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Summer 2025: प्रचंड गर्मी का आगाज: 25 मई से शुरू होगा नौतपा, 9 दिनों तक आग उगलेगा सूर्य

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नई दिल्ली – हर साल की तरह इस साल भी गर्मी अपना रौद्र रूप दिखाने को तैयार है। सूर्य देव जब रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो नौतपा की शुरुआत होती है
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नई दिल्ली – हर साल की तरह इस साल भी गर्मी अपना रौद्र रूप दिखाने को तैयार है। सूर्य देव जब रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो नौतपा की शुरुआत होती है – एक ऐसा समय जब धरती तपने लगती है और आसमान से आग बरसने लगती है। 2025 में नौतपा 25 मई से शुरू होगा और यह 8 जून तक चलेगा। इन 15 दिनों में मौसम विज्ञान और ज्योतिष के अनुसार सबसे अधिक तापमान दर्ज किया जाता है, जिसमें शुरुआती 9 दिन 'नौतपा' के नाम से जाने जाते हैं।

क्या है नौतपा?

नौतपा का अर्थ है 'नौ दिन की तपन'। जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है, तो यह काल नौतपा कहलाता है। ये दिन वर्ष की सबसे भीषण गर्मी वाले दिन माने जाते हैं। सूर्य का रोहिणी में प्रवेश इस बात का संकेत होता है कि अब पृथ्वी सूर्य के सबसे निकट स्थिति में है, जिससे उसका ताप तेज़ी से बढ़ता है।

कब से कब तक रहेगा नौतपा 2025 में?

इस साल नौतपा 25 मई से शुरू होकर 2 जून तक रहेगा, लेकिन सूर्य 15 दिनों तक रोहिणी नक्षत्र में स्थित रहेगा यानी 8 जून तक भीषण गर्मी का प्रभाव जारी रहेगा। मान्यता है कि यदि नौतपा के दिन जितने तपते हैं, वर्षा ऋतु उतनी ही अच्छी होती है। इस वजह से किसान भी नौतपा को एक शुभ संकेत के रूप में देखते हैं।

नौतपा में क्यों पड़ती है प्रचंड गर्मी?

ज्योतिषीय दृष्टिकोण से देखा जाए तो रोहिणी नक्षत्र शुक्र ग्रह से संबंधित है, जबकि सूर्य और शुक्र को एक-दूसरे का शत्रु ग्रह माना जाता है। जब सूर्य इस नक्षत्र में प्रवेश करता है, तो यह टकराव ऊष्मा को और भी तीव्र कर देता है। साथ ही, इस समय सूर्य की किरणें सीधी पृथ्वी पर पड़ती हैं, जिससे तापमान अपने चरम पर पहुंचता है।

नौतपा का ज्योतिष से क्या है संबंध?

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, सूर्य का रोहिणी नक्षत्र में गोचर अत्यधिक प्रभावशाली माना जाता है। यह समय प्रकृति में तेज़ बदलाव का होता है। माना जाता है कि सूर्य की यह स्थिति वर्षा चक्र को भी प्रभावित करती है। यदि सूर्य इस अवधि में खूब तपता है, तो उसके बाद मानसून अच्छा रहता है और अच्छी बारिश होती है।

नौतपा में कैसे रखें अपना ध्यान?

भीषण गर्मी से बचने के लिए नौतपा के दिनों में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए:

अधिक से अधिक पानी पीना चाहिए ताकि शरीर हाइड्रेट रहे।

धूप में बाहर निकलने से बचना चाहिए, विशेषकर दोपहर के समय।

हल्के और ढीले कपड़े पहनें।

अधिक मसालेदार और तैलीय भोजन से बचें।

फलों और तरल पदार्थों का सेवन बढ़ाएं।

क्या है नौतपा का प्रभाव प्रकृति पर?

नौतपा केवल मनुष्यों पर ही नहीं, बल्कि प्रकृति पर भी असर डालता है। इस दौरान नदियों का जलस्तर घटता है, पेड़-पौधे मुरझा जाते हैं और पशु-पक्षी भी गर्मी से बेहाल हो जाते हैं। हालांकि, इस कठोर तपन के बाद ही वर्षा ऋतु का आगमन होता है, जिससे धरती को राहत मिलती है।

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