WhatsApp पर फेस्टिव ऑफर के नाम पर ठगी से बचें, इन सुरक्षा उपायों से सुरक्षित रखें बैंक खाता

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त्योहारों पर ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान WhatsApp पर मिलने वाले सस्ते ऑफर्स, फ्री गिफ्ट और डिस्काउंट कूपन आपके बैंक खाते पर भारी पड़ सकते हैं।

नई दिल्ली। त्योहारी खरीदारी के बीच WhatsApp पर आए भारी छूट वाले संदेश और गिफ्ट वाउचर का लालच लोगों की जेब पर भारी पड़ सकता है। साइबर ठग फर्जी विज्ञापन, नकली कूपन और सस्ते सामान के लिंक भेजकर ग्राहकों को जाल में फंसा रहे हैं। संदेश में सीमित समय, आखिरी मौका या कुछ ही स्टॉक बचने जैसी बातें लिखकर जल्द भुगतान का दबाव बनाया जाता है। लिंक खोलते ही उपयोगकर्ता को नकली वेबसाइट पर ले जाया जाता है, जहां बैंकिंग विवरण, कार्ड नंबर, ओटीपी या यूपीआई पिन हासिल करने की कोशिश होती है। जानकारों के मुताबिक WhatsApp पर मिला कोई भी ऑफर आधिकारिक ऐप या वेबसाइट पर जाकर जांचे बिना स्वीकार नहीं करना चाहिए। थोड़ी जल्दबाजी बैंक खाते को खाली करा सकती है।


फर्जी ऑफर और गिफ्ट वाउचर के नाम पर नया जाल

त्योहारों में सस्ते ड्राई फ्रूट, इलेक्ट्रॉनिक सामान और शॉपिंग गिफ्ट कार्ड के नाम पर ठगी के मामले सामने आ रहे हैं। कुछ संदेशों में बाजार मूल्य से 80 से 90 प्रतिशत तक कम कीमत का दावा किया जाता है। ग्राहक जैसे ही दिए गए लिंक पर जाता है, उससे छोटा भुगतान, डिलीवरी शुल्क या वाउचर सक्रिय करने के नाम पर रकम मांगी जाती है। कई बार भुगतान पृष्ठ असली ई-कॉमर्स कंपनी जैसा दिखता है, लेकिन वेबसाइट के पते में मामूली बदलाव रहता है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की सलाह है कि विज्ञापन में दिए लिंक पर क्लिक करने के बजाय कंपनी की वेबसाइट का पता खुद टाइप करें। विक्रेता की जानकारी, ग्राहक समीक्षा, वापसी नीति और सुरक्षित भुगतान विकल्पों की जांच जरूरी है।


WhatsApp की ये सेटिंग्स बढ़ाएंगी सुरक्षा

WhatsApp खाते को सुरक्षित रखने के लिए दो-स्तरीय सत्यापन तुरंत सक्रिय किया जा सकता है। इसमें छह अंकों का पिन खाते पर अतिरिक्त सुरक्षा परत लगाता है। सेटिंग्स में जाकर लिंक्ड डिवाइस की सूची भी देखनी चाहिए; अनजान उपकरण दिखे तो उसे तुरंत लॉगआउट कर दें। अनजान नंबरों की कॉल से परेशान उपयोगकर्ता Silence Unknown Callers सुविधा चालू कर सकते हैं। संदिग्ध संदेश मिलने पर जवाब देने, लिंक खोलने या फाइल डाउनलोड करने के बजाय नंबर को ब्लॉक और रिपोर्ट करना बेहतर है। किसी भी व्यक्ति को ओटीपी, यूपीआई पिन, कार्ड विवरण या WhatsApp का सत्यापन कोड नहीं देना चाहिए। बैंक और प्रतिष्ठित ई-कॉमर्स कंपनियां ऐसे गोपनीय विवरण संदेश के जरिए नहीं मांगतीं।


ठगी होने पर तुरंत उठाएं ये कदम

अगर किसी व्यक्ति ने फर्जी लिंक पर भुगतान कर दिया है या बैंकिंग जानकारी साझा कर दी है, तो समय गंवाए बिना बैंक को सूचना दें और कार्ड, खाते या यूपीआई सेवा को सुरक्षित कराएं। साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर तत्काल शिकायत दर्ज कराने से लेनदेन रोकने की संभावना बढ़ती है। शिकायत cybercrime.gov.in पर भी दर्ज की जा सकती है। अनजान नंबर से आया कैश ऑन डिलीवरी पार्सल भी बिना पुष्टि स्वीकार नहीं करना चाहिए। परिवार के बुजुर्गों, घरेलू कर्मचारियों और बच्चों को ऐसे संदेशों के बारे में पहले से समझाना जरूरी है। पुलिस और साइबर विशेषज्ञ लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि ठगी का तरीका बदल सकता है, लेकिन उसका आधार अक्सर वही रहता है—लिंक खुलवाना, फाइल डाउनलोड कराना या जल्दबाजी में पैसा भेजवाना।

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