बैंकों में बड़े बदलाव की तैयारी! निर्मला सीतारमण जल्द बनाएंगी हाईलेवल कमेटी
- Babli Ansari
- 17 Aug, 2026
नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकिंग सेक्टर को लेकर बड़ा संकेत दिया है। उन्होंने कहा है कि ‘बैंकिंग फॉर विकसित भारत’ पर बनी उच्चस्तरीय समिति की घोषणा जल्द की जाएगी। यह वही प्रस्ताव है, जिसे उन्होंने इस साल के बजट भाषण में रखा था। अब सरकार इस दिशा में औपचारिक कदम बढ़ाने जा रही है। सूत्रों के अनुसार, समिति बैंकिंग व्यवस्था की गहराई से समीक्षा करेगी और ऐसे सुझाव देगी, जिनसे देश की अगली विकास यात्रा को मजबूत सहारा मिल सके। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और वित्तीय संस्थानों के शीर्ष अधिकारियों के साथ हुई चर्चा में भी इस समिति के लिए ठोस इनपुट जुटाए गए हैं।
पीएसबी कॉन्क्लेव से निकलेगा समिति का एजेंडा
सीतारमण ने सोमवार को दिल्ली में हुए पीएसबी कॉन्क्लेव में साफ कहा कि बैंकिंग सेक्टर अब मजबूत स्थिति में है और अब सुधारों के अगले चरण की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बैठक में जो विचार और सिफारिशें सामने आएंगी, वे प्रस्तावित समिति के लिए अहम सामग्री साबित होंगी। जानकारी के मुताबिक, सरकार चाहती है कि समिति सिर्फ कागजी समीक्षा तक सीमित न रहे, बल्कि बैंकिंग सिस्टम की क्षमता, ऋण वितरण, जोखिम प्रबंधन और ग्राहकों तक पहुंच जैसे मोर्चों पर ठोस रोडमैप दे। बैंकों की बैलेंस शीट सुधरने और एनपीए घटने के बाद यह माना जा रहा है कि सरकार अब व्यापक सुधारों के लिए अनुकूल माहौल देख रही है।
बजट में रखा गया था ‘विकसित भारत’ वाला खाका
इस कमेटी की रूपरेखा पहली बार 1 फरवरी 2026 के बजट में सामने आई थी। तब सरकार ने कहा था कि भारत की अर्थव्यवस्था विकास के नए चरण में प्रवेश कर रही है और बैंकिंग सिस्टम को उसी हिसाब से तैयार करना होगा। बजट प्रस्ताव में साफ लिखा गया था कि समिति बैंकिंग सेक्टर की मौजूदा स्थिति, चुनौतियों और भविष्य की जरूरतों की समग्र समीक्षा करेगी। इसके दायरे में वित्तीय स्थिरता, समावेशन और उपभोक्ता संरक्षण को भी रखा गया है। यही वजह है कि इसे सिर्फ एक नीतिगत समिति नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में बैंकिंग ढांचे की दिशा तय करने वाला मंच माना जा रहा है।
बैंकों पर बढ़ेगा दबाव, फैसले की निगाह अब आगे की घोषणा पर
बैंकिंग जगत में इस घोषणा को आने वाले बदलावों की शुरुआत माना जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि समिति की संरचना और सदस्यों पर सरकार जल्द अंतिम मुहर लगा सकती है। वित्त मंत्री की टिप्पणी के बाद यह साफ है कि बैंकिंग सुधारों को लेकर अब गति तेज होगी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से भी सक्रिय भूमिका की उम्मीद की जा रही है। 2047 के विकसित भारत लक्ष्य को सामने रखकर तैयार हो रही इस रूपरेखा से कर्ज की उपलब्धता, निवेश को समर्थन और आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार पर असर पड़ सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि समिति में किन विशेषज्ञों को जगह मिलती है और वह अपनी सिफारिशें कितनी जल्दी सरकार तक पहुंचाती है।
Leave a Reply
Your email address will not be published. Required fields are marked *






