महंगाई के विरोध में फ्रांस में बड़ा प्रदर्शन, कई शहरों में आगजनी और लूटपाट, राष्ट्रपति भवन के पास भी हिंसा
- Shiv Kumar
- 18 Oct, 2026
पेरिस। फ्रांस में बढ़ती महंगाई, ईंधन की कीमतों और सरकारी सेवाओं से जुड़ी समस्याओं के विरोध में शुरू हुआ आंदोलन अब बड़े पैमाने पर फैल गया है। शनिवार को करीब 8 लाख लोग सड़कों पर उतरे। फ्रांस 24 की रिपोर्ट के मुताबिक, राजधानी पेरिस में राष्ट्रपति भवन एलिजे पैलेस से महज 400 मीटर दूर प्रदर्शनकारियों ने गाड़ियों में आग लगा दी। हिंसा के दौरान करीब 1,200 लोगों को गिरफ्तार किया गया। लिमोज शहर में नकाबपोश प्रदर्शनकारियों ने टाउन हॉल में आग लगा दी, जिससे 143 साल पुरानी इमारत लगभग पूरी तरह तबाह हो गई। देश के कई हिस्सों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव बना रहा। करीब एक महीने पहले स्कूली छात्रों की मांगों से शुरू हुआ यह विरोध अब व्यापक सामाजिक आंदोलन का रूप ले चुका है।
एक स्कूल से शुरू हुआ विरोध, 410 स्कूलों तक फैला
फ्रांस में आंदोलन की शुरुआत 21 सितंबर को पेरिस के लाइसी सेंट-एक्सूपेरी स्कूल से हुई थी। यहां छात्रों ने शिक्षकों और जरूरी संसाधनों की कमी दूर करने की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू किया। यह स्कूल ऐसे इलाके में है, जहां बेहद गरीब परिवार रहते हैं। 29 सितंबर को प्रशासन ने स्कूल में अतिरिक्त स्टाफ भेजा, जिसके बाद वहां हड़ताल समाप्त हो गई। हालांकि, तब तक दूसरे इलाकों में भी विरोध शुरू हो चुका था। महज आठ दिनों में आंदोलन 410 स्कूलों तक फैल गया। इसके बाद विश्वविद्यालयों के छात्र भी इसमें शामिल हो गए। छात्रों को उनके माता-पिता, शिक्षकों और मजदूर संगठनों का समर्थन मिला। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में वेतन और पेंशन बढ़ाना, महंगाई कम करना, सरकारी सेवाओं में सुधार और स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने के साथ जर्जर इमारतों की मरम्मत कराना शामिल है।
पुलिस कार्रवाई पर नाराजगी, सैकड़ों लोग घायल
आंदोलन के दौरान पुलिस की कार्रवाई भी विवाद का कारण बनी। 5 अक्टूबर को उत्तरी फ्रांस के लेंस शहर में प्रदर्शन के दौरान पुलिस के एक ग्रेनेड से 15 साल के लड़के का हाथ बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। बाद में उसका हाथ काटना पड़ा। इस घटना ने पुलिस की सख्त कार्रवाई को लेकर लोगों के गुस्से को और बढ़ा दिया। अब तक देशभर में हुई झड़पों में 200 से ज्यादा छात्र, स्कूलों के 85 कर्मचारी और 700 पुलिसकर्मी घायल होने की जानकारी दी गई है। आंदोलन के दौरान 6,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किए जाने की बात भी सामने आई है। इनमें ज्यादातर नाबालिग बताए गए हैं, जिन्हें बाद में बिना आरोप लगाए रिहा कर दिया गया। कई जगह प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई, जबकि कुछ स्थानों पर आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं भी हुईं।
10 शहरों में दुकानों को बनाया निशाना, मैक्रों ने दी कार्रवाई की चेतावनी
प्रदर्शन के दौरान और उसके बाद कुछ युवकों के समूह सड़कों पर घूमते रहे। कई जगहों पर उनकी पुलिस से झड़प हुई, जबकि कुछ स्थानों पर बंद दुकानों में घुसकर सामान लूटने और आग लगाने की घटनाएं सामने आईं। करीब 10 शहरों में सुपरमार्केट, दवा की दुकानों, महंगे ब्रांड के शोरूम और कपड़े व इलेक्ट्रॉनिक सामान बेचने वाली दुकानों को निशाना बनाया गया। समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक, कुछ समूह योजनाबद्ध तरीके से दुकानों में लूटपाट कर रहे थे। वे नकाब और दस्ताने पहनते थे तथा दुकानों में घुसने से पहले सुरक्षा कैमरों के कनेक्शन काट देते थे। इसके बाद शीशे तोड़कर अंदर दाखिल होते थे। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सरकारी कार्यालयों और कारोबारों पर हमला करने, तोड़फोड़ और लूटपाट में शामिल लोगों के खिलाफ मुकदमा चलाने और सजा दिलाने की चेतावनी दी है।
येलो वेस्ट आंदोलन की वापसी, राजनीतिक दलों में मतभेद
मौजूदा विरोध के पीछे 2018 के ‘येलो वेस्ट’ आंदोलन की वापसी की अपील को भी अहम माना जा रहा है। उस समय तेल और गैस पर टैक्स बढ़ाने की योजना के खिलाफ हजारों लोग पीली चमकदार जैकेट पहनकर सड़कों पर उतरे थे। फ्रांस में वाहन चालकों के लिए ऐसी जैकेट रखना जरूरी होता है, ताकि सड़क पर वाहन खराब होने या आपात स्थिति में उन्हें दूर से देखा जा सके। प्रदर्शनकारियों ने इसी जैकेट को विरोध की पहचान बनाया था। फ्रेंच भाषा में इसे ‘गिले जॉन’ और अंग्रेजी में ‘येलो वेस्ट’ कहा जाता है। मौजूदा आंदोलन को लेकर राजनीतिक दलों के बीच भी मतभेद हैं। दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन ने पुलिस का समर्थन करते हुए आरोप लगाया कि कट्टर वामपंथियों ने प्रदर्शनकारियों की मांगों पर अपना प्रभाव जमा लिया है। वहीं, वामपंथी नेता जीन-ल्यूक मेलांशों का कहना है कि देशभर में ज्यादातर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि टीवी चैनल हिंसा की घटनाओं को बार-बार दिखाकर पूरे आंदोलन की तस्वीर को हिंसक रूप में पेश कर रहे हैं।
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