गजब! नोएडा में चल रहा था फर्जी आईबी ऑफिस, अफसरों की तरह रहते थे आरोपी, ऐसी खुली पोल
- Shiv Kumar
- 11 Aug, 2025
Noida: नोएडा एनसीआर में ठगी और अपराध के ऐसे ऐसे कारनामे आ रहे हैं, जिसे सुनकर लोग हैरान हो रहे हैं। अब नोएडा पुलिस ने सेक्टर-70 में चल रहे एक फर्जी पुलिस कार्यालय का भंडाफोड़ करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद को “इंटरनेशनल पुलिस एंड क्राइम इंवेस्टीगेशन ब्यूरो” के अधिकारी बताते थे और पुलिस की तरह पैरलल ऑफिस चला रहे थे। यह गिरोह लोगों से मोटी रकम लेकर उनके वेरिफिकेशन से लेकर विभिन्न मंत्रालयों से जुड़े काम कराने का दावा करता था।
कैसे चला ऑपरेशन
पुलिस को सूचना मिली कि सेक्टर-70 में एक दफ्तर हूबहू पुलिस ऑफिस की तरह संचालित हो रहा है। बाहर लगे बोर्ड पर ‘इंटरनेशनल पुलिस एंड क्राइम इंवेस्टीगेशन ब्यूरो’ लिखा था। रविवार को छापेमारी कर फेज-3 पुलिस ने छह आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों का दावा था कि उनका ऑफिस यूके में भी है और वे इंटरपोल व आईबी से जुड़े हैं।
पश्चिम बंगाल से आए थे आरोपी
डीसीपी सेंट्रल शक्ति मोहन अवस्थी के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी पश्चिम बंगाल के रहने वाले हैं—वीरभूम के विभाष, अराग्य अधिकारी, समापदमल, पिंटू पाल, 24 परगना के बाबुल चंद्र मंडल और कोलकाता के असीष कुमार। इन्होंने 4 जून को जगह किराये पर लेकर रेंट एग्रीमेंट कराया और करीब 8-10 दिन पहले बोर्ड लगाकर ऑफिस शुरू किया। प्राथमिक जांच में पता चला कि आरोपी खुद को पुलिस के समकक्ष लोकसेवक बताते थे।
बरामदगी की लंबी सूची
छापेमारी में पुलिस ने जनजातीय कार्य मंत्रालय, मिनिस्ट्री ऑफ आयुष और मिनिस्ट्री ऑफ सोशल जस्टिस एंड एंपावरमेंट के फर्जी दस्तावेज, 17 स्टांप मोहर, नौ आईडी कार्ड, नौ मोबाइल फोन, छह डेबिट कार्ड, चार चेकबुक, पैन और वोटर कार्ड, तीन तरह के विजिटिंग कार्ड, चार बड़े बोर्ड, 42,300 रुपये नकद और कई अन्य दस्तावेज बरामद किए।
पहले भी चला चुके हैं फर्जी ऑफिस
पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह पश्चिम बंगाल में भी इसी तरह का फर्जी ऑफिस चला चुका है। अब पुलिस इनके क्राइम रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की गहन जांच कर रही है। आरोपियों के चार बैंक खातों की जानकारी जुटाई जा रही है।
वेबसाइट से लेते थे डोनेशन
आरोपी अपनी वेबसाइट www.intlpcrib.in के जरिए लोगों से “डोनेशन” लेते थे और खुद को अंतरराष्ट्रीय संस्था का हिस्सा बताते थे। वेबसाइट पर कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रमाणपत्र प्रदर्शित किए गए थे ताकि लोगों को गुमराह किया जा सके।
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