Greater Noida में गूंजा धर्म का स्वर, शंकराचार्य ने अखिलेश को दिखाई ‘सनातन’ की राह

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ग्रेटर नोएडा वेस्ट की धरती उस वक्त अध्यात्म और संस्कृति की अलौकिक ऊर्जा से भर उठी, जब अनंत श्री विभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अनंतानंद सरस्वती का भव्य आगमन हुआ।

ग्रेटर नोएडा वेस्ट की धरती उस वक्त अध्यात्म और संस्कृति की अलौकिक ऊर्जा से भर उठी, जब अनंत श्री विभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अनंतानंद सरस्वती का भव्य आगमन हुआ। काशी के राजगुरु मठ के पीठाधीश्वर और सनातन धर्म के प्रेरणास्रोत स्वामी अनंतानंद जी ने विभिन्न सोसाइटीज़ में भागवत कथा और धर्म प्रचार के माध्यम से सैकड़ों श्रद्धालुओं को अपने प्रवचनों से मंत्रमुग्ध कर दिया।

धर्म और आधुनिकता का दिखा संगम

स्वामी जी ने कहा कि गौतमबुद्ध नगर, विशेषकर ग्रेटर नोएडा वेस्ट, आधुनिकता की दौड़ में शामिल जरूर है, लेकिन उसने अपनी संस्कृति और परंपराओं को नहीं छोड़ा है। उन्होंने इसे “धर्म और विकास का अद्भुत संगम” बताया। प्रवचनों के दौरान उन्होंने महिलाओं, पुरुषों और बच्चों को सनातन परंपराओं, धार्मिक आचरण और भगवान की भक्ति का महत्व समझाया। इस दौरान मौजूद लोग न सिर्फ सुनते रहे, बल्कि भाव-विभोर होकर उनकी बातों में डूबते चले गए।

जाति के नाम पर कथा विवाद पर किया करारा प्रहार 

इस मौके पर हाल ही में इटावा में कथावाचक के साथ हुई अभद्रता पर पूछे गए सवाल पर शंकराचार्य ने राजनीति और जातिवाद पर करारा प्रहार किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि “सनातन धर्म में कथा कहने के लिए न तो जाति की बाध्यता है और न ही किसी विशेष अधिकार की ज़रूरत।” उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि करवा चौथ पर महिलाएं भगवान की कथा कहती हैं, तो क्या वो भी गैरकानूनी हैं? शंकराचार्य ने कहा कि ये विवाद कुछ और था, लेकिन इसे जानबूझकर जातिगत रंग दे दिया गया, ताकि सनातन धर्म को बदनाम किया जा सके। 

इसके साथ ही उन्होंने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि “धार्मिक विषयों पर राजनीति करना समाज के लिए घातक है। अखिलेश जी ने इस मामले में जल्दबाजी दिखाई है।”

प्रसिद्ध कथावाचिका पूज्य मंजुलता ने दी तीखी प्रतिक्रिया

वहीं अयोध्या की प्रसिद्ध कथावाचिका पूज्य मंजुलता जी ने भी इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि “जो व्यास गद्दी पर बैठा है, वो भगवान के समान होता है। उसके साथ अभद्रता बेहद शर्मनाक है।” उन्होंने यह भी कहा कि वो 23 वर्षों से कथा कर रही हैं और उनसे कभी किसी ने उनकी जाति नहीं पूछी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह विवाद राजनीति से प्रेरित है और अब वक्त आ गया है कि धर्म को राजनीति से अलग रखा जाए।

सामाजिक समरसता और एकता का दिया गहरा संदेश

स्वामी अनंतानंद सरस्वती के प्रवचनों ने न सिर्फ धार्मिक चेतना जगाई, बल्कि सामाजिक समरसता और एकता का भी गहरा संदेश दिया। सोसाइटीज़ में रहने वाले लोगों ने उनका आभार जताते हुए कहा कि धर्म के ऐसे सच्चे स्वर, आज के समय में समाज को जोड़ने का काम करते हैं।

स्वामी जी के विचारों की अब ग्रेटर नोएडा वेस्ट की जनता में भूरी-भूरी प्रशंसा हो रही है, और हर कोई यही कह रहा है कि “ऐसे संतों की वाणी से ही देश और धर्म का भविष्य सुरक्षित है।”

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