‘हमें चाइनीज मत बुलाओ…’ अरुणाचल की बच्ची ने छेड़ी ऐसी मुहिम, जीत लिया देश का दिल

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अरुणाचल प्रदेश की एक छोटी बच्ची का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। उसमें वह ‘चाइनीज’ कहे जाने पर नाराजगी जताते हुए लोगों से ‘हमको इंडियन बोलो’ की अपील करती दिख रही है।

अरुणाचल प्रदेश की एक छोटी बच्ची का वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया है। वीडियो में वह बेहद मासूम लेकिन साफ लहजे में लोगों से कहती दिख रही है कि उसे और उसके जैसे लोगों को ‘चाइनीज’ कहकर न पुकारा जाए, बल्कि ‘इंडियन’ कहा जाए। उसके इस छोटे से जवाब ने देशभर में नस्लभेदी टिप्पणियों, खासकर नॉर्थ-ईस्ट के लोगों के खिलाफ बनी पुरानी सोच पर फिर से बहस छेड़ दी है। वीडियो में बच्ची बताती है कि ऐसे शब्द उन्हें गुस्सा भी दिलाते हैं और दुखी भी करते हैं। अरुणाचल की पहचान, इटानगर का जिक्र और भारतीय होने की सीधी दलील ने इस क्लिप को और असरदार बना दिया।


वीडियो में क्या कहा बच्ची ने

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में एक व्यक्ति बच्ची से पूछता है कि क्या वह चीनी है। इस पर बच्ची बिना हिचक जवाब देती है कि वे भारतीय हैं और उन्हें चाइनीज कहे जाने से बहुत बुरा लगता है। वह साफ शब्दों में कहती है कि ‘हमको इंडियन बोलो’ और यह भी बताती है कि वे भारत के अरुणाचल प्रदेश से हैं और इटानगर में रहते हैं। कई प्लेटफॉर्म्स पर साझा किए गए इस वीडियो में उसकी भाषा भले ही सरल है, लेकिन संदेश बेहद तीखा है। उसने किसी बहस या शोर-शराबे का सहारा नहीं लिया, बल्कि बेहद सधे अंदाज में अपनी पहचान रखी। यही वजह है कि यह वीडियो बच्चों की मासूम आवाज से निकली एक बड़ी सामाजिक टिप्पणी बन गया है।

इंडिया टुडे, आज तक और मनीकंट्रोल जैसी रिपोर्टों में भी यही बात सामने आई कि बच्ची ने यह सवाल सुनते ही अपनी भारतीय पहचान पर जोर दिया। रिपोर्टों के मुताबिक उसने कहा कि ‘हम लोग इंडियन हैं’, और जब किसी को चीन या चीनी कहकर पुकारा जाता है, तो उन्हें गुस्सा और दुख दोनों होता है। कई जगह वीडियो के वायरल होने की वजह उसकी सादगी बताई जा रही है। न कोई नारा, न भाषण, सिर्फ एक सीधी अपील। इसी कारण यह क्लिप लोगों के बीच तेजी से फैल गई और सोशल मीडिया पर इसे लेकर समर्थन की लहर दिखी।


नॉर्थ-ईस्ट के खिलाफ पुरानी सोच फिर चर्चा में

इस वीडियो ने एक बार फिर उस समस्या को सामने रखा है जो लंबे समय से नॉर्थ-ईस्ट के लोगों को झेलनी पड़ती है। चेहरे-मोहरे या भौगोलिक समझ के आधार पर उनकी पहचान को लेकर सवाल उठाए जाते हैं और कई बार उन्हें गलत राष्ट्रीयता से जोड़ दिया जाता है। इस तरह की टिप्पणियां नई नहीं हैं, लेकिन बच्ची की आवाज ने उन्हें नए सिरे से चर्चा में ला दिया है। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने लिखा कि किसी की शक्ल देखकर उसकी नागरिकता तय नहीं की जा सकती। कुछ यूजर्स ने अपने निजी अनुभव भी साझा किए और बताया कि ऐसे ताने स्कूल, दफ्तर, बाजार और सार्वजनिक जगहों पर भी सुनने को मिलते हैं।

एशियानेट, इनशॉर्ट्स और अन्य प्लेटफॉर्म्स की रिपोर्टों में भी यही उभरा कि इस वीडियो को केवल भावनात्मक क्लिप मानकर नहीं देखा जा सकता। यह दरअसल उस बड़े पूर्वाग्रह का चेहरा है जो नॉर्थ-ईस्ट के लोगों को बार-बार झेलना पड़ता है। कई एक्टिविस्ट और सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे संवेदनहीनता की मिसाल बताया और कहा कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता बढ़ाने की जरूरत है। वीडियो में बच्ची का आत्मविश्वास और उसकी साफ पहचान बताती आवाज लोगों को इसलिए भी छू गई, क्योंकि उसमें किसी डर या झिझक की जगह अपनी जमीन से जुड़ाव साफ दिखता है।


सोशल मीडिया पर समर्थन, बहस आगे भी चलेगी

वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने बच्ची की हिम्मत की तारीफ की और उसके लिए समर्थन जताया। कई प्रतिक्रियाओं में कहा गया कि एक बच्चे को इस तरह अपनी पहचान बचाने की जरूरत पड़ना ही समाज के लिए शर्म की बात है। कुछ लोगों ने लिखा कि नॉर्थ-ईस्ट को लेकर देश के बाकी हिस्सों में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है, ताकि ऐसे सवाल रोजमर्रा की बातचीत में भी सामान्य न रहें। यह मामला इसलिए भी बड़ा बन गया है क्योंकि इसमें बच्ची की उम्र कम है, लेकिन सवाल बहुत बड़ा। उसने जो कहा, वह केवल अपनी नाराजगी नहीं थी, बल्कि पूरे इलाके की आवाज बनकर सामने आया।

फिलहाल यह साफ है कि वीडियो ने अरुणाचल और पूरे नॉर्थ-ईस्ट के लोगों की पहचान, सम्मान और बराबरी को लेकर नई बहस खड़ी कर दी है। सोशल मीडिया पर इसे लेकर जो प्रतिक्रिया आई है, उससे संकेत मिलता है कि अब लोग ऐसे भेदभाव को पहले की तुलना में ज्यादा खुलकर चुनौती दे रहे हैं। बच्ची की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन उसकी एक पंक्ति—‘हमको इंडियन बोलो’—अब इस पूरे विवाद का केंद्र बन चुकी है। यही वजह है कि यह वीडियो सिर्फ वायरल कंटेंट नहीं, बल्कि एक सामाजिक संदेश की तरह देखा जा रहा है।

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