भारत समेत 47 देशों को जेलेंस्की की चेतावनी, रूस पर विदेशी नागरिकों को युद्ध में इस्तेमाल करने का लगाया आरोप

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यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने UN महासभा में भारत समेत 47 देशों के नागरिकों का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि रूस विदेशी नागरिकों को युद्ध में इस्तेमाल कर रहा है और संबंधित सरकारों से अपने नागरिकों की सुरक्षा की अपील की। उन्होंने रूस की आर्थिक और सैन्य क्षमता पर दबाव बढ़ाने की भी मांग की।

रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत समेत 47 देशों के नागरिकों का मुद्दा उठाया है। 23 सितंबर को 81वीं UNGA को संबोधित करते हुए जेलेंस्की ने दावा किया कि रूस इन देशों के नागरिकों को अपने युद्ध में इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने संबंधित देशों की सरकारों से अपने नागरिकों की सुरक्षा करने और उन्हें युद्ध के मोर्चे तक पहुंचने से रोकने की अपील की।


भारत समेत कई देशों के नागरिकों का किया जिक्र

जेलेंस्की ने अपने संबोधन में भारत के साथ घाना, नेपाल, ताजिकिस्तान, यमन, केन्या, जिम्बाब्वे, क्यूबा, बेलारूस, सूडान और दक्षिण अफ्रीका समेत कई देशों का नाम लिया। उनका आरोप था कि रूस अलग-अलग तरीकों और कथित तौर पर धोखे के जरिए विदेशी नागरिकों को अपने यहां लाकर युद्ध में भेज रहा है। जेलेंस्की ने कहा कि इन देशों के कुछ नागरिक युद्ध के मैदान में मारे भी जा रहे हैं। हालांकि ये दावे जेलेंस्की की ओर से किए गए हैं। उन्होंने संबंधित देशों के प्रतिनिधियों से अपने नागरिकों की स्थिति पर ध्यान देने और उन्हें रूस-यूक्रेन संघर्ष में आगे शामिल होने से रोकने की अपील की। जेलेंस्की ने खास तौर पर कहा कि किसी दूसरे देश के नागरिकों को इस युद्ध में खींचे जाने से रोकना जरूरी है।


रूस की आर्थिक क्षमता पर दबाव बनाने की मांग

यूक्रेनी राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में रूस की युद्ध क्षमता और आर्थिक संसाधनों पर दबाव बढ़ाने की भी बात कही। उन्होंने कहा कि रूस को मिलने वाले राजस्व को सीमित करना जरूरी है, ताकि युद्ध को जारी रखने के लिए मॉस्को की क्षमता कम हो सके। जेलेंस्की ने व्यापार के जरिए रूस को मिलने वाले पैसे का भी मुद्दा उठाया और कहा कि रूस के साथ व्यापार जारी रहने से उसके मुताबिक युद्ध को लंबे समय तक चलाने के लिए संसाधन मिलते हैं। जेलेंस्की ने रूस के तेल क्षेत्र और युद्ध के लिए इस्तेमाल होने वाली आर्थिक क्षमता पर दबाव बनाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि यूक्रेन का उद्देश्य केवल तेल या ईंधन प्रतिष्ठानों को निशाना बनाना नहीं, बल्कि रूस की युद्ध को वित्तपोषित करने की क्षमता को सीमित करना है।


काला सागर में भारत की भूमिका का भी जिक्र

जेलेंस्की ने भारत का उल्लेख केवल रूसी सेना में विदेशी नागरिकों के कथित इस्तेमाल के संदर्भ में नहीं किया। उन्होंने काला सागर में सुरक्षित व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही से जुड़े प्रयासों में भारत की भूमिका का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक भारत, मिस्र और तुर्किये ने काला सागर में सुरक्षित वाणिज्यिक शिपिंग बहाल करने से संबंधित प्रस्ताव रखे हैं। जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन समुद्री युद्धविराम का समर्थन करने के लिए तैयार है और अब रूस के जवाब का इंतजार है।


सर्दियों को लेकर यूक्रेन की चिंता भी सामने रखी

जेलेंस्की ने आने वाली सर्दी को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि रूस के मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच यूक्रेन के लिए हवाई सुरक्षा को मजबूत करना जरूरी है। उनके अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई बातचीत में यूक्रेन की एयर डिफेंस क्षमता और पैट्रियट इंटरसेप्टर के उत्पादन को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। जेलेंस्की ने यह भी चेतावनी दी कि अगर रूसी हमले जारी रहते हैं तो यूक्रेन रूस के ऊर्जा और हीटिंग ढांचे को निशाना बनाकर जवाब दे सकता है।

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