सस्ती इम्यूनोथेरेपी से कैंसर इलाज की राह आसान, एक लाख का खर्च घटकर 30 हजार रुपये
- Babli Ansari
- 25 Oct, 2026
नई दिल्ली। कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली इम्यूनोथेरेपी अब पहले के मुकाबले अधिक मरीजों की पहुंच में आती दिख रही है। निवारुलुमैब के सस्ते बायोसिमिलर संस्करण के बाजार में आने से एक उपचार चक्र की लागत एक लाख रुपये से घटकर करीब 30 हजार रुपये रह गई है। डॉक्टरों के मुताबिक पिछले छह महीनों में इस दवा की सलाह पाने वाले मरीजों की संख्या में तेज बढ़ोतरी हुई है। इसका सीधा असर उन परिवारों पर पड़ा है, जो महंगे इलाज के कारण बीच में उपचार रोकने को मजबूर हो जाते थे। हालांकि दवा हर मरीज के लिए उपयुक्त नहीं है और इसका इस्तेमाल कैंसर के प्रकार, बीमारी की अवस्था और चिकित्सकीय जांच के आधार पर ही किया जाता है।
निवारुलुमैब के सस्ते संस्करण से बढ़ी मांग
मुंबई के प्रमुख कैंसर केंद्रों और निजी अस्पतालों के चिकित्सकों ने बताया कि सस्ते बायोसिमिलर के आने के बाद निवारुलुमैब के प्रिस्क्रिप्शन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल के डॉ. इमरान शेख के अनुसार, छह महीने में उनकी सलाह में 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी हुई। पहले एक चक्र पर एक लाख रुपये से ज्यादा खर्च का अनुमान सुनकर कई मरीज पीछे हट जाते थे, लेकिन अब करीब 30 हजार रुपये की कीमत पर वे उपचार शुरू करने को तैयार हैं। टाटा मेमोरियल सेंटर के विशेषज्ञों का कहना है कि निवारुलुमैब करीब 25 प्रकार के ट्यूमर और लगभग 100 चिकित्सकीय संकेतों में प्रभावी हो सकती है। फिर भी मरीजों को दवा की गुणवत्ता, खुराक और अस्पताल की निगरानी को लेकर समझौता नहीं करना चाहिए।
भारत में कम कीमत और स्थानीय शोध की भूमिका
इम्यूनोथेरेपी शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर कोशिकाओं के खिलाफ सक्रिय करने की कोशिश करती है। लंबे समय तक इसकी ऊंची कीमत ने इसे सीमित मरीजों तक बांध रखा था। विशेषज्ञों के मुताबिक भारत में हुए कुछ अध्ययनों से संकेत मिला है कि चुनिंदा परिस्थितियों में कम खुराक भी प्रभावी हो सकती है। इससे इलाज की कुल लागत घटाने की संभावना बनती है, हालांकि हर रोगी के लिए खुराक का फैसला अलग होगा। भारत में फिलहाल चेकप्वाइंट इन्हिबिटर श्रेणी की करीब सात दवाएं उपलब्ध बताई जाती हैं, जबकि चीन में इनकी संख्या इससे काफी अधिक है। निवारुलुमैब के अलावा कई विकल्प आयातित हैं और उनका खर्च अब भी लाखों रुपये तक पहुंच सकता है। इसलिए सस्ता बायोसिमिलर राहत तो है, लेकिन इसे कैंसर देखभाल की पूरी समस्या का समाधान नहीं माना जा सकता।
आगे और घट सकती है कीमत, मरीजों को सतर्क रहने की सलाह
जानकारी के मुताबिक निवारुलुमैब के चार और संस्करण बाजार में आने की तैयारी में हैं। प्रतिस्पर्धा बढ़ने पर इसकी कीमत 30 हजार रुपये से घटकर करीब 10 हजार रुपये तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि डॉक्टरों का सवाल है कि कम मार्जिन वाली दवाओं को छोटे शहरों और अस्पतालों में नियमित रूप से स्टॉक किया जाएगा या नहीं। सरकार ने 137 कैंसररोधी दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन सीमित करने की दिशा में कदम उठाया है। इससे मरीजों के सालाना खर्च में बड़ी बचत का अनुमान है। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि मरीज केवल कीमत देखकर दवा न चुनें और उपचार शुरू करने से पहले ऑन्कोलॉजिस्ट से रिपोर्ट आधारित राय लें। दवा की उपलब्धता, बीमा कवरेज और नियमित जांच—तीनों पर ध्यान देना जरूरी होगा।
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