एन चंद्रशेखरन 2032 तक संभालेंगे टाटा संस की कमान, बोर्ड ने पांच साल के नए कार्यकाल को दी मंजूरी

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टाटा संस के बोर्ड ने एन चंद्रशेखरन का कार्यकाल पांच साल के लिए बढ़ा दिया है। अब वह 2032 तक चेयरमैन रह सकते हैं। चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा समूह ने कई नए क्षेत्रों में विस्तार किया है। बोर्ड ने टाटा संस की शेयर बाजार में सूचीबद्धता से जुड़ी प्रक्रिया को भी मंजूरी दी है।

टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को कंपनी के बोर्ड ने पांच साल का नया कार्यकाल देने की मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही वह फरवरी 2032 तक टाटा संस के चेयरमैन बने रह सकते हैं। चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में पूरा होना था। उनकी दोबारा नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब हाल के दिनों में उनके पद छोड़ने और टाटा समूह के नेतृत्व में बदलाव को लेकर चर्चाएं सामने आई थीं। अब बोर्ड के फैसले से इन चर्चाओं पर विराम लग गया है। चंद्रशेखरन टाटा संस के बोर्ड में पहली बार अक्टूबर 2016 में शामिल हुए थे और जनवरी 2017 में उन्हें चेयरमैन की जिम्मेदारी दी गई थी। नए कार्यकाल के साथ वह 2032 तक समूह की रणनीतिक दिशा और बड़े कारोबारी फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।


दूसरे कार्यकाल के बाद भी जारी रहेगा सफर

एन चंद्रशेखरन फिलहाल टाटा संस के दूसरे कार्यकाल में हैं, जो फरवरी 2027 में खत्म होना था। टाटा समूह की सामान्य नीति के मुताबिक कार्यकारी पदों पर रहने वाले अधिकारियों के लिए सेवानिवृत्ति की उम्र 65 वर्ष है। वहीं गैर-कार्यकारी भूमिकाओं में 70 वर्ष तक बने रहने का प्रावधान है। चंद्रशेखरन की उम्र फिलहाल 63 वर्ष है। फरवरी 2027 में वह 65 वर्ष के हो जाएंगे। ऐसे में बोर्ड की नई मंजूरी के बाद उनका कार्यकाल सामान्य कार्यकारी सेवानिवृत्ति उम्र से आगे बढ़ेगा और नया कार्यकाल पूरा होने पर वह करीब 70 वर्ष के होंगे। टाटा समूह में किसी ग्रुप एग्जीक्यूटिव के सामान्य सेवानिवृत्ति उम्र से आगे पद पर बने रहने का यह एक महत्वपूर्ण उदाहरण होगा।


टाटा समूह का कारोबार कई नए क्षेत्रों तक पहुंचा

चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा समूह ने पारंपरिक कारोबार से आगे बढ़कर कई नए क्षेत्रों में विस्तार किया। समूह ने विमानन, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण, बैटरी और डिजिटल कारोबार में अपनी मौजूदगी बढ़ाई। आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2020 में टाटा समूह का राजस्व 7.89 लाख करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर 16.24 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसी अवधि में समूह का मुनाफा करीब 32 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 1.71 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। टाटा समूह की सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार मूल्य भी 2020 के 9.31 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2026 में 24.39 लाख करोड़ रुपये बताया गया है।


टाटा ग्रुप, टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स अलग-अलग क्या हैं?

टाटा ग्रुप के तहत टाटा नाम से कारोबार करने वाली अलग-अलग कंपनियां आती हैं। इनमें टीसीएस, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा पावर और एअर इंडिया जैसी कंपनियां शामिल हैं। टाटा संस टाटा समूह की मुख्य होल्डिंग कंपनी है, जिसके पास समूह की कई प्रमुख कंपनियों में हिस्सेदारी है और समूह के बड़े फैसलों में इसकी अहम भूमिका रहती है। दूसरी ओर टाटा ट्रस्ट्स परोपकारी और सामाजिक कार्यों से जुड़े ट्रस्टों का समूह है। टाटा संस में ट्रस्ट्स की करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी बताई जाती है। यही वजह है कि टाटा संस के नेतृत्व और समूह की रणनीति में टाटा ट्रस्ट्स की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है।


टाटा संस की शेयर बाजार में लिस्टिंग का रास्ता भी खुला

बोर्ड के फैसले के साथ टाटा संस की शेयर बाजार में सूचीबद्धता का मुद्दा भी चर्चा में है। कंपनी को सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध करने से जुड़े नियामकीय नियमों का पालन करना होगा। टाटा संस की लिस्टिंग लंबे समय से कॉरपोरेट और बाजार से जुड़े लोगों के बीच चर्चा का विषय रही है। बोर्ड की मंजूरी के बाद अब कंपनी के सामने इससे जुड़ी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी। टाटा संस समूह की कई बड़ी कंपनियों में हिस्सेदारी रखती है, इसलिए उसकी संभावित सूचीबद्धता का असर टाटा समूह की कॉरपोरेट संरचना पर भी पड़ सकता है।

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