नोएडा में फ्लैट खरीदने के बाद भी नहीं हो रही रजिस्ट्री? समझें देरी की वजह और समस्या के समाधान का तरीका
- Shiv Kumar
- 03 Nov, 2026
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में हजारों फ्लैट खरीदार ऐसे हैं, जिन्होंने अपने सपनों का घर खरीदने के लिए जीवनभर की कमाई लगा दी। किसी ने बैंक से लाखों रुपये का होम लोन लिया, तो किसी ने अपनी जमा पूंजी खर्च करके फ्लैट खरीदा। कई परिवार वर्षों से अपने फ्लैट में रह भी रहे हैं, लेकिन आज तक उनके नाम रजिस्ट्री नहीं हो सकी है। इसकी सबसे बड़ी वजह बिल्डरों और विकास प्राधिकरणों के बीच बकाये का विवाद, जरूरी अनुमति नहीं मिलना और कुछ परियोजनाओं में निर्माण से जुड़े दस्तावेज पूरे नहीं होना है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट की कई हाउसिंग सोसाइटियों में यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है। रजिस्ट्री नहीं होने से खरीदारों को फ्लैट बेचने, बैंक से लोन लेने और संपत्ति के कानूनी दस्तावेज पूरे कराने में परेशानी होती है। उत्तर प्रदेश सरकार ने अटकी हुई आवासीय परियोजनाओं को राहत देने के लिए विशेष योजना लागू की है। इसके तहत कुछ परियोजनाओं में रजिस्ट्री शुरू भी हुई, लेकिन सभी खरीदारों की समस्या खत्म नहीं हुई है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर रजिस्ट्री क्यों अटकती है, ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट और प्राधिकरण की अनुमति का क्या महत्व है और खरीदार अपने अधिकारों के लिए कहां शिकायत कर सकते हैं।
नोएडा में फ्लैट रजिस्ट्री की समस्या: कारण, नियम और समाधान
नोएडा में फ्लैट की रजिस्ट्री केवल बिल्डर और खरीदार के बीच होने वाला काम नहीं है। ज्यादातर ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं में जमीन विकास प्राधिकरण की होती है, जिसे बिल्डर को लीज पर दिया जाता है। इसके बाद बिल्डर फ्लैट बनाकर खरीदारों को बेचता है। ऐसे मामलों में फ्लैट का मालिकाना अधिकार दर्ज कराने के लिए आमतौर पर त्रिपक्षीय सब-लीज डीड की जरूरत पड़ती है। इसमें खरीदार, बिल्डर और संबंधित प्राधिकरण शामिल होते हैं। अगर बिल्डर ने जमीन का बकाया नहीं चुकाया या जरूरी अनुमति हासिल नहीं की, तो रजिस्ट्री अटक सकती है। इसका समाधान बिल्डर के बकाये का निस्तारण, परियोजना की जरूरी मंजूरियां और खरीदारों के दस्तावेज पूरे कराने से जुड़ा है।
रजिस्ट्री में देरी क्यों हो रही है
फ्लैट रजिस्ट्री में देरी के कई कारण सामने आते हैं। सबसे बड़ी परेशानी उन परियोजनाओं में होती है, जहां बिल्डर ने प्राधिकरण से जमीन तो ले ली, लेकिन उसका पूरा भुगतान नहीं किया। समय के साथ ब्याज और अन्य शुल्क जुड़ने से बकाया बढ़ जाता है। इसके अलावा कुछ परियोजनाओं में निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ या जरूरी प्रमाणपत्र जारी नहीं किए गए। कई मामलों में बिल्डर और प्राधिकरण के बीच कानूनी विवाद भी चल रहा है। कुछ खरीदारों की रजिस्ट्री बैंक की एनओसी, भुगतान संबंधी विवाद या दस्तावेज पूरे नहीं होने के कारण भी रुक सकती है। इसलिए हर सोसाइटी की समस्या अलग हो सकती है। खरीदारों को पहले रजिस्ट्री रुकने की लिखित वजह पता करनी चाहिए।
ओसी (ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट) से जुड़े नियम
ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट यानी OC एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इसे संबंधित विकास प्राधिकरण निर्धारित शर्तों और जांच के आधार पर जारी करता है। इसका उद्देश्य यह प्रमाणित करना है कि संबंधित भवन या उसका स्वीकृत हिस्सा उपयोग के लिए जरूरी शर्तों को पूरा करता है। कई परियोजनाओं में पूरे परिसर के बजाय किसी खास टावर या हिस्से के लिए भी प्रमाणपत्र जारी हो सकता है। इसलिए फ्लैट खरीदते समय केवल बिल्डर की बात पर भरोसा करने के बजाय अपने टावर का OC या पार्ट-OC जरूर जांचें। कम्प्लीशन सर्टिफिकेट और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट का उद्देश्य अलग हो सकता है। OC मिलने के बाद भी रजिस्ट्री अपने आप नहीं होती। इसके लिए प्राधिकरण की अनुमति, बकाया संबंधी शर्तें और अन्य दस्तावेज पूरे होना जरूरी हो सकते हैं।
बिल्डर और अथॉरिटी के बीच विवाद
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में रजिस्ट्री अटकने का बड़ा कारण बिल्डरों और विकास प्राधिकरणों के बीच भुगतान संबंधी विवाद है। प्राधिकरण बिल्डर को जमीन आवंटित करता है और तय शर्तों के अनुसार जमीन की कीमत, लीज रेंट और दूसरे शुल्क वसूलता है। जब बिल्डर इनका भुगतान नहीं करता, तो प्राधिकरण संबंधित परियोजना की रजिस्ट्री अनुमति रोक सकता है। इसका सबसे ज्यादा असर उन खरीदारों पर पड़ता है, जिन्होंने फ्लैट की पूरी कीमत चुका दी है। सरकार ने इस समस्या को दूर करने के लिए अटकी परियोजनाओं को राहत देने की योजना लागू की थी। इसके तहत पात्र बिल्डरों को संशोधित बकाये का शुरुआती हिस्सा जमा कराकर रजिस्ट्री शुरू कराने का रास्ता दिया गया, लेकिन कई परियोजनाओं में विवाद अभी बाकी है।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट के मामलों की स्थिति
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में रजिस्ट्री की समस्या कई वर्षों से बनी हुई है। यहां बड़ी संख्या में ऐसे खरीदार हैं, जिन्हें फ्लैट का कब्जा मिल चुका है, लेकिन सब-लीज डीड नहीं हो सकी। जून 2026 में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने 14 बिल्डरों से करीब 315.5 करोड़ रुपये का बकाया वसूलने के लिए रिकवरी सर्टिफिकेट जारी करने का फैसला किया था। इस कार्रवाई से जुड़े मामलों में 8,856 खरीदार प्रभावित बताए गए थे। वहीं, अक्टूबर 2026 में अजनारा होम्स के खरीदारों की याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकार, प्राधिकरण और यूपी रेरा से समाधान की कार्ययोजना मांगी। इससे स्पष्ट है कि कुछ परियोजनाओं में राहत मिली है, जबकि अन्य मामलों में खरीदारों को अब भी इंतजार करना पड़ रहा है।
प्रभावित सोसाइटियों की सूची
नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट की कई हाउसिंग सोसाइटियों में फ्लैट रजिस्ट्री से जुड़े विवाद सामने आए हैं। इनमें अजनारा होम्स, रेडिकान वेदांतम और एम्स ग्रीन एवेन्यू जैसे नाम शामिल हैं। अजनारा होम्स में अक्टूबर 2026 तक कई फ्लैटों की रजिस्ट्री लंबित होने की जानकारी सामने आई थी। वहीं, जुलाई 2026 में रेडिकान वेदांतम और एम्स ग्रीन एवेन्यू के खरीदारों को अदालत से राहत मिली थी। हालांकि किसी सोसाइटी में पहले रजिस्ट्री अटकने का मतलब यह नहीं है कि उसके सभी फ्लैटों की रजिस्ट्री आज भी बंद है। टावर और फ्लैट के अनुसार स्थिति अलग हो सकती है। इसलिए प्रभावित परियोजनाओं की अंतिम और वर्तमान सूची संबंधित प्राधिकरण से ही जांचनी चाहिए।
