CAG रिपोर्ट में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की खुली पोल, भूखंड लेकर नहीं किया निर्माण फिर भी आवंटियों से नहीं वसूली लेवी

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36 परियोजनाओं में 302.14 करोड़ रुपये की लेवी वसूली जानी चाहिए थी

Greater Noida: भूखंड आवंटित कराने के बाद तय समय अवधि में निर्माण नहीं पूरा करने पर प्राधिकरण आवंटियों से विलंब शास्ति अथवा लेवी वसूलना ही भूल गया। भारत के नियंत्रक एंव महालेखा परीक्षक (सीएजी) रिपोर्ट के मुताबिक ऐसी 36 परियोजनाओं में 302.14 करोड़ रुपये की लेवी वसूली जानी चाहिए थी। इसके उलट केवल 4.66 करोड़ रुपये की लेवी वसूली हुई। 36 में से केवल तीन आवंटियों पर लेवी लगाई लेकिन यह भी आंशिक ही वसूली गई। ऐसे में करीब 297.48 करोड़ रुपये का नुकसान का आकलन कैग ने किया है।


कई प्रोजेक्ट में 12 साल से अधिक लेट

सीएजी रिपोर्ट में कहा गया है कि अलग-अलग सेक्टरों में परियोजनाओं के लिए भूखंड प्राधिकरण ने आवंटित किए। वर्ष 2006 से लेकर 2015 के बीच इन भूखंड की लीज डीड भी प्राधिकरण द्वारा आवंटियों के पक्ष में कर दी गई। करीब तीन साल में निर्माण पूरा कर इन परियोजनाओं को यहां उपयोगी बनाए जाने की शर्त थी। ऐसा नहीं होने पर लेवी वसूल की जानी चाहिए थी। कई प्रोजेक्ट ऐसे हैं जिनमें 12 साल से अधिक समय तक की देरी हुई। ऐसे में लेवी अनिवार्य रूप से लगाई जानी चाहिए थे। ऐसा किए बिना ही परियोजना का निर्माण पूरा करने के लिए पूर्णता प्रमाण पत्र जारी कर उपयोग की अनुमति जारी कर दी गईं। इससे सीधे तौर पर भूखंड पाने वाले बिल्डर और दूसरी संस्थाओं को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। इसके चलते जहां प्राधिकरण क्षेत्र का विकास लंबित हुआ। वहीं, लोगों को भी परेशानी का सामना इन अधूरी परियोजनाओं के चलते है उठानी पड़ी।


आईटी कंपनियों को आवंटन में भी लापरवाही 

कैग रिपोर्ट में कहा गया है कि केवल निर्माण में ही देरी नहीं हुई। आवंटन के बाद लीज डीड में भी आवंटियों की तरफ से देरी हुई। इसके बाद भी जरूरी शुल्क इन आवंटियों से नहीं लिया गया। ऐसे छह संस्थागत भूखंड से करीब 7 करोड़ का नुकसान प्राधिकरण को हुआ। मासिक आधार पर लेवी की गणना इन आवंटियों से होनी चाहिए थी। कैग रिपोर्ट के मुताबिक आईटी कंपनियों को गलत दरों पर भूखंड आवंटित कर दिए गए। कई मामलों में तो भूखंड आवंटन तक निरस्त प्राधिकरण को करने पड़े। इसके अलावा लीज डीड में देरी होने पर शुल्क भी नहीं लगाया गया। इससे आठ करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन कैग ने अपनी रिपोर्ट में किया है।


निर्माण में 14 साल से अधिक देरी फिर भी राहत

फोर सीजंस फाउंडेशन, एक्युरेट एजूकेशन एंड रिसर्च सोसाइटी, गुड इनफ एजुकेशन ट्रस्ट, सनसाइन एजूकेशन एंड डेवलपमेंट सोसाइटी, विनायक एजुकेशन सोसाइटी, श्री साईं कृपा सोसाइटी, बेनेट इंस्टीट्यूट ऑफ हायर एजुकेशन, साकेत एजूकेशन सोसाइटी, 49 बटालियन पीएसी, सनहिल हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड, आईकेयर हेल्थ केयर एंड रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड, कॉनवुड मेडीफार्मा प्राइवेट लिमिटेड, ग्लोबल फाउंडेशन फॉर लर्निंग एंड एक्सीलेंस, सेंट जेवियर एजुकेशन ट्रस्ट, सीमा सुरक्षा बल, नोएडा पॉवर कॉरपोरेशन लिमिटेड, श्री आदिचुंचन गिरी शिक्षण ट्रस्ट, एलईएडी इंफ्रासर्विसेज लिमिटेड, सनहिल हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड, चंद्रलेखा फाउंडेशन, केवल राम गुप्ता फाउंडेशन, शांतिदेवी मुरलीधर एजुकेशनल सोसाइटी, श्यामा एजुकेशन सोसाइटी, रेडियंट पब्लिशर्स एंड इंर्फोमेशन सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड, जगन्नाथ गुप्ता मेमोरियल एजुकेशन सोसाइटी, जीबी एजुकेशन सोसाइटी, दिव्या फाउंडेशन, जेएस फर्निशिंग प्राइवेट लिमिटेड, दिल्ली पब्लिक स्कूल सोसाइटी, स्टेलर पार्क्स लिमिटेड, विश्वनाथ एजुकेशनल चैरिटेबल ट्रस्ट, वनस्थली जैन सोसाइटी, ज्ञान गंगोत्री एजुकेशनल सोसाइटी, सुशीला सेवा संस्थान, फैमिली केयर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड।

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