रूस-जर्मनी तनाव पर लावरोव का तीखा पलटवार, UN में दूसरे विश्व युद्ध की याद दिलाकर उठाए सवाल
- Shiv Kumar
- 27 Sep, 2026
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान रूस और जर्मनी के बीच बढ़ती तल्खी खुलकर सामने आई। जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल ने रूस से जर्मनी, यूरोप और नाटो की ओर बढ़ते तनाव को कम करने की अपील की। इसके जवाब में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने जर्मनी की नीति पर ही सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने जर्मनी को यूक्रेन का प्रमुख समर्थक बताते हुए उसके सैन्य रुख पर निशाना साधा। दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की न्यूयॉर्क में हुई मुलाकात भी चर्चा में रही, जो 2022 में रूस के यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने के हमले के बाद पहली आमने-सामने की बैठक थी।
वाडेफुल ने रूस से तनाव कम करने की अपील की
जर्मन पक्ष के अनुसार, वाडेफुल ने रूस से जर्मनी, यूरोप और नाटो के खिलाफ बढ़ते तनाव के कथित खतरनाक रास्ते से पीछे हटने को कहा। उन्होंने रूस के साथ भविष्य में बेहतर संबंधों की संभावना से इनकार नहीं किया, लेकिन इसके लिए यूक्रेन में युद्ध समाप्त करने की वास्तविक इच्छा को जरूरी बताया। जर्मनी पहले भी रूस के साथ संबंधों को फिर से रचनात्मक बनाने की इच्छा जता चुका है, हालांकि बर्लिन का कहना है कि इसके लिए मॉस्को की ओर से भी पहल जरूरी होगी।
लावरोव ने दूसरे विश्व युद्ध का जिक्र कर दिया
वाडेफुल की अपील के बाद लावरोव ने जर्मनी के मौजूदा रुख पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या बर्लिन समझता है कि मौजूदा स्थिति किस दिशा में जा सकती है। इसी दौरान उन्होंने पूछा कि क्या जर्मनी ने दूसरे विश्व युद्ध के सबक नहीं सीखे। लावरोव ने जर्मनी पर यूरोप में बड़ी सैन्य शक्ति बनने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया। रूस की ओर से जर्मनी के सैन्य रुख पर ऐसी आलोचना हाल के महीनों में लगातार सामने आती रही है।
पहली आमने-सामने बैठक में भी नहीं बनी बात
26 सितंबर को न्यूयॉर्क में वाडेफुल और लावरोव के बीच बैठक हुई। रूसी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, बैठक जर्मनी के अनुरोध पर हुई और इसमें यूक्रेन की स्थिति तथा द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा हुई। बैठक करीब 20 मिनट चली। हालांकि, इसके बाद लावरोव ने कहा कि वाडेफुल ने रूस की आलोचना वाली जर्मनी की सार्वजनिक स्थिति को ही दोहराया। इस वजह से उन्होंने बातचीत से किसी नए नतीजे के निकलने पर सवाल उठाया।
लीपजिग ड्रोन मामले पर भी आमने-सामने हैं दोनों देश
रूस और जर्मनी के बीच तनाव बढ़ने की एक वजह लीपजिग/हाले हवाईअड्डे पर अगस्त में हुआ ड्रोन मामला भी है। जर्मन सरकार ने सितंबर की शुरुआत में कहा था कि उपलब्ध जांच और सुरक्षा संबंधी जानकारी रूस की संलिप्तता की ओर इशारा करती है। रूस ने इन आरोपों को खारिज किया है। लावरोव ने भी जर्मनी के आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि कथित ड्रोन घटना के लिए किसी ने जिम्मेदारी नहीं ली थी।
लावरोव ने पश्चिमी देशों पर रूस को रणनीतिक रूप से कमजोर करने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने अमेरिका और यूरोपीय देशों की रूस-यूक्रेन नीति की आलोचना की। वहीं, अगस्त 2025 में अलास्का में डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन की बैठक का हवाला देते हुए रूसी पक्ष ने कहा है कि उस दौरान यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के रास्तों पर चर्चा हुई थी। हालांकि, उस बैठक के बाद कोई औपचारिक शांति समझौता या युद्धविराम घोषित नहीं हुआ था।
जर्मनी-जापान की स्थायी सीट पर रूस का विरोध
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के मुद्दे पर भी लावरोव ने जर्मनी और जापान को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि परिषद के विस्तार में अतिरिक्त पश्चिमी देशों को स्थायी सीट देने का समर्थन रूस नहीं करता और जर्मनी-जापान का नाम विशेष रूप से लिया। इसके उलट जापान सुरक्षा परिषद में सुधार और अधिक प्रतिनिधित्व की मांग करता रहा है। जापान के उप स्थायी प्रतिनिधि मिकानागी तोमोहिरो ने मई 2026 में कहा था कि उनका देश खुद को शांतिप्रिय राष्ट्र मानता है और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से अंतरराष्ट्रीय शांति में योगदान देता रहा है।
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