नोएडा-ग्रेनो एक्सप्रेसवे पर बनेगा बिना पिलर वाला आर्क टाइप फ्लाईओवर, 18 महीने में निर्माण पूरा करने का लक्ष्य

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नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर सेक्टर-150 और सेक्टर-148 के बीच 84.16 करोड़ रुपये से नया फ्लाईओवर बनाया जाएगा। इसकी लंबाई 610 मीटर होगी। नेटवर्क आर्क डिजाइन वाले पुल में बीच का पिलर नहीं होगा। प्राधिकरण ने निर्माण 18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा है।

नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर सेक्टर-150 और सेक्टर-148 के बीच आवागमन आसान बनाने के लिए नोएडा प्राधिकरण ने नए फ्लाईओवर के निर्माण की तैयारी शुरू कर दी है। इस परियोजना पर करीब 84.16 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। फ्लाईओवर बनने से दिल्ली, गाजियाबाद और नोएडा के अन्य हिस्सों से सेक्टर-150 और आसपास के सेक्टरों में आने-जाने वाले लोगों को सीधा रास्ता मिल सकेगा। प्राधिकरण ने परियोजना की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर ली है। अब इसकी तकनीकी जांच के लिए रिपोर्ट आईआईटी रुड़की भेजने की तैयारी है। तकनीकी परीक्षण और अन्य जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। प्रस्तावित फ्लाईओवर की कुल लंबाई 610 मीटर और चौड़ाई 9.5 मीटर होगी। इसकी सबसे खास बात यह है कि इसे नेटवर्क आर्क टाइप ब्रिज के रूप में बनाया जाएगा। इस डिजाइन में एक्सप्रेसवे के ऊपर मुख्य हिस्से में बीच का पिलर नहीं होगा। प्राधिकरण ने निर्माण कार्य करीब 18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा है।


नेटवर्क आर्क डिजाइन पर बनेगा फ्लाईओवर, बीच में नहीं होगा पिलर

नोएडा प्राधिकरण ने प्रस्तावित फ्लाईओवर के लिए नेटवर्क आर्क टाइप ब्रिज का डिजाइन तैयार कराया है। इस तकनीक में मुख्य पुल का भार आर्क और उससे जुड़े संरचनात्मक हिस्सों के माध्यम से संभाला जाता है। इससे एक्सप्रेसवे के ऊपर मुख्य स्पैन के बीच में पिलर बनाने की जरूरत नहीं होगी। प्रस्तावित फ्लाईओवर का मुख्य स्पैन 65 मीटर रखा गया है। इस डिजाइन का उद्देश्य एक्सप्रेसवे पर वाहनों की आवाजाही के लिए नीचे पर्याप्त जगह उपलब्ध कराना है। हालांकि, पुल की अंतिम तकनीकी संरचना आईआईटी रुड़की की जांच के बाद ही तय होगी। प्राधिकरण इसी वजह से डीपीआर को तकनीकी परीक्षण के लिए भेज रहा है, ताकि निर्माण शुरू होने से पहले डिजाइन से जुड़े जरूरी पहलुओं की जांच हो सके।


610 मीटर लंबा और 9.5 मीटर चौड़ा होगा नया फ्लाईओवर

प्राधिकरण की योजना के अनुसार, सेक्टर-150 और सेक्टर-148 के बीच बनने वाले फ्लाईओवर की कुल लंबाई 610 मीटर होगी। इसकी चौड़ाई 9.5 मीटर प्रस्तावित है। परियोजना में 65 मीटर का मुख्य ब्रिज स्पैन और करीब 545 मीटर लंबे एप्रोच तथा रैंप शामिल होंगे। एप्रोच और रैंप के माध्यम से वाहनों को फ्लाईओवर पर चढ़ने और उतरने की सुविधा मिलेगी। इस पूरे निर्माण कार्य पर लगभग 84.16 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है। फिलहाल यह परियोजना प्रस्तावित चरण में है और डीपीआर की तकनीकी जांच बाकी है। जांच के बाद आवश्यक स्वीकृतियां और निर्माण से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी।


सेक्टर-150 और आसपास के सेक्टरों तक पहुंचना होगा आसान

नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के आसपास लगातार विकसित हो रहे आवासीय क्षेत्रों में बेहतर सड़क संपर्क की जरूरत है। खासकर सेक्टर-150 और उसके आसपास के सेक्टरों में आने-जाने वाले वाहन चालकों को वर्तमान कनेक्टिविटी के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है। दिल्ली, गाजियाबाद और नोएडा के दूसरे हिस्सों से आने वाले लोगों को इस क्षेत्र तक पहुंचने के लिए मौजूदा मार्गों का इस्तेमाल करना पड़ता है। प्रस्तावित फ्लाईओवर बनने के बाद सेक्टर-150 और सेक्टर-148 के बीच सीधा संपर्क उपलब्ध होगा। इससे वाहन चालकों को आवागमन के लिए एक अतिरिक्त विकल्प मिलेगा और आसपास की सड़कों पर यातायात व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है। यह परियोजना एक्सप्रेसवे से जुड़े सेक्टरों के बीच कनेक्टिविटी मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


18 महीने में निर्माण पूरा करने का लक्ष्य, IIT रुड़की करेगी तकनीकी जांच

नोएडा प्राधिकरण ने इस फ्लाईओवर का निर्माण करीब 18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। हालांकि, निर्माण शुरू होने से पहले परियोजना की तकनीकी जांच और अन्य जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की जानी हैं। डीपीआर तैयार होने के बाद अब उसे आईआईटी रुड़की भेजा जा रहा है। वहां से तकनीकी परीक्षण पूरा होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्राधिकरण की योजना है कि सभी औपचारिकताएं पूरी कर निर्माण कार्य शुरू कराया जाए। परियोजना के पूरा होने पर सेक्टर-150 और सेक्टर-148 के बीच सड़क संपर्क बेहतर होगा। फिलहाल निर्माण शुरू होने की निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई है।

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