फ्लैट खरीदार क्या कर सकते हैं
अगर आपने फ्लैट की पूरी कीमत चुका दी है, लेकिन रजिस्ट्री नहीं हो रही, तो सबसे पहले बिल्डर से लिखित जवाब मांगें। यह पता करें कि देरी की वजह प्राधिकरण का बकाया, OC, एनओसी या कोई कानूनी विवाद है। इसके बाद संबंधित विकास प्राधिकरण से परियोजना और अपने टावर की रजिस्ट्री अनुमति की स्थिति जांचें। बिल्डर-बायर एग्रीमेंट, भुगतान रसीद और कब्जे से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखें। यदि बिल्डर स्पष्ट जवाब नहीं देता, तो यूपी रेरा में शिकायत की जा सकती है। सोसाइटी के दूसरे खरीदारों के साथ मिलकर सामूहिक रूप से प्राधिकरण को ज्ञापन देना भी एक विकल्प है। अदालत जाने से पहले मामले की कानूनी स्थिति समझना और विशेषज्ञ की सलाह लेना उपयोगी रहेगा।
रेरा में शिकायत कैसे करें
रजिस्ट्री में अनावश्यक देरी होने पर खरीदार उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी यानी यूपी रेरा में ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके लिए आधिकारिक वेबसाइट up-rera.in पर जाकर शिकायत वाले सेक्शन में जाएं। वहां ई-कोर्ट लॉगिन या साइनअप का विकल्प चुनें। मोबाइल नंबर या उपलब्ध लॉगिन प्रक्रिया से अकाउंट बनाकर संबंधित परियोजना और बिल्डर का विवरण भरें। इसके बाद शिकायत का कारण, फ्लैट की जानकारी और मांगी गई राहत दर्ज करें। जरूरी दस्तावेज अपलोड करके निर्धारित शुल्क जमा करें। सामान्य शिकायत के लिए फॉर्म-M की प्रक्रिया उपलब्ध है। अप्रैल 2026 से अपंजीकृत परियोजनाओं के खरीदारों के लिए भी शिकायत दर्ज कराने की सुविधा बेहतर की गई है। शिकायत जमा होने के बाद उसका नंबर सुरक्षित रखें।
जरूरी दस्तावेज और प्रक्रिया
फ्लैट रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए खरीदारों को कई दस्तावेज तैयार रखने पड़ते हैं। इनमें बिल्डर-बायर एग्रीमेंट, अलॉटमेंट लेटर, भुगतान की रसीदें, कब्जा पत्र, पहचान और पते के प्रमाण शामिल हो सकते हैं। होम लोन होने पर बैंक से संबंधित दस्तावेज या एनओसी की जरूरत भी पड़ सकती है। इसके अलावा परियोजना का OC या पार्ट-OC, प्राधिकरण की रजिस्ट्री अनुमति और बिल्डर की ओर से जरूरी कागजात पूरे होने चाहिए। खरीदार को लागू स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क की जानकारी भी पहले लेनी चाहिए। सभी शर्तें पूरी होने पर संबंधित उपनिबंधक कार्यालय में दस्तावेज प्रस्तुत कर रजिस्ट्री कराई जाती है। दस्तावेजों की अंतिम सूची परियोजना और मामले के अनुसार बदल सकती है।
भविष्य में क्या बदलाव संभव
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में लंबित फ्लैट रजिस्ट्री के समाधान के लिए आने वाले समय में बिल्डरों से बकाया वसूली और पात्र परियोजनाओं की रजिस्ट्री प्रक्रिया तेज करने पर जोर रह सकता है। सरकार की राहत योजना के तहत कुछ परियोजनाओं में पहले ही रजिस्ट्री का रास्ता खुला है। जून 2026 में प्राधिकरण ने बकाया न चुकाने वाले बिल्डरों के खिलाफ वसूली की कार्रवाई आगे बढ़ाने का फैसला भी किया था। अदालतों में चल रहे मामलों से भी खरीदारों को राहत मिलने की संभावना बन सकती है। हालांकि किसी एक मामले में मिला आदेश सभी परियोजनाओं पर अपने आप लागू नहीं होता। वास्तविक बदलाव प्राधिकरण के निर्णय, बिल्डर के भुगतान, कानूनी आदेश और परियोजना की मंजूरियों पर निर्भर करेगा।
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