त्योहारों से पहले महंगाई का मीठा झटका! ₹70 किलो हुई चीनी, आम जनता परेशान

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पश्चिम बंगाल में चीनी की खुदरा कीमत बढ़कर ₹70 प्रति किलो तक पहुंच गई है, जिससे आम लोगों के साथ मिठाई कारोबारियों की भी चिंता बढ़ गई है। त्योहारी सीजन से पहले बढ़ी कीमतों के बीच केंद्र ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी है, लेकिन इसका असर अभी बाजार में नहीं दिखा है

त्योहारों से ठीक पहले घर-घर इस्तेमाल होने वाली चीनी का दाम अचानक तेज हो गया है।आसपास के बाजारों में खुले चीनी के रेट 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं, जबकि एक महीने पहले यही चीनी करीब 20 रुपये सस्ती मिल रही थी। कारोबारियों के मुताबिक पिछले चार-पांच दिनों में ही दामों में करीब 10 फीसदी की छलांग लगी है। असर सिर्फ चीनी तक सीमित नहीं है। गुड़, बताशा और नकुलदाना जैसे मिठाईनुमा सामान भी महंगे हो गए हैं। रिटेल दुकानदारों का कहना है कि थोक बाजार में ही कीमतें 65 रुपये किलो के आसपास पहुंच चुकी हैं, इसलिए दुकान पर इससे कम दाम में बिक्री संभव नहीं रह गई है।


थोक बाजार से रिटेल तक पहुंची गर्मी

व्यापारियों का कहना है कि दामों की यह उछाल अचानक नहीं आई, बल्कि पिछले कुछ हफ्तों से बाजार में दबाव बन रहा था। कई दुकानदारों ने साफ कहा कि तीन दिन पहले तक जो चीनी 65 रुपये किलो बिक रही थी, वह अब 70 रुपये से नीचे नहीं दी जा सकती। बाजारों में खुली चीनी की खुदरा कीमतों में 20 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसी तरह, रिफाइंड और दूसरी किस्मों के दाम भी ऊपर खिसक गए हैं। महंगाई का यह झटका ऐसे वक्त में आया है जब दुर्गा पूजा और दूसरे त्योहारी खरीदारी के लिए लोग बाजार में उतरने लगे हैं। छोटे दुकानदारों का कहना है कि ग्राहक मात्रा कम कर रहे हैं, लेकिन मांग पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

मामले से जुड़े व्यापारिक सूत्रों के अनुसार, बाजार में दाम बढ़ने की वजहों में उत्पादन और आपूर्ति दोनों तरफ का दबाव शामिल है। एक बड़ी वजह चीनी मिलों से होने वाली सप्लाई पर नियंत्रण की कमी बताई जा रही है। कई कारोबारियों का कहना है कि मिलों से निकलने वाली चीनी का बड़ा हिस्सा अब एथनॉल उत्पादन की तरफ जा रहा है, जिससे घरेलू आपूर्ति पर असर पड़ा है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में दबाव, मिलों के स्टॉक रिलीज़ की धीमी रफ्तार और कुछ जगहों पर जमाखोरी की आशंका भी चर्चा में है। केंद्र सरकार ने हालात को देखते हुए 10 लाख टन कच्ची चीनी शुल्कमुक्त आयात की मंजूरी दी है, लेकिन उसका असर फिलहाल स्थानीय बाजार में दिखना शुरू नहीं हुआ है।


त्योहारी सीजन से पहले घरों पर सीधा असर

महंगाई का सबसे सीधा असर मध्यमवर्गीय परिवारों और मिठाई कारोबारियों पर पड़ रहा है। पूजा और धार्मिक आयोजनों में चीनी, गुड़ और बताशे की खपत सामान्य दिनों से कहीं ज्यादा होती है। ऐसे में रेट बढ़ने से घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय है। कई मिठाई दुकानदारों ने आशंका जताई है कि अगर यही रुझान जारी रहा तो आने वाले दिनों में रसगुल्ला, संदेश और दूसरे पारंपरिक मिठाइयों की कीमत भी ऊपर जा सकती है। अभी खुदरा बाजार में 70 रुपये किलो की चीनी लोगों को झटका दे रही है, लेकिन कारोबारी संकेत दे रहे हैं कि अगर आपूर्ति नहीं सुधरी तो दाम और चढ़ सकते हैं।

उपभोक्ता संगठनों और स्थानीय व्यापारिक हलकों में भी इस तेजी को लेकर बेचैनी है। बाजार से जुड़े लोगों का कहना है कि सरकार की ओर से आयात की मंजूरी राहत का पहला संकेत जरूर है, लेकिन असली राहत तभी मिलेगी जब थोक सप्लाई स्थिर होगी और मिलों से आने वाली आवक बढ़ेगी। फिलहाल स्थिति यह है कि त्योहार के मौसम में रोजमर्रा की जरूरत की एक बुनियादी वस्तु आम लोगों की पहुंच से दूर होती दिख रही है। बाजार की भाषा में कहें तो मिठास महंगी हो गई है, और आने वाले हफ्ते यह देखना अहम होगा कि दाम 70 पर टिकते हैं या इससे भी ऊपर निकल जाते हैं।

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