बिजनौर में तीन महीने की दहशत का अंत, पिंजरे में कैद हुआ तेंदुआ
- Babli Ansari
- 25 Oct, 2026
बिजनौर। गांव की पगडंडियों और खेतों के आसपास तीन महीने से मंडरा रही तेंदुए की दहशत आखिरकार खत्म हो गई। वन विभाग की ओर से लगाए गए पिंजरे में तेंदुआ फंसने की सूचना मिलते ही ग्रामीण मौके पर जुट गए। हालांकि अधिकारियों ने लोगों को दूरी बनाए रखने की हिदायत दी और वनकर्मियों की टीम ने पूरे इलाके को अपने घेरे में ले लिया। लगातार हो रहे दिखने और हमले की आशंका से ग्रामीण शाम ढलते ही घरों में कैद हो जाते थे। खेतों पर जाना और पशुओं को चराने तक में लोग डर रहे थे। तेंदुए के पकड़े जाने से गांव में राहत है, लेकिन वन विभाग अब इसकी पहचान और आगे की कार्रवाई में जुटा है।
पिंजरे में कैद हुआ तेंदुआ, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस
जानकारी के मुताबिक, वन विभाग ने तेंदुए की लगातार गतिविधियों को देखते हुए गांव के बाहरी हिस्से में पिंजरा लगाया था। इसके आसपास निगरानी भी बढ़ाई गई थी। रविवार सुबह ग्रामीणों ने पिंजरे के भीतर तेंदुए को देखा तो ग्राम प्रधान और वन विभाग को सूचना दी। कुछ ही देर में सामाजिक वानिकी विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंच गए। टीम ने सावधानी से पिंजरे को कब्जे में लिया और तेंदुए को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। बताया जा रहा है कि पकड़ा गया तेंदुआ मादा है और उसकी उम्र करीब चार से पांच वर्ष के बीच है। भीड़ बढ़ने पर वनकर्मियों ने लोगों को पीछे हटाया, ताकि जानवर और ग्रामीणों दोनों की सुरक्षा बनी रहे।
बालक की मौत के बाद बढ़ गई थी निगरानी
इस इलाके में तेंदुए की मौजूदगी का मामला उस समय गंभीर हो गया था, जब खुशहालपुर मड़का गांव में सात वर्षीय बालक नक्श कश्यप पर हमला हुआ। जानकारी के अनुसार, बच्चा अपने भाई के साथ ट्यूशन से लौट रहा था। इसी दौरान तेंदुआ उसे उठाकर ले गया। बाद में बालक का शव बरामद हुआ। घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश और भय फैल गया था। वन विभाग ने संभावित रास्तों और आबादी के नजदीक पिंजरे लगाए तथा निगरानी टीमों को सक्रिय किया। कई दिनों तक तेंदुए की तलाश चलती रही, लेकिन वह हाथ नहीं आया। ग्रामीणों का कहना था कि शाम के बाद खेतों और गांव के बाहरी रास्तों पर जाना जोखिम भरा हो गया था। अब पकड़ में आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है।
वन विभाग करेगा आगे की प्रक्रिया, गांव में सतर्कता जारी
वन अधिकारियों के अनुसार, तेंदुए को पकड़ने के बाद उसे सीधे जंगल में छोड़ने का फैसला नहीं किया जाएगा। पहले उसका स्वास्थ्य परीक्षण और व्यवहार संबंधी आकलन कराया जाएगा। यह भी देखा जाएगा कि वह मानव बस्तियों के आसपास क्यों आ रहा था और हाल की घटनाओं में उसकी भूमिका कितनी रही। सूत्रों के अनुसार, तेंदुए को वन विभाग की नर्सरी या रेस्क्यू केंद्र में रखा जा सकता है। उधर, ग्रामीणों से कहा गया है कि वे अकेले खेतों में न जाएं, बच्चों को शाम के समय बाहर न निकलने दें और किसी भी वन्यजीव की हलचल दिखने पर तत्काल विभाग को सूचना दें। वनकर्मियों की गश्त फिलहाल जारी रहेगी। अधिकारियों ने भीड़ से अपील की है कि तेंदुए को देखने के लिए पिंजरे के पास जमा न हों।
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