संसद सत्र का समापन, लोकसभा और राज्यसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, ‘वंदे मातरम’ के साथ हुई कार्यवाही की समाप्ति

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संसद का मानसून सत्र गुरुवार को भारी हंगामे और सत्ता पक्ष-विपक्ष के बीच गतिरोध के बीच समाप्त हो गया। लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुई। वंदे मातरम के साथ समापन हुआ, जबकि छात्रों पर कार्रवाई, खरगे प्रकरण और कई विधेयकों को लेकर विवाद जारी रहा।

संसद का मानसून सत्र गुरुवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जारी भारी हंगामे और राजनीतिक गतिरोध के बीच समाप्त हो गया। लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। सत्र के आखिरी दिन भी छात्रों पर कथित कार्रवाई, राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े आरोप, न्यायपालिका और अन्य मुद्दों को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा। वहीं, सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने और चर्चा से पीछे हटने का आरोप लगाया। लोकसभा में कार्यवाही समाप्त होने से पहले वंदे मातरम का गायन हुआ। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत कई सांसद मौजूद रहे। सत्र के दौरान कई विधेयक पारित हुए, लेकिन कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा नहीं हो सकी। विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजे जाने के साथ ही अब आगे की प्रक्रिया समिति की रिपोर्ट पर निर्भर करेगी।


वंदे मातरम के साथ हुआ संसद सत्र का समापन

लोकसभा की कार्यवाही समाप्त होने से पहले सदन में वंदे मातरम का गायन हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी, अमित शाह समेत सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई सांसद इस दौरान अपनी सीटों पर खड़े रहे। इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। राज्यसभा में भी कार्यवाही समाप्त होने के साथ ही मानसून सत्र औपचारिक रूप से खत्म हो गया। हालांकि, सत्र का अंतिम दिन भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और हंगामे से अछूता नहीं रहा।


खरगे के कथित शुद्धिकरण को लेकर सदन में टकराव

उत्तराखंड में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर राज्यसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। कांग्रेस ने इसे दलित अपमान और जातिगत भेदभाव का मुद्दा बताया। खरगे और भाजपा नेता जेपी नड्डा के बीच भी तीखी नोकझोंक हुई। नड्डा ने मामले को गंभीरता से लेने और आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया। कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर सरकार से स्पष्ट जवाब की मांग करती रही।


मकर द्वार पर विपक्ष का प्रदर्शन जारी रहा

मानसून सत्र के आखिरी दिन इंडिया गठबंधन के सांसदों ने संसद के मकर द्वार के सामने प्रदर्शन किया। विपक्षी सांसद 20 जुलाई को छात्रों पर कथित कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से सदन में जवाब की मांग कर रहे थे। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि सरकार को छात्रों पर कार्रवाई, कथित पैलेट गन के इस्तेमाल और अन्य आरोपों पर सीधे जवाब देना चाहिए। वहीं, विपक्ष ने राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े आरोपों को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए।


अमित शाह की चिट्ठी से भी नहीं टूटा गतिरोध

सत्र के अंतिम दौर में गतिरोध खत्म करने की कोशिश के तहत गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखा था। उन्होंने विपक्ष से चर्चा के लिए सहमति बनाने की अपील की और भरोसा दिया कि चर्चा के दौरान विपक्ष के सवालों का जवाब दिया जाएगा। इसके बावजूद सदन में दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने विपक्ष पर चर्चा से पीछे हटने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार बातचीत के लिए तैयार थी, लेकिन विपक्ष ने अपना रुख बदल दिया।


हंगामे के बीच कई विधेयक हुए पारित

मानसून सत्र के दौरान शुरुआती दिनों में भारी हंगामा देखने को मिला, जबकि बाद के दिनों में सरकार ने विधायी कामकाज को तेजी से आगे बढ़ाया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि कई विधेयक पर्याप्त चर्चा के बिना पारित कराए गए। इसी दौरान सात विधेयक महज 36 मिनट में पारित होने का दावा भी सामने आया। विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा गया। समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल हैं। वहीं, राज्यसभा में नेशनल कोऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन संशोधन विधेयक भी पारित हुआ।


यशवंत वर्मा मामले पर भी सरकार से सवाल

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने पूर्व दिल्ली हाईकोर्ट जज जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े मामले को लेकर सरकार से उनके इस्तीफे की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि संसद में जांच समिति की रिपोर्ट पेश की जानी है और यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि जस्टिस वर्मा का इस्तीफा स्वीकार हुआ है या नहीं। उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट की वेबसाइट पर जस्टिस वर्मा का नाम अभी भी जज के तौर पर प्रदर्शित होने का मुद्दा उठाया और सरकार से स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की।


परिसीमन और दूसरे मुद्दों पर तस्वीर साफ नहीं

सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण राजनीतिक और विधायी मुद्दों पर व्यापक चर्चा नहीं हो सकी। परिसीमन जैसे विषयों को लेकर भी विपक्ष की ओर से लगातार सवाल उठाए गए। दूसरी तरफ सरकार ने अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाया। सत्र के आखिरी दिन भी दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनने से कई मुद्दे अधूरे रह गए। अब इन विषयों पर आगे की राजनीतिक और संसदीय प्रक्रिया आने वाले सत्रों में देखने को मिलेगी।

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