प्रियांका चतुर्वेदी का शिक्षा मंत्री पर बड़ा हमला, युवाओं के भविष्य पर उठाए सवाल

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शिक्षा व्यवस्था पर प्रियांका चतुर्वेदी का बड़ा हमला, धर्मेंद्र प्रधान से मांगा जवाब

सोमवार को शिक्षा और रोजगार के मुद्दे पर राजनीति गरमा गई, जब शिवसेना (उद्धव गुट) की सांसद प्रियांका चतुर्वेदी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि भारत में नौकरी के लिए तैयार युवाओं की संख्या चिंताजनक रूप से कम है और इसी वजह से देश वैश्विक रैंकिंग में 74वें स्थान पर पहुंच गया है। प्रियांका ने कहा कि मौजूदा शिक्षा व्यवस्था छात्रों को सिर्फ डिग्री देती है, लेकिन रोजगार के लिए जरूरी कौशल विकसित नहीं कर पाती। उन्होंने इस पूरे मुद्दे पर केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्री से जवाब मांगा।

शिक्षा व्यवस्था की कमियों पर विपक्ष का सवाल

प्रियांका चतुर्वेदी ने कहा कि देश की शिक्षा प्रणाली में कई बुनियादी कमियां हैं। उनके अनुसार, स्कूल और कॉलेजों में छात्रों को केवल परीक्षा पास करने तक सीमित रखा जाता है, जबकि उद्योगों और रोजगार बाजार की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकसित करने पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। उन्होंने कहा कि पढ़ाई पूरी करने के बाद बड़ी संख्या में युवा नौकरी के लिए तैयार नहीं होते, जिससे बेरोजगारी की समस्या और गंभीर होती जा रही है। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को समय की जरूरतों के अनुसार बदलना बेहद जरूरी है।

रोजगार और अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता जताई

प्रियांका चतुर्वेदी ने कहा कि युवाओं में रोजगार योग्य कौशल की कमी का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। उनका दावा है कि भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता तभी मजबूत होगी, जब शिक्षा और रोजगार के बीच की दूरी कम की जाएगी। उन्होंने कहा कि केवल डिग्री देने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि छात्रों को व्यावहारिक प्रशिक्षण, तकनीकी शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट से जोड़ना होगा। उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब देने की मांग भी की।

रोजगार आधारित शिक्षा पर तेज हुई राजनीतिक बहस

प्रियांका चतुर्वेदी के इस बयान के बाद शिक्षा और रोजगार का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। विपक्ष का कहना है कि युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है, जबकि सरकार लगातार नई शिक्षा नीति, कौशल विकास कार्यक्रमों और रोजगारोन्मुखी योजनाओं का हवाला देती रही है। अब इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है, क्योंकि शिक्षा, रोजगार और युवाओं का भविष्य आने वाले समय में भी प्रमुख चुनावी मुद्दों में शामिल रहने वाला है।

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