कासगंज के दो युवकों से बरामद हुए 1.01 लाख के नकली नोट, लखनऊ में यूपी ATS ने दबोचा, पश्चिम बंगाल से यूपी तक फैले नेटवर्क की जांच तेज
- Shiv Kumar
- 10 Aug, 2026
कासगंज के दो युवकों को यूपी एटीएस ने लखनऊ में गिरफ्तार कर नकली भारतीय करेंसी के एक नेटवर्क का खुलासा किया है। एटीएस की कार्रवाई में दोनों आरोपियों के कब्जे से 500 रुपये के 201 संदिग्ध नकली नोट बरामद हुए हैं। बरामद नोटों की कुल अंकित कीमत 1 लाख 500 रुपये बताई गई है। प्रारंभिक जांच में नोटों की क्वालिटी बेहतर पाई गई है। एटीएस को आशंका है कि नकली करेंसी भारत-बांग्लादेश सीमा से पश्चिम बंगाल के रास्ते उत्तर प्रदेश तक पहुंचाई जा रही थी। गिरफ्तार दोनों आरोपी कासगंज के गंजडुंडवारा थाना क्षेत्र के गणेशपुर गांव के रहने वाले हैं। अब जांच एजेंसी नकली नोटों के स्रोत और पूरे नेटवर्क से जुड़े लोगों का पता लगाने में जुटी है।
लखनऊ में कार्रवाई के दौरान दोनों आरोपी गिरफ्तार
यूपी एटीएस के अनुसार, सात अगस्त को लखनऊ में कार्रवाई करते हुए अजीम खान पुत्र मुजीम खान और राजा उर्फ समीमुल पुत्र स्वर्गीय अहमद हसन को गिरफ्तार किया गया। दोनों गणेशपुर गांव के निवासी बताए गए हैं। तलाशी के दौरान उनके पास से 500 रुपये के 201 नकली नोट बरामद किए गए। नोटों को कब्जे में लेकर एटीएस ने मामले की जांच आगे बढ़ा दी है। दोनों आरोपियों से पूछताछ के जरिए करेंसी नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
हाई क्वालिटी के बताए जा रहे बरामद नोट
एटीएस की शुरुआती जांच में बरामद नकली नोट सामान्य स्तर के बजाय बेहतर क्वालिटी के पाए गए हैं। प्रथम दृष्टया इन्हें हाई क्वालिटी की नकली भारतीय मुद्रा माना जा रहा है। हालांकि, नोट वास्तव में कितनी गुणवत्ता के हैं और किन तकनीकों से तैयार किए गए हैं, इसकी पुष्टि विस्तृत जांच के बाद होगी। इसके लिए बरामद नोटों को भारतीय रिजर्व बैंक के निर्धारित मानकों के अनुसार परीक्षण के लिए भेजा जा रहा है।
बांग्लादेश सीमा से पश्चिम बंगाल के रास्ते यूपी आने की आशंका
एटीएस को जानकारी मिली थी कि भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा के रास्ते पश्चिम बंगाल से नकली भारतीय करेंसी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों तक पहुंचाई जा रही है। सूचना के आधार पर एजेंसी ने संदिग्ध लोगों की गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू की। जांच के दौरान सामने आए इनपुट के आधार पर लखनऊ में कार्रवाई की गई और दोनों आरोपियों को पकड़ा गया। अब एटीएस यह पता लगाने में जुटी है कि नकली नोटों की सप्लाई किस माध्यम से उत्तर प्रदेश तक पहुंचाई जा रही थी।
नकली करेंसी के इस्तेमाल के पीछे क्या था मकसद?
जांच एजेंसी को आशंका है कि नकली करेंसी को बाजार में खपाकर आर्थिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा सकती थी। इसके अलावा एटीएस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि कहीं इस नकली करेंसी का इस्तेमाल किसी राष्ट्रविरोधी गतिविधि के लिए तो नहीं किया जाना था। फिलहाल जांच शुरुआती चरण में है और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है।
201 नकली नोट मिलने के बाद पूरे नेटवर्क की जांच तेज
दोनों आरोपियों के खिलाफ थाना एटीएस, उत्तर प्रदेश, लखनऊ में संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। अब एटीएस यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद नकली नोट आरोपियों तक कहां से पहुंचे और इन्हें उत्तर प्रदेश में आगे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था। एजेंसी पश्चिम बंगाल से लेकर उत्तर प्रदेश तक नकली करेंसी की सप्लाई चेन की जांच कर रही है। साथ ही नेटवर्क में शामिल अन्य संदिग्ध लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
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