CAG रिपोर्ट में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की खुली पोल, 13 हजार करोड़ रुपये का हुआ नुकसान, जानिए कौन जिम्मेदार?

top-news
प्राधिकरण अफ़सरो दुवारा बिल्डरो को अनुचित लाभ देने के चलते नुक़सान

Greater Noida: ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी पर गंभीर लापरवाही सामने आई है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की 2023 की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि नियमों को ताक पर रखकर अधिकारियों द्वारा किए गए भूखंड आवंटन और अनुबंध शर्तों की अनदेखी से सरकार को करीब 13,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि बसपा और सपा सरकार के दौरान प्राधिकरण ने भूमि आवंटन में नियमों को दरकिनार कर मनमाने फैसले लिए, जिससे यह संस्था अपने मूल उद्देश्य औद्योगिक नगरी के विकास से भटककर रिहायशी टाउनशिप में बदल गई।


प्राधिकरण अफ़सरो दुवारा बिल्डरो को अनुचित लाभ देने के चलते 32 हज़ार करोड़ का नुक़सान 

रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2021 की महायोजना को लागू करने से पहले न तो एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से स्वीकृति ली गई और न ही जनसंख्या घनत्व, हरित क्षेत्र संरक्षण और कमजोर वर्ग के लिए आवास जैसी अहम शर्तों का पालन किया गया। इसके बावजूद योजना को अमल में लाया गया, जो शहरी नियोजन के मानकों के विपरीत था।


30 सालों में जमकर हुई लापरवाही

1991 से 2021 के बीच कुल 2,580 औद्योगिक भूखंड आवंटित किए गए, लेकिन इनमें से केवल 52% पर ही उद्योग स्थापित हो पाए। शेष 48% भूखंड खाली पड़े रहे और 972 आवंटियों को तो नोटिस तक नहीं भेजा गया। उल्टे, प्राधिकरण ने इन भूखंडों की बिक्री को बढ़ावा दिया, जिससे औद्योगिक विकास रुक गया और राजस्व को भी नुकसान पहुंचा। सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि सेक्टर ईकोटेक-11 को विकसित किए बिना ही 193 औद्योगिक भूखंड आवंटित कर दिए गए। बुनियादी सुविधाएं न होने के कारण यहां उद्योग स्थापित नहीं हो सके और रोजगार व आर्थिक विकास के लक्ष्य अधूरे रह गए।


बिना मंजूरी भू-उपयोग में बड़े बदलाव

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 2009 और 2011 में प्राधिकरण ने सरकार और एनसीआरपीबी की मंजूरी के बिना ही भू-उपयोग में बड़े बदलाव किए। रिक्रिएशनल जोन को पहले आवासीय और फिर स्पोर्ट्स सिटी में बदलकर बिल्डरों को आवंटित किया गया। इसी तरह, औद्योगिक जमीन को भी आवासीय उपयोग में परिवर्तित किया गया, जिससे शहर की औद्योगिक पहचान कमजोर पड़ी। 2005 से 2011 तक जरूरत से ज्यादा जमीन खरीदी गई, जिसके लिए भारी भरकम लोन लिया गया। प्राधिकरण ने 2011 में भूमि अधिग्रहण, विकास और बुनियादी ढांचे पर खर्च के लिए 5,321 करोड़ रुपये का कर्ज लिया, लेकिन परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हुईं।


गरीबों के लिए आवास योजना की अनदेखी

वर्ष 2021 में गरीब और निम्न आय वर्ग के लिए निर्धारित 20 से 25% आवास की अनिवार्यता को भी नजरअंदाज कर दिया गया। इसका सीधा असर सामाजिक संतुलन और शहरी नियोजन पर पड़ा। सीएजी का कहना है कि इन नीतिगत अनदेखियों और मनमाने फैसलों से प्राधिकरण को हजारों करोड़ रुपये का सीधा आर्थिक नुकसान हुआ है, वहीं ग्रेटर नोएडा की औद्योगिक नगरी के रूप में पहचान भी गंभीर रूप से प्रभावित हुई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *