ग्रेटर नोएडा में APK फाइल के जरिए दो लोगों के बैंक खातों से 16 लाख रुपये निकाले, मोबाइल हैक कर की साइबर ठगी

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ग्रेटर नोएडा और नोएडा में साइबर ठगों ने दो लोगों के खातों से 16 लाख रुपये निकाल लिए। अस्पताल में अपॉइंटमेंट के नाम पर APK फाइल भेजकर सात लाख की ठगी हुई। वहीं, रिटायर्ड रेलकर्मी के खाते से नौ लाख रुपये निकाले गए। पुलिस जांच कर रही है।

ग्रेटर नोएडा। गौतमबुद्ध नगर में साइबर ठगी के दो मामले सामने आए हैं, जिनमें ठगों ने दो लोगों के बैंक खातों से कुल 16 लाख रुपये निकाल लिए। पहले मामले में कासना निवासी एक व्यक्ति को अस्पताल में डॉक्टर का अपॉइंटमेंट दिलाने के नाम पर APK फाइल डाउनलोड कराई गई। इसके बाद उसके बैंक खाते से सात लाख रुपये निकाल लिए गए। वहीं, दूसरे मामले में सेक्टर-78 में रहने वाले रेलवे के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी के खाते से नौ लाख रुपये निकाल लिए गए। पीड़ित के मुताबिक, साइबर ठगों ने उनके नाम पर फाइनेंस कंपनियों से लोन भी लिया था। हैरानी की बात यह है कि सेवानिवृत्त कर्मचारी का कहना है कि उन्होंने किसी को अपना ओटीपी तक नहीं बताया था। दोनों पीड़ितों ने नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद साइबर क्राइम थाने में मुकदमे दर्ज किए गए हैं। पुलिस दोनों मामलों की जांच कर रही है। साइबर क्राइम थाना प्रभारी विजय सिंह राना ने लोगों से अनजान नंबरों से आने वाली APK फाइल डाउनलोड नहीं करने की अपील की है।


पत्नी को डॉक्टर दिखाने के लिए खोजा नंबर, खाते से निकल गए सात लाख रुपये

पहला मामला ग्रेटर नोएडा के कासना क्षेत्र का है। यहां रहने वाले बिजेंद्र एक निजी कंपनी में नौकरी करते हैं। बीते 29 अक्टूबर को उनकी पत्नी की तबीयत खराब हो गई थी। वह पत्नी को दादरी स्थित नवीन अस्पताल में डॉक्टर को दिखाना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने इंटरनेट पर डॉक्टर का संपर्क नंबर तलाशना शुरू किया। इसी दौरान उनके पास एक व्यक्ति का फोन आया, जिसने खुद को अस्पताल का कर्मचारी बताया। उसने डॉक्टर का ऑनलाइन अपॉइंटमेंट बुक कराने की बात कही और बिजेंद्र के मोबाइल पर एक APK फाइल भेज दी। अपॉइंटमेंट की प्रक्रिया समझकर बिजेंद्र ने फाइल डाउनलोड कर ली और उसमें मांगी गई सामान्य जानकारी भर दी। इसके कुछ समय बाद उनके बैंक खाते से रुपये निकलने लगे। कुल सात लाख रुपये की निकासी होने पर उन्हें साइबर ठगी का पता चला।


APK फाइल डाउनलोड करते ही मोबाइल हैक होने की आशंका

बिजेंद्र के मुताबिक, अस्पताल में अपॉइंटमेंट बुक कराने के नाम पर भेजी गई APK फाइल डाउनलोड करने के बाद उनके मोबाइल की सुरक्षा प्रभावित हो गई। उनका आरोप है कि साइबर ठगों ने इसी का फायदा उठाकर बैंक खाते से सात लाख रुपये निकाल लिए। खाते से रकम कटने का संदेश मिलने पर उन्होंने जानकारी जुटाई तो ठगी का पता चला। इस मामले में पुलिस यह जांच कर रही है कि मोबाइल में भेजी गई फाइल के जरिए बैंक खाते तक पहुंच कैसे बनाई गई। साइबर अपराधी अक्सर किसी सेवा का कर्मचारी बनकर लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश करते हैं। ऐसे में अनजान स्रोत से भेजी गई फाइल डाउनलोड करना जोखिम भरा हो सकता है। पुलिस ने भी लोगों को अस्पताल या अन्य सेवाओं के नाम पर भेजे जाने वाले संदिग्ध लिंक और APK फाइलों से सावधान रहने की सलाह दी है।


रिटायर्ड रेलकर्मी के खाते से नौ लाख निकाले, नाम पर लोन भी लिया

दूसरा मामला नोएडा के सेक्टर-78 का है। यहां रहने वाले शंकरन रेलवे से सेवानिवृत्त हैं और पेंशन से अपना खर्च चलाते हैं। दो नवंबर को उनके मोबाइल पर बैंक खाते से रुपये कटने के संदेश आने लगे। जब उन्होंने खाते की जांच की तो पता चला कि नौ लाख रुपये निकाल लिए गए हैं। पीड़ित का आरोप है कि साइबर ठगों ने डीएमआई फाइनेंस और किसेत्सु नाम की कंपनियों से उनके नाम पर लोन भी लिया और रकम निकाल ली। शंकरन का कहना है कि उन्होंने किसी भी व्यक्ति को बैंक खाते से संबंधित ओटीपी नहीं बताया था। इसके बावजूद उनके खाते से इतनी बड़ी रकम निकल गई। उन्हें आशंका है कि किसी APK फाइल के माध्यम से मोबाइल तक अनधिकृत पहुंच बनाई गई होगी। हालांकि, ठगी का वास्तविक तरीका पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।


साइबर क्राइम थाने में मुकदमे दर्ज, पुलिस ने शुरू की जांच

दोनों मामलों में पीड़ितों ने पहले नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद बुधवार को साइबर क्राइम थाने में मुकदमे दर्ज कराए गए। थाना प्रभारी विजय सिंह राना ने बताया कि दोनों घटनाओं की जांच की जा रही है। पुलिस बैंक खातों से निकाली गई रकम और साइबर ठगी के तरीके की जानकारी जुटा रही है। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी अनजान नंबर से भेजी गई APK फाइल अपने मोबाइल में डाउनलोड न करें। अस्पताल, बैंक या किसी अन्य सेवा का संपर्क नंबर तलाशते समय केवल आधिकारिक माध्यमों का इस्तेमाल करें। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में एप्लिकेशन इंस्टॉल करने से बचें। संदिग्ध लेनदेन होने पर तत्काल बैंक और साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।

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