मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना यूपी: पात्रता, लाभ और आवेदन की पूरी प्रक्रिया, जानें यहां
- Shiv Kumar
- 08 Oct, 2026
उत्तर प्रदेश में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बेटी की शादी का खर्च उठाना अक्सर बड़ी चुनौती बन जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना चलाती है, जिसके तहत पात्र परिवारों की बेटियों और कुछ पात्र महिलाओं का सामूहिक विवाह सरकारी व्यवस्था के तहत कराया जाता है। योजना का मकसद शादी के खर्च का बोझ कम करने के साथ जरूरतमंद परिवारों को सम्मानजनक तरीके से विवाह का अवसर देना है। 2026 में योजना की पात्रता के लिए परिवार की वार्षिक आय सीमा अधिकतम 3 लाख रुपये तक रखी गई है और शादी के दिन लड़की की उम्र कम से कम 18 साल तथा लड़के की उम्र कम से कम 21 साल होनी चाहिए। विधवा, परित्यक्ता और कानूनी रूप से तलाकशुदा महिलाओं के पुनर्विवाह को भी योजना में शामिल किया गया है। योजना के तहत फिलहाल प्रति जोड़े कुल 1 लाख रुपये की व्यवस्था है, जिसमें सहायता राशि, विवाह सामग्री और आयोजन से जुड़े खर्च शामिल हैं।
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना क्या है
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना उत्तर प्रदेश सरकार की समाज कल्याण से जुड़ी योजना है, जिसमें निर्धन, जरूरतमंद और निराश्रित परिवारों की विवाह योग्य बेटियों का सामूहिक विवाह कराया जाता है। योजना में सामाजिक और धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह कराने की व्यवस्था रहती है। पात्र विधवा, परित्यक्ता और कानूनी रूप से तलाकशुदा महिलाओं के पुनर्विवाह को भी इसमें शामिल किया गया है। योजना का एक उद्देश्य सामाजिक समरसता और सर्वधर्म-समभाव को बढ़ावा देना भी है। आवेदन के बाद संबंधित स्तर पर दस्तावेज और पात्रता की जांच होती है। इसके बाद चयनित जोड़ों को निर्धारित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में शामिल किया जाता है। उत्तर प्रदेश के जिला प्रशासन की वेबसाइटों पर भी इस योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन और पात्रता से जुड़ी जानकारी दी गई है।
योजना का उद्देश्य और लाभ
इस योजना का सबसे बड़ा उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों पर शादी का आर्थिक बोझ कम करना है। सरकार सामूहिक आयोजन के जरिए शादी की जरूरी व्यवस्थाएं कराती है और पात्र दुल्हन के खाते में सहायता राशि भी भेजती है। मौजूदा व्यवस्था में प्रति जोड़े कुल 1 लाख रुपये खर्च किए जाते हैं। जुलाई 2026 में जारी जिला-स्तरीय जानकारी के अनुसार अब इसमें 64 हजार रुपये सीधे कन्या के बैंक खाते में दिए जाते हैं, जबकि 21 हजार रुपये विवाह उपहार सामग्री पर और 15 हजार रुपये आयोजन की व्यवस्था पर खर्च होते हैं। इससे परिवार को शादी के जरूरी सामान और आयोजन संबंधी खर्च में मदद मिलती है। योजना का लाभ किसी एक जाति तक सीमित नहीं है, बल्कि निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले विभिन्न वर्गों के पात्र परिवार इसमें आवेदन कर सकते हैं।
पात्रता की शर्तें
योजना का लाभ लेने के लिए सबसे पहले कुछ जरूरी शर्तें पूरी करना आवश्यक है। लड़की के अभिभावक उत्तर प्रदेश के मूल निवासी होने चाहिए और परिवार की वार्षिक आय अधिकतम 3 लाख रुपये तक होनी चाहिए। विवाह की तारीख पर लड़की की उम्र कम से कम 18 साल और लड़के की उम्र कम से कम 21 साल होनी जरूरी है। सामान्य तौर पर कन्या अविवाहित होनी चाहिए, लेकिन विधवा, परित्यक्ता या कानूनी रूप से तलाकशुदा महिला के पुनर्विवाह को भी योजना में शामिल किया गया है। निराश्रित कन्या, विधवा महिला की बेटी, दिव्यांग अभिभावक की बेटी और स्वयं दिव्यांग कन्या को प्राथमिकता देने का प्रावधान है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के आवेदकों को संबंधित जाति प्रमाण पत्र भी देना पड़ सकता है।
