पहली बार ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम की मेजबानी करेगा भारत, PM मोदी ने दुनिया में देश के योगदान का किया जिक्र

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में भारत के योगदान, आर्थिक विकास और वैश्विक सहयोग पर जोर दिया। उन्होंने सस्ती दवाओं, प्रतिभाशाली युवाओं, वैक्सीन सप्लाई और डिजिटल व्यवस्था का उल्लेख किया। पीएम ने कहा कि ताकत का उद्देश्य दूसरों को सशक्त बनाना होना चाहिए।

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि सस्ती दवाओं से लेकर प्रतिभाशाली युवाओं तक के मामले में दुनिया भारत की ओर देखती है। भारत दुनिया के लिए जो योगदान देता है, उसके बदले न तो क्रेडिट मांगता है और न ही रॉयल्टी। उन्होंने कहा कि दुनिया गर्व से कहती है कि भारत ने जीरो दिया, लेकिन भारत ने इसके लिए कभी रॉयल्टी नहीं मांगी। प्रधानमंत्री नई दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम को संबोधित कर रहे थे। यह फोरम पहली बार भारत में आयोजित हो रहा है। तीन दिवसीय कार्यक्रम 15 अक्टूबर को समाप्त होगा। इस साल इसकी थीम बदलती दुनिया में ताकत के नए स्रोत तय करने पर केंद्रित है।


सरकार का उद्देश्य नागरिकों को सशक्त बनाना होना चाहिए

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार के पास अधिकार होते हैं, लेकिन उसका उद्देश्य नागरिकों को व्यवस्था पर निर्भर बनाना नहीं, बल्कि उन्हें सशक्त बनाना होना चाहिए। उन्होंने भारत की आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए 7.8 प्रतिशत ग्रोथ और 700 अरब डॉलर से अधिक के विदेशी मुद्रा भंडार की बात कही। पीएम ने कहा कि भारत का आत्मविश्वास बढ़ा है और सरकार ने इन्सॉल्वेंसी कानून बनाया है। कारोबार से जुड़ी छोटी-मोटी गलतियों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि सुधार करना भारत के लिए केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि दृढ़ विश्वास है। प्रधानमंत्री ने वेदों के संदेश का उल्लेख करते हुए साथ चलने, साथ सीखने और मिलकर प्रयास करने पर जोर दिया।


‘पावर दूसरों को एम्पावर करने के लिए होती है’

मोदी ने कहा कि इतिहास में कई वैश्विक संगठन बने, जिनके अपने-अपने हित रहे हैं। भारत ने इंटरनेशनल सोलर अलायंस और लाइफस्टाइल फॉर एन्वायर्नमेंट (LiFE) जैसे पहल के जरिए दुनिया के सामने सहयोग और साझा जिम्मेदारी का विचार रखा है। उन्होंने कहा कि भारत का जोर देशों को जोड़ने और एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करने पर है। प्रधानमंत्री के मुताबिक, ताकत का इस्तेमाल केवल अपने हितों के लिए नहीं, बल्कि दूसरों के लिए अवसर पैदा करने में होना चाहिए। भारत भरोसे और स्थिरता की बात करता है। उन्होंने कहा कि संवाद से समझ बढ़ती है और किसी भी देश की ताकत तभी सार्थक होती है, जब उससे दूसरे लोगों और देशों को भी आगे बढ़ने का अवसर मिले।


सस्ती दवाओं से वैक्सीन सप्लाई तक भारत के योगदान का जिक्र

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब दुनिया को सस्ती दवाओं की जरूरत होती है, तो भारत उसकी मदद करता है। इसी तरह, प्रतिभाशाली युवाओं के लिए भी दुनिया भारत पर भरोसा करती है। उन्होंने कोविड महामारी का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत ने 100 से अधिक देशों में वैक्सीन की सप्लाई की। पीएम ने बताया कि टेक्नोलॉजी की मदद से सरकारी सहायता सीधे लोगों के बैंक खातों तक पहुंचाने की व्यवस्था बनाई गई है, जिससे सरकार और नागरिकों के बीच सीधा संपर्क स्थापित हुआ है। उन्होंने कहा कि भारत का प्रयास जरूरत के समय भरोसेमंद साझेदार के रूप में सामने आने का है। उनके मुताबिक, दुनिया को ऐसे देशों की जरूरत है, जो संकट के समय साथ दें, अपने वादे निभाएं और समस्याओं के समाधान में योगदान करें।


AI, सप्लाई चेन और एनर्जी ट्रांजिशन पर भी बोले पीएम

मोदी ने कहा कि दुनिया एक संकट से निकलने का रास्ता खोजती है, तभी दूसरी चुनौती सामने आ जाती है। सप्लाई चेन, ऊर्जा, खनिज, भुगतान व्यवस्था और तकनीक जैसे क्षेत्र अब दबाव बनाने के माध्यम भी बन रहे हैं। इसी बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हर क्षेत्र में काम करने के तरीकों को बदल रहा है। उन्होंने भरोसे को वैश्विक अर्थव्यवस्था का बड़ा सवाल बताया और कहा कि जरूरत के समय सप्लाई जारी रहनी चाहिए तथा संकट में साझेदार देशों को साथ खड़ा होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत जीवाश्म ईंधन से जुड़े लक्ष्य को हासिल करने वाला पहला जी-20 देश बना। उनके मुताबिक, ऊर्जा बदलाव की प्रक्रिया नए अवसर भी पैदा कर रही है।


ब्लूमबर्ग फोरम में कई वैश्विक हस्तियों के शामिल होने की उम्मीद

ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम की शुरुआत 2018 में ब्लूमबर्ग के संस्थापक माइकल ब्लूमबर्ग ने की थी। इसका उद्देश्य वैश्विक अर्थव्यवस्था की बड़ी चुनौतियों पर चर्चा और उनके समाधान तलाशने के लिए सरकारों तथा निजी कंपनियों के प्रमुखों को एक मंच पर लाना है। इस बार फोरम में माइकल ब्लूमबर्ग, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, इटली के पूर्व प्रधानमंत्री मारियो द्रागी, अमेरिका की पूर्व वाणिज्य मंत्री जीना रायमोंडो, मॉडर्ना के सह-संस्थापक नौबार अफेयान, सिस्को के सीईओ चक रॉबिंस, ब्लैकस्टोन के अध्यक्ष जोनाथन ग्रे और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के गवर्नर क्रिस्टोफर वॉलर के शामिल होने की उम्मीद है। चर्चा में वैश्विक व्यापार, निवेश, तकनीक, AI, ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन और बदलते आर्थिक समीकरणों जैसे विषय शामिल हैं।

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