शेयर बाजार 26 जून को रहेगा बंद, मुहर्रम के कारण NSE-BSE में नहीं होगी ट्रेडिंग, जानें 2026 का पूरा हॉलिडे कैलेंडर

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मुहर्रम के कारण 26 जून 2026 को NSE और BSE में ट्रेडिंग बंद रहेगी। इस अवकाश के चलते निवेशकों को तीन दिन का ब्रेक मिलेगा। जानें 2026 के पूरे शेयर बाजार हॉलिडे कैलेंडर की पूरी जानकारी।

जून के आखिरी सप्ताह में शेयर बाजार में कारोबार एक दिन के लिए ठप रहने वाला है। आधिकारिक ट्रेडिंग कैलेंडर के अनुसार, मुहर्रम के अवसर पर शुक्रवार, 26 जून 2026 को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) दोनों में सभी तरह की ट्रेडिंग बंद रहेगी। इस दौरान इक्विटी से लेकर डेरिवेटिव्स, करेंसी डेरिवेटिव्स, SLB और EGR सेगमेंट में कोई भी लेन-देन नहीं होगा।


मुहर्रम पर पूरे देश में रहेगा अवकाश

मुहर्रम इस्लामिक नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है और यह इस्लाम के पवित्र महीनों में से एक है। यह दिन कर्बला की घटना में इमाम हुसैन की शहादत की स्मृति में मनाया जाता है, जिसका धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व काफी गहरा है। भारत में इसे राष्ट्रीय अवकाश के रूप में मनाया जाता है, जिसके चलते सरकारी कार्यालयों के साथ-साथ बैंक और वित्तीय बाजार भी बंद रहते हैं। इसी वजह से NSE और BSE में भी इस दिन कारोबार पूरी तरह बंद रहेगा।


लगातार तीन दिन तक नहीं होगा कारोबार

मुहर्रम की छुट्टी के चलते निवेशकों को इस बार लगातार तीन दिनों का ट्रेडिंग ब्रेक मिलेगा। शुक्रवार को बाजार बंद रहने के बाद शनिवार और रविवार को साप्ताहिक अवकाश रहेगा। ऐसे में सामान्य कारोबार अब सीधे सोमवार, 29 जून 2026 से ही दोबारा शुरू होगा। इस ब्रेक के दौरान बाजार में कोई भी खरीद-बिक्री की गतिविधि नहीं होगी।


2026 में 16 दिन बंद रहेगा बाजार

स्टॉक एक्सचेंज के कैलेंडर के अनुसार, साल 2026 में कुल 16 ट्रेडिंग हॉलिडे तय किए गए हैं। इनमें गणेश चतुर्थी, दशहरा, गांधी जयंती, दिवाली, गुरु नानक जयंती और क्रिसमस जैसे प्रमुख त्योहार शामिल हैं। दिवाली के मौके पर 8 नवंबर को विशेष मुहूर्त ट्रेडिंग सत्र भी आयोजित किया जाएगा, जिसमें सीमित समय के लिए कारोबार की अनुमति दी जाती है।


हाल ही में बाजार का प्रदर्शन

पिछले कारोबारी सत्र में शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिली थी, जहां सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में बंद हुए। हालांकि, पूरे सप्ताह के आधार पर बाजार ने मजबूती दिखाई और दोनों प्रमुख इंडेक्स में करीब 1.8 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का असर भी बाजार पर देखा गया।

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