मिलने वाली अनुदान राशि और सामान
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में मौजूदा कुल प्रावधान प्रति जोड़े 1 लाख रुपये का है। 2026 में हुए बदलाव के बाद 64 हजार रुपये सीधे नवविवाहित कन्या के बैंक खाते में भेजे जाने की व्यवस्था बताई गई है। 21 हजार रुपये के तहत वर-वधू को विवाह में उपयोग होने वाली निर्धारित उपहार सामग्री दी जाती है, जबकि 15 हजार रुपये सामूहिक विवाह समारोह की व्यवस्था, भोजन, पंडाल और दूसरी जरूरी सेवाओं पर खर्च किए जाते हैं। फरवरी 2026 के बजट भाषण में 1.01 लाख रुपये का उल्लेख होने के बाद इस राशि को लेकर भ्रम हुआ था, लेकिन राज्य के समाज कल्याण मंत्री ने साफ किया कि मौजूदा कुल प्रावधान 1 लाख रुपये ही है। इसलिए आवेदन करते समय वर्तमान जिला या विभागीय सूचना को ही अंतिम आधार मानना बेहतर है।
जरूरी दस्तावेज
आवेदन करते समय दस्तावेजों का सही होना बहुत जरूरी है, क्योंकि इन्हीं के आधार पर पात्रता की जांच की जाती है। सामान्य तौर पर आवेदक को आय प्रमाण पत्र, मूल निवास प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, वर-वधू की फोटो और बैंक खाते की जानकारी देनी होती है। लड़की और लड़के की उम्र साबित करने के लिए जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल रिकॉर्ड या विभाग द्वारा मान्य अन्य दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के आवेदकों के लिए जाति प्रमाण पत्र भी जरूरी हो सकता है। विधवा या तलाकशुदा महिला के पुनर्विवाह के मामले में संबंधित दस्तावेज भी देने पड़ सकते हैं। आवेदन में आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर और बैंक विवरण सही भरना जरूरी है, ताकि सत्यापन और भुगतान की प्रक्रिया में परेशानी न आए।
ऑनलाइन आवेदन कैसे करें
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन विभाग के निर्धारित पोर्टल से किया जा सकता है। सबसे पहले आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपनी जानकारी के अनुसार आवेदन फॉर्म भरना होता है। इसमें आवेदक, वर-वधू, परिवार की आय, पता और बैंक खाते से जुड़ी जानकारी सावधानी से दर्ज करनी चाहिए। इसके बाद मांगे गए दस्तावेज और फोटो अपलोड करने होते हैं। आवेदन जमा करने के बाद उसकी जानकारी सुरक्षित रखना जरूरी है। जिला स्तर पर आवेदन की जांच के दौरान आय, उम्र, जाति और अन्य दस्तावेजों का सत्यापन किया जाता है। कुछ जिलों में ऑनलाइन आवेदन के बाद आवेदन की प्रिंट कॉपी संबंधित विकासखंड, नगर निकाय या समाज कल्याण कार्यालय में जमा कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसलिए आवेदन के बाद अपने जिले के निर्देश जरूर देख लें।
सामूहिक विवाह कार्यक्रम में पंजीकरण की प्रक्रिया
ऑनलाइन आवेदन के बाद संबंधित विभाग और स्थानीय प्रशासन पात्रता की जांच करता है। ग्रामीण क्षेत्रों में विकासखंड स्तर और शहरी क्षेत्रों में नगर निकाय स्तर पर आवेदन की जांच की जा सकती है। पात्र पाए जाने वाले जोड़ों को निर्धारित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में शामिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है। अब योजना में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई जगह वर-वधू की बायोमेट्रिक और फेस अटेंडेंस भी कराई जा रही है। यानी विवाह समारोह में पहुंचने पर पहचान का सत्यापन किया जा सकता है। कार्यक्रम की तारीख और स्थान जिला प्रशासन की ओर से तय किए जाते हैं। इसलिए आवेदन करने के बाद संबंधित विकासखंड, नगर निकाय या जिला समाज कल्याण विभाग से कार्यक्रम की तारीख और आगे की प्रक्रिया की जानकारी लेते रहना जरूरी है।
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