इंडोनेशिया में ज्वालामुखी का कहर, 6 एयरपोर्ट बंद और 300 उड़ानें प्रभावित, 22, 800 यात्री फंसे, धुएं से कितना खतरा?
- Shiv Kumar
- 06 Sep, 2026
इंडोनेशिया के सुंडा जलडमरूमध्य में स्थित अनक क्राकाटोआ ज्वालामुखी रविवार तड़के जोरदार तरीके से फट पड़ा। विस्फोट के बाद ज्वालामुखी से निकली राख पश्चिमी इंडोनेशिया के कई हिस्सों में फैल गई। राख का गुबार इतना ऊंचा उठा कि इसका असर हवाई यातायात पर भी पड़ा। जकार्ता के सोएकार्नो-हत्ता अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे सहित कई हवाईअड्डों के हवाई क्षेत्र को बंद करना पड़ा। भूवैज्ञानिक एजेंसी के मुताबिक, ज्वालामुखी में जुलाई से गतिविधियां बढ़ी हुई थीं, जबकि शुक्रवार से इसमें और तेजी देखी गई। इसके बाद रविवार सुबह 3 बजकर 53 मिनट पर करीब 30 सेकंड तक विस्फोट हुआ। निगरानी कैमरों में ज्वालामुखी से लावा निकलने की गतिविधि भी दर्ज की गई। रविवार दोपहर तक हवाई क्षेत्र और हवाईअड्डों के प्रभावित रहने से कुल 516 उड़ान गतिविधियां प्रभावित हुईं। फिलहाल किसी की मौत की सूचना नहीं है और लोगों को बड़े पैमाने पर निकासी का आदेश भी नहीं दिया गया है।
राख के कारण कई हवाईअड्डों पर उड़ानें प्रभावित
ज्वालामुखीय राख के कारण विमानों की आवाजाही पर बड़ा असर पड़ा। अकेले जकार्ता के सोएकार्नो-हत्ता अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे की 202 उड़ानें प्रभावित हुईं, जिससे करीब 22,800 यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हवाईअड्डे को कम से कम शाम 5:30 बजे तक बंद रखने का आदेश दिया गया था। जकार्ता के हलीम परदानाकुसुमा हवाईअड्डे के अलावा लांपुंग के रादिन इंतेन द्वितीय हवाईअड्डे समेत चार अन्य हवाईअड्डे भी प्रभावित हुए। अधिकारियों ने राख के कारण हवाई क्षेत्र में विमानों की सुरक्षा को लेकर यह कदम उठाया। ज्वालामुखीय राख विमानों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है, इसलिए प्रभावित क्षेत्रों में उड़ानों को रोकना और मार्ग बदलना जरूरी माना गया।
50 हजार फीट तक पहुंचा राख का गुबार
इंडोनेशिया की ज्वालामुखी एजेंसी और डार्विन ज्वालामुखीय राख सलाह केंद्र ने उपग्रह तस्वीरों के जरिए राख के दो बड़े बादलों की पहचान की। इनमें से एक गुबार करीब 20 हजार फीट यानी 6,100 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचा और जकार्ता, बांतन तथा पश्चिमी जावा की ओर बढ़ा। वहीं दूसरा राख का गुबार करीब 50 हजार फीट यानी 15,200 मीटर की ऊंचाई तक पहुंच गया। यह बांतन, लांपुंग और बेंगकुलु के कुछ हिस्सों के साथ सुंडा जलडमरूमध्य और सुमात्रा के पश्चिम में हिंद महासागर के हिस्से तक फैल गया। अधिकारियों के अनुसार, इस समय मुख्य खतरा ज्वालामुखीय राख, जहरीली गैसों की अधिक मात्रा और गर्म पत्थरों के बाहर निकलने से है।
जुलाई से बढ़ी गतिविधि, तीन किलोमीटर दूर रहने की चेतावनी
भूवैज्ञानिक एजेंसी की प्रमुख लाना सारिया ने बताया कि अनक क्राकाटोआ में जुलाई से गतिविधि तेज हुई है। उनके मुताबिक रविवार का विस्फोट मौजूदा गतिविधि के दौर का सबसे शक्तिशाली विस्फोट रहा। लगातार हो रहे विस्फोट इस बात का संकेत हैं कि ज्वालामुखी के नीचे मैग्मा और ज्वालामुखीय गैसों की आपूर्ति बनी हुई है। हालांकि अधिकारी अभी यह अनुमान नहीं लगा सकते कि आगे कोई बड़ा विस्फोट होगा या नहीं। एजेंसी के मुताबिक ज्वालामुखी की स्थिति का आकलन केवल विस्फोटों की संख्या या राख के गुबार की ऊंचाई के आधार पर नहीं किया जा रहा है, बल्कि निगरानी के सभी आंकड़ों को देखा जा रहा है। लोगों को सक्रिय क्रेटर से कम से कम तीन किलोमीटर दूर रहने की चेतावनी दी गई है।
1883 और 2018 की घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
अनक क्राकाटोआ का अर्थ क्राकाटोआ का बच्चा है। यह उसी प्रसिद्ध क्राकाटोआ ज्वालामुखी से जुड़ा है, जिसके 1883 के बड़े विस्फोट का असर दुनिया के मौसम पर पड़ा था। उस विस्फोट के बाद वैश्विक स्तर पर तापमान में गिरावट और मौसम में बड़े बदलाव दर्ज किए गए थे। वर्ष 2018 में भी अनक क्राकाटोआ की गतिविधि के कारण सुनामी आई थी, जिसमें सुमात्रा और जावा में कम से कम 430 लोगों की मौत हुई थी। शोधकर्ताओं के अनुसार, ज्वालामुखीय गतिविधि के कारण समुद्र के भीतर भूस्खलन हुआ था और अनक क्राकाटोआ का दक्षिण-पश्चिमी हिस्सा ढह गया था। इससे बड़ी मात्रा में पानी विस्थापित हुआ और सुनामी पैदा हुई। उस घटना के बाद वैज्ञानिकों के अनुसार ज्वालामुखी द्वीप अपने पुराने आकार का करीब एक-चौथाई रह गया था।
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