स्कूल की थाली में अब अंडे के बाद मछली की एंट्री! पुडुचेरी का बड़ा फैसला, बच्चों के मिड-डे मील में बड़ा बदलाव

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पुडुचेरी सरकार सरकारी स्कूलों के मिड-डे मील में मछली और उससे बने पौष्टिक व्यंजन जोड़ने की तैयारी में है। योजना की शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर यानम और कुछ तटीय स्कूलों से होगी।

पुडुचेरी सरकार सरकारी स्कूलों के मिड-डे मील में मछली और उससे बने पौष्टिक व्यंजन जोड़ने की तैयारी में है। योजना की शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर यानम और कुछ तटीय स्कूलों से होगी।


मिड-डे मील में अब मछली

पुडुचेरी के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के मिड-डे मील में अब मछली आधारित व्यंजन शामिल करने की तैयारी है। प्रशासन की ओर से इस संबंध में प्रस्ताव सामने आया है और शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर करने की योजना है। मत्स्य पालन मंत्री मल्लादी कृष्ण राव की अध्यक्षता में विधानसभा में हुई बैठक में इस पहल पर चर्चा हुई। तय योजना के मुताबिक पुडुचेरी और यानम क्षेत्र के एक-एक सरकारी स्कूल में पहले इसका परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद योजना के अनुभव और व्यवस्था को देखते हुए आगे विस्तार पर फैसला लिया जा सकता है।


अंडे के बाद पहली बार मछली

पुडुचेरी में स्कूलों की मिड-डे मील योजना की शुरुआत 1930 में फ्रांसीसी शासन के दौर में हुई थी। अब तक बच्चों को भोजन के साथ अंडे दिए जाते रहे हैं, लेकिन मछली को मेन्यू में शामिल करने की पहल पहली बार हो रही है। प्रशासन के मुताबिक इस कदम का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर उपलब्ध मछली संसाधनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना भी है। फिलहाल यह पूरे केंद्र शासित प्रदेश में लागू होने वाला फैसला नहीं है, बल्कि चुनिंदा स्कूलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इसकी शुरुआत की जा रही है।


65 हजार से ज्यादा छात्रों तक पहुंचती है योजना

पुडुचेरी में पीएम पोषण योजना के तहत LKG से लेकर 12वीं कक्षा तक करीब 65,856 छात्र-छात्राएं जुड़े हुए हैं। यह योजना सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों समेत कुल 438 स्कूलों तथा प्री-प्राइमरी बच्चों तक पहुंचती है। मौजूदा व्यवस्था के मुताबिक आठवीं कक्षा तक योजना के खर्च का 60 प्रतिशत केंद्र सरकार और बाकी हिस्सा केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन वहन करता है। वहीं वरिष्ठ कक्षाओं के लिए खर्च प्रशासन की ओर से उठाया जाता है। ऐसे में मछली को मेन्यू में शामिल करने का प्रस्ताव लागू होने पर इसकी व्यवस्था और लागत को भी पायलट चरण के अनुभव के आधार पर देखा जाएगा।


सिर्फ थाली नहीं, Fish Industry पर भी फोकस

बैठक में स्कूलों के मिड-डे मील के अलावा पुडुचेरी, कराईकल और यानम में मत्स्य संसाधनों को बढ़ाने, मछली निर्यात को बढ़ावा देने और रोजगार के नए अवसर तैयार करने पर भी चर्चा हुई। मरीन प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी MPEDA की ओर से बहौर और कराईकल के पोलागम इंडस्ट्रियल एस्टेट में Fisheries Parks विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है। यानम में स्टोन क्रैब यानी दलदली केकड़े की एक्वाकल्चर तकनीक को बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। यानी स्कूलों की थाली में मछली पहुंचाने की योजना के साथ-साथ प्रशासन स्थानीय मत्स्य कारोबार और उससे जुड़े रोजगार को बढ़ाने पर भी काम करने की तैयारी में है।

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