चीनी का स्टॉक छिपाकर रखा तो खैर नहीं! योगी सरकार ने तय की लिमिट
- Babli Ansari
- 22 Aug, 2026
लखनऊ। प्रदेश में चीनी की कीमतों और आपूर्ति को लेकर सरकार ने बड़ा दांव खेल दिया है। त्योहारों के मौसम से पहले जमाखोरी पर नकेल कसते हुए योगी सरकार ने चीनी डीलरों के लिए 400 टन की अधिकतम स्टॉक सीमा तय कर दी है। साथ ही, किसी भी कारोबारी या इकाई को 30 दिन से ज्यादा चीनी रखने की इजाजत नहीं होगी। आदेश के बाद प्रशासनिक और खाद्य विभाग की टीमें अलर्ट मोड पर हैं। सरकार का कहना है कि राज्य में चीनी की कमी नहीं है, लेकिन बाजार में कृत्रिम संकट बनाने की कोशिश पर अब सख्त कार्रवाई होगी।
डीलरों और बड़े खरीदारों पर सीधी निगरानी
सूत्रों के मुताबिक नई व्यवस्था के तहत राज्यभर में चीनी के भंडारण और आवाजाही पर पैनी नजर रखी जाएगी। 400 टन से अधिक स्टॉक पाए जाने पर डीलर के खिलाफ कार्रवाई होगी। वहीं जिन बड़े खरीदारों की मासिक खपत 10 टन या उससे अधिक है, उनके लिए भी अलग समयसीमा तय की गई है। उन्हें तय सीमा से ज्यादा स्टॉक रखने की छूट नहीं मिलेगी। प्रशासन को शक है कि कुछ जगहों पर जरूरत से ज्यादा खरीदकर बाजार में कमी का माहौल बनाया जा रहा है। इसी वजह से जिलों को निरीक्षण तेज करने और भंडारों की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
केंद्र की गाइडलाइन के साथ राज्य ने भी कसी लगाम
जानकारी के मुताबिक यह कदम सिर्फ यूपी तक सीमित नहीं है, बल्कि केंद्र सरकार की उस कवायद का हिस्सा है जिसमें चीनी के दामों पर लगाम और उपलब्धता सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है। देशभर में 1 अगस्त से 30 नवंबर तक डीलरों के लिए 400 टन की सीमा लागू की गई है और 1 सितंबर से बड़े उपभोक्ताओं पर भी 15 दिन की खपत से ज्यादा स्टॉक रखने की रोक लगाई गई है। कुछ रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि मिलों के स्टॉक की भौतिक जांच कराई जा रही है ताकि हेराफेरी और मनमाने भंडारण पर रोक लगे। यूपी सरकार ने इसी लाइन पर सख्त रुख अपनाते हुए साफ संदेश दिया है कि बाजार को दबाव में लेने वालों को छोड़ा नहीं जाएगा।
त्योहारी मांग के बीच उपभोक्ताओं पर असर की चिंता
राजधानी लखनऊ से लेकर पश्चिमी यूपी के चीनी बेल्ट तक इस फैसले का सीधा असर देखने को मिल सकता है। कारोबारियों का कहना है कि सीमा तय होने से स्टॉक मैनेजमेंट बदलना पड़ेगा, लेकिन प्रशासन मानता है कि इससे आम उपभोक्ता को फायदा होगा और दामों में अनावश्यक उछाल नहीं आएगा। विभागीय अधिकारियों ने जिलों को यह भी साफ किया है कि बाजार में घबराहट फैलने नहीं दी जाए और किसी तरह की पैनिक बायिंग रोकी जाए। आने वाले दिनों में जिला स्तर पर छापेमारी, स्टॉक सत्यापन और रिकॉर्ड जांच का दायरा बढ़ने के आसार हैं।
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