ग्रेटर नोएडा के बिसाहड़ा गांव में फिर उठे बुनियादी सवाल, जलभराव और स्वास्थ्य सेवाएं बनीं बड़ी चुनौती

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निकासी व्यवस्था सुधारो, फसल और स्वास्थ्य बचाओ

Greater Noida: ग्रेटर नोएडा के बिसाहड़ा गांव में एक बार फिर बुनियादी सुविधाओं की कमी ने ग्रामीणों को परेशान कर रखा है। जलभराव और स्वास्थ्य व्यवस्था जैसे पुराने मुद्दे फिर से केंद्र में हैं। आगामी ग्राम पंचायत चुनाव से पहले गांव के लोग खुलकर अपनी बात रख रहे हैं और प्रशासन से ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।

फसलें डूब रहीं, लेकिन सुनवाई नहीं
गांव के किसानों का कहना है कि बारिश के मौसम में और कई बार सीवर लाइन ओवरफ्लो होने पर खेतों में पानी लंबे समय तक भरा रहता है। इससे दर्जनों बीघा खेतों में धान, गेहूं और सब्ज़ियों की फसलें बर्बाद हो जाती हैं। ग्रामीणों ने बताया कि जलभराव की समस्या पिछले कई वर्षों से जारी है। कई बार पंचायत और प्रशासन से शिकायत की गई, लेकिन केवल सर्वे और आश्वासन तक ही बात सीमित रह जाती है। किसानों ने कहा कि खेतों में पानी महीनों तक खड़ा रहता है। न तो निकासी की पाइपलाइन ठीक है और न ही कोई ड्रेनेज सिस्टम। इससे पूरी फसल बर्बाद हो जाती है।

गंदे पानी से बढ़ी बीमारियां
गांव में जलभराव के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। डेंगू, मलेरिया और त्वचा संबंधी रोगों के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तो है, लेकिन उसमें न डॉक्टर हैं, न दवाएं, न ही पर्याप्त स्टाफ। ग्रामीणों ने अब गांव में सरकारी अस्पताल निर्माण की मांग तेज कर दी है। उनका कहना है कि पास के शहरी इलाकों तक इलाज के लिए पहुंचना आम लोगों के लिए मुश्किल है, इसलिए गांव में ही एक सुसज्जित अस्पताल जरूरी है।

नई पंचायत से उम्मीदें 
गांव के बुजुर्ग और युवाओं दोनों का कहना है कि आगामी पंचायत चुनाव से उन्हें नई उम्मीदें हैं। लोग चाहते हैं कि इस बार जो भी प्रतिनिधि चुने जाएं, वे केवल वादे न करें, बल्कि पानी की निकासी, साफ-सफाई और स्वास्थ्य सेवाओं पर ठोस कार्रवाई करें। महिला शांति देवी ने कहा कि अब सिर्फ सुनने नहीं आए हैं, हमें काम चाहिए। अगर पंचायत ने वाकई जलभराव और गंदगी की समस्या हल कर दी, तो गांव में नया जीवन आ जाएगा।  साहड़ा के लोगों का कहना है कि गांव का विकास तभी संभव है जब पंचायत और प्रशासन मिलकर काम करें। निकासी व्यवस्था, सड़क सुधार, सीवर लाइन की मरम्मत और अस्पताल निर्माण जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देने की मांग लगातार उठ रही है। 

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