नोएडा एनसीआर में आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, जानिए लोगों की क्या है राय?

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नोएडा में आवारा कुत्तों का आतंक

Noida: दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों के 'आतंक' के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा निर्णय दिया है. जिसके अनुसार दिल्ली से लेकर नोएडा-गाजियाबाद समेत पूरे एनसीआर में कुत्तों को पकड कर  और उन्हें अलग सुरक्षित स्थानों पर रखने का को कहा गया है. एनसीआर का हिस्सा होने कई कारण ये निर्णय गौतम बुध नगर में भी लागू होगा, सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा निर्णय को लेकर लोग अपनी प्रतिक्रिया दे रहे है।

ईश्वर ने कुत्तों को वरदान दिया
सुप्रीम कोर्ट के आवारा कुत्तों के फैसले पर डॉग लवर पूनम सिंह का कहना है कि एक तो यही समझ नहीं आ रहा है क्या इंसान क्या एनसीआर में ही रहते हैं? सबसे बड़ी बात है ये तो प्राचीन काल से ही कुत्तों का हमारे साथ रहने का है। ये ईश्वर ने कुत्तों को वरदान दिया है कि वो इंसान के साथ ही रहें और उसी के चलते यह इंसानों के बीच में  रहते हैं। मैं तो इसमें कोई बुराई नहीं समझती हूँ।

पैनिक होने की  जरूरत नहीं
नोएडा के सेक्टर 54 में एनिमल्स केयर सेंटर चलाने वाले संजय पात्रा कहते है कि हमारे देश की 50 प्रतिशत को डॉग्स को प्यार करते है। इन्हे पैनिक होने की कोई जरूरत नहीं है। ये एक जजमेंट है, ऑर्डर नहीं है और इस जजमेंट की खिलाफ़ हम रिक्वेस्ट करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्वागत योग्य
वहीं, नोएडा के आरडब्ल्यूए के संगठन फोनरावा के अध्यक्ष योगेंद्र शर्मा इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहते है कि एनसीआर में नोएडा शहर में बहुत तेजी से ये स्मस्या बढ़ रही है। सुप्रीम कोर्ट का जो आज आदेश आया है, इसका हम स्वागत करते हैं। यह आदेश बहुत पहले आना चाहिए था।

प्रशासन क्या कर रहा
 आम नागरिक राजेश कुमार कहते है कि पिछले दिनों से नोएडा  समेत दिल्ली एनसीआर में समस्या है। इसमें सोचने की बात ये है की प्राधिकरण और लोकल स्तर की जो हमारी कार्यप्रणाली है, कार्यपालिका है, कार्यप्रणाली है वो कैसी है? क्या वो वास्तव में काम करना चाहते हैं? 1.5 लाख लोगों को कटवाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ये कहता है की भैया इन कुत्तों से बचाओ तो प्राधिकरण क्या कर रहा है? प्रशासन क्या कर रहा है? 

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