1 जुलाई से नई EV पॉलिसी लागू, ई-व्हीकल खरीदने वालों के लिए बड़ी राहत

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दिल्ली की नई EV पॉलिसी 2026 लागू, इलेक्ट्रिक कारों पर टैक्स माफी और स्क्रैपिंग पर मिलेगा बड़ा लाभ

दिल्ली सरकार की नई इलेक्ट्रिक वाहन (EV) नीति 2026 राजधानी में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। 1 जुलाई से लागू होने वाली इस नीति के तहत 30 लाख रुपये तक की एक्स-शोरूम कीमत वाली इलेक्ट्रिक कारों पर 100 फीसदी रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस माफ कर दी जाएगी। इसके अलावा इलेक्ट्रिक दोपहिया, थ्री-व्हीलर और ई-गुड्स वाहनों के लिए भी आकर्षक प्रोत्साहन दिए जाएंगे। पुरानी पेट्रोल या डीजल गाड़ी को स्क्रैप कर नई इलेक्ट्रिक कार खरीदने वालों को एक लाख रुपये तक का इंसेंटिव मिलेगा। सरकार अगले चार वर्षों में इस पूरी योजना पर करीब 15 हजार करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी में है।

टैक्स छूट, सब्सिडी और स्क्रैपिंग इंसेंटिव सबसे बड़ा आकर्षण

सरकार के अनुसार नई नीति 31 मार्च 2030 तक प्रभावी रहेगी। इसके तहत 30 लाख रुपये तक की इलेक्ट्रिक कारों पर रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क पूरी तरह माफ रहेगा। इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन खरीदने पर पहले वर्ष 30 हजार रुपये तक की सब्सिडी, ई-ऑटो पर 50 हजार रुपये तक तथा एन-1 श्रेणी के इलेक्ट्रिक मालवाहक वाहनों पर एक लाख रुपये तक की सहायता दी जाएगी। वहीं, दिल्ली में पंजीकृत बीएस-4 या उससे पुराने पेट्रोल-डीजल वाहन को स्क्रैप कर नई इलेक्ट्रिक कार खरीदने वालों को एक लाख रुपये तक का अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलेगा। यह लाभ सीमित संख्या में पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर उपलब्ध होगा। सरकार ने इस नीति में भविष्य की समयसीमा भी तय कर दी है। जनवरी 2027 से केवल नए इलेक्ट्रिक ऑटो का ही पंजीकरण किया जाएगा, जबकि अप्रैल 2028 से केवल इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों का रजिस्ट्रेशन होगा। साथ ही, सब्सिडी प्राप्त करने वाले वाहनों पर तीन वर्ष का लॉक-इन पीरियड लागू रहेगा, ताकि लाभ लेने के तुरंत बाद वाहन दूसरे राज्यों में स्थानांतरित न किए जा सकें।

प्रदूषण कम करने और ईवी बाजार बढ़ाने पर सरकार का फोकस

दिल्ली में लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए सरकार ने इस नीति को तैयार किया है। सरकार का मानना है कि रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में छूट मिलने से इलेक्ट्रिक वाहनों की शुरुआती कीमत कम होगी और अधिक लोग इन्हें खरीदने के लिए प्रेरित होंगे। साथ ही चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, बैटरी नेटवर्क और अन्य सुविधाओं के विस्तार पर भी निवेश किया जाएगा। चार वर्षों में 15 हजार करोड़ रुपये का प्रस्तावित निवेश इस दिशा में सरकार की दीर्घकालिक योजना को दर्शाता है।
हालांकि, इस नीति के कुछ व्यावहारिक पहलुओं पर भी चर्चा हो रही है। 30 लाख रुपये से अधिक कीमत वाली लग्जरी इलेक्ट्रिक कारों को इस योजना से बाहर रखा गया है। वहीं, भविष्य में पेट्रोल और सीएनजी आधारित दोपहिया तथा ऑटो के पंजीकरण पर चरणबद्ध रोक से छोटे व्यापारियों और परिवहन क्षेत्र पर प्रभाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चार्जिंग नेटवर्क तेजी से विकसित नहीं हुआ, तो नीति के अपेक्षित परिणाम मिलने में समय लग सकता है।

आम लोगों और कारोबार पर क्या होगा असर

नई नीति का सबसे अधिक लाभ उन लोगों को मिलेगा जो निकट भविष्य में नई इलेक्ट्रिक कार या दोपहिया वाहन खरीदने की योजना बना रहे हैं। रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में पूरी छूट मिलने से ऑन-रोड कीमत में उल्लेखनीय कमी आएगी। ई-ऑटो, डिलीवरी वाहन और मालवाहक इलेक्ट्रिक वाहनों को मिलने वाली सब्सिडी से छोटे कारोबारियों और परिवहन क्षेत्र को भी राहत मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चार्जिंग स्टेशन, बैटरी स्वैपिंग और सर्विस नेटवर्क समय पर विकसित किए गए तो दिल्ली देश के सबसे बड़े इलेक्ट्रिक वाहन बाजारों में शामिल हो सकती है। सरकार के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती इस नीति को प्रभावी ढंग से लागू करना और इंफ्रास्ट्रक्चर को समान गति से विकसित करना होगी, ताकि घोषित लाभ वास्तव में लोगों तक पहुंच सकें।

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