नोएडा में वायु प्रदूषण गंभीर स्तर पर पहुंचा, AQI 412 रिकॉर्ड, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ने की आशंका

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नोएडा में गुरुवार सुबह स्मॉग छाया रहा और औसत AQI 303 दर्ज किया गया। सेक्टर-62 में प्रदूषण गंभीर श्रेणी तक पहुंच गया। दूसरी ओर, दिल्ली में वाहनों के प्रवेश संबंधी प्रतिबंधों के कारण सेक्टर-62 और चिल्ला बॉर्डर पर चेकिंग से जाम की स्थिति बनी हुई है।

नोएडा। उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले के नोएडा में वायु प्रदूषण की स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई है। गुरुवार सुबह से ही शहर के कई इलाकों में स्मॉग की चादर छाई रही। सुबह नौ बजे नोएडा का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI 303 दर्ज किया गया, जो बहुत खराब श्रेणी में आता है। शहर में सबसे अधिक प्रदूषण सेक्टर-62 में दर्ज किया गया, जहां एक्यूआई 412 तक पहुंच गया। यह गंभीर श्रेणी में आता है। इसके अलावा सेक्टर-110, सेक्टर-150, सेक्टर-1 और सेक्टर-116 में भी हवा की गुणवत्ता खराब बनी हुई है। प्रदूषण के कारण लोगों को सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन और गले में खराश जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए ऐसी हवा अधिक नुकसानदायक हो सकती है। दूसरी ओर, दिल्ली में वाहनों के प्रवेश संबंधी प्रतिबंधों के चलते नोएडा-दिल्ली बॉर्डर पर चेकिंग बढ़ने से यातायात भी प्रभावित हो रहा है।


सेक्टर-62 में AQI 412, दूसरे इलाकों में भी खराब हवा

नोएडा के अलग-अलग सेक्टरों में गुरुवार सुबह प्रदूषण के स्तर में अंतर देखने को मिला। सबसे खराब स्थिति सेक्टर-62 में रही, जहां एयर क्वालिटी इंडेक्स 412 दर्ज किया गया। यह गंभीर श्रेणी का प्रदूषण स्तर है। वहीं, सेक्टर-110 में एक्यूआई 287 और सेक्टर-150 में 288 दर्ज किया गया। दोनों इलाकों में हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी में रही। सेक्टर-1 में एक्यूआई 269 और सेक्टर-116 में 257 रिकॉर्ड किया गया। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि शहर के अधिकांश निगरानी वाले इलाकों में प्रदूषण का स्तर सामान्य से काफी अधिक बना हुआ है। सुबह के समय स्मॉग छाए रहने से वातावरण में धुंध जैसी स्थिति दिखाई दी। प्रदूषण की इस स्थिति को देखते हुए लोगों को लंबे समय तक बाहर रहने और अनावश्यक शारीरिक गतिविधियों से बचने की सलाह दी जा रही है।


पांच दिनों से खराब बनी हुई है नोएडा की हवा

नोएडा में पिछले पांच दिनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो वायु प्रदूषण लगातार खराब और बहुत खराब श्रेणी के आसपास बना हुआ है। चार नवंबर को शहर का औसत एक्यूआई 316 दर्ज किया गया था। इससे पहले तीन नवंबर को यह 291 और दो नवंबर को 330 रहा था। एक नवंबर को औसत एक्यूआई 248 रिकॉर्ड किया गया था। गुरुवार पांच नवंबर की सुबह नौ बजे यह फिर 303 तक पहुंच गया। इस तरह पिछले कुछ दिनों में प्रदूषण के स्तर में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, लेकिन हवा की गुणवत्ता में स्थायी सुधार नहीं हुआ है। दो नवंबर को एक्यूआई 330 तक पहुंचने के बाद तीन नवंबर को इसमें कुछ कमी आई थी। इसके बाद चार नवंबर को प्रदूषण दोबारा बढ़ गया। अब पांच नवंबर को भी शहर की हवा बहुत खराब श्रेणी में बनी हुई है।


दिल्ली बॉर्डर पर वाहनों की जांच से लग रही लंबी कतारें

वायु प्रदूषण के बीच नोएडा से दिल्ली आने-जाने वाले वाहन चालकों की परेशानी भी बढ़ गई है। दिल्ली में बीएस-4 श्रेणी के वाहनों के प्रवेश पर लागू प्रतिबंधों के चलते बॉर्डर पर वाहनों की जांच की जा रही है। इसका असर नोएडा के सेक्टर-62 और चिल्ला बॉर्डर पर देखने को मिल रहा है। इन स्थानों पर वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं और यातायात की रफ्तार धीमी हो गई है। दिल्ली में प्रवेश करने से पहले वाहनों की जांच के कारण विशेष रूप से सुबह और व्यस्त समय में जाम की स्थिति बन रही है। इससे नौकरी और अन्य जरूरी कामों के लिए दिल्ली जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बॉर्डर पर वाहनों की आवाजाही धीमी होने का असर आसपास की सड़कों पर भी पड़ रहा है। वाहन चालकों को यात्रा के दौरान अतिरिक्त समय लग सकता है।


प्रदूषण से बचाव के लिए सावधानी बरतने की जरूरत

नोएडा में बढ़ते प्रदूषण के कारण स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का खतरा भी बढ़ गया है। खराब वायु गुणवत्ता के संपर्क में आने से आंखों में जलन, खांसी, गले में परेशानी और सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। अस्थमा और अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। बच्चों और बुजुर्गों पर भी प्रदूषित हवा का अधिक असर पड़ सकता है। ऐसे में लोगों को अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचने, अधिक प्रदूषण वाले स्थानों पर लंबे समय तक नहीं रुकने और जरूरत पड़ने पर अच्छी फिटिंग वाला एन95 मास्क इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। बाहर व्यायाम करने वाले लोगों को भी हवा की गुणवत्ता देखकर अपनी गतिविधियां तय करनी चाहिए। आने वाले दिनों में प्रदूषण बढ़ने की आशंका के बीच लोगों के लिए स्थानीय वायु गुणवत्ता की जानकारी पर नजर रखना जरूरी है।

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