकिन छात्र संगठन और अभ्यर्थी यह भी पूछ रहे हैं कि ऐसी परीक्षा में पावर बैकअप, तकनीकी निगरानी और सेंटर की जवाबदेही पहले से पुख्ता क्यों नहीं थी। अगर इस सवाल का जवाब नहीं मिला, तो आने वाले दिनों में विवाद और बढ़ सकता है।
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