शेयर बाजार खुलते ही टूटा, सेंसेक्स 300 अंक लुढ़का, निफ्टी 24, 600 के करीब पहुंचा
- Shiv Kumar
- 07 Aug, 2026
भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार की शुरुआत कमजोर रुख के साथ की। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 300 अंक से अधिक टूट गया, जबकि निफ्टी 24,600 के स्तर से नीचे फिसल गया। बाजार में यह दबाव ऐसे समय देखने को मिला है, जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान के नए प्रस्ताव ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। इसका असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया और कई बड़े शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य नहीं होते, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
महंगे तेल और वैश्विक तनाव का दिखा सीधा असर
सुबह करीब 9:30 बजे सेंसेक्स 249 अंक की गिरावट के साथ 78,705.76 पर कारोबार करता नजर आया, जबकि निफ्टी 35 अंक टूटकर 24,601 के स्तर पर पहुंच गया। कारोबार की शुरुआत में दोनों प्रमुख सूचकांक करीब 0.6 प्रतिशत तक फिसल गए थे। इसी दौरान रुपया भी डॉलर के मुकाबले छह पैसे कमजोर होकर 95.28 पर पहुंच गया। एशियाई बाजारों में भी दबाव का माहौल देखने को मिला। बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ी भू-राजनीतिक चिंता मानी जा रही है। ईरान ने इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से शत्रुतापूर्ण जहाजों की आवाजाही पर रोक लगाने और नियम तोड़ने वालों पर भारी जुर्माना लगाने का प्रस्ताव रखा है, जिससे वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
बड़े शेयरों में बिकवाली, निवेशकों ने अपनाया सतर्क रुख
शुरुआती कारोबार में कई दिग्गज कंपनियों के शेयर दबाव में रहे। बजाज समूह की कंपनियों और आईसीआईसीआई बैंक समेत कई प्रमुख शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली। कुछ शेयरों में पांच प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। बाजार में जोखिम बढ़ने के कारण निवेशकों ने फिलहाल सुरक्षित निवेश की रणनीति अपनानी शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब भी वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आती है, तो उसका असर सबसे पहले शेयर बाजार की धारणा पर पड़ता है। यही वजह है कि शुक्रवार को बाजार में शुरुआती घंटों में ही बिकवाली का दबाव बढ़ गया।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर दुनिया की नजर, आगे भी रह सकती है हलचल
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यदि इस मार्ग पर किसी तरह की रुकावट आती है या तनाव बढ़ता है, तो इसका असर सीधे तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। यही आशंका फिलहाल निवेशकों को सतर्क बनाए हुए है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर बाजार की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी।
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