नोएडा प्राधिकरण ने दी एक तगड़ी योजना को मंजूरी, जानकर आप भी कहेंगे बोर्ड का बेहतरीन कदम
- Shiv Kumar
- 06 Jan, 2026
नोएडा: नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने शहर की ड्रेनों से बहने वाले घरेलू गंदे पानी के इन-सीटू और एक्स-सीटू ट्रीटमेंट की बहुप्रतीक्षित योजना को आखिरकार मंजूरी दे दी है। इस फैसले का मकसद कोंडली सिंचाई नाले और यमुना नदी में बिना ट्रीट किया गया सीवेज गिरने से रोकना है। लंबे समय से लंबित यह प्रस्ताव अब अमल में आएगा, जिससे शहर में जल प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण की उम्मीद की जा रही है। यह मंजूरी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के उस आदेश के अनुपालन में दी गई है, जिसमें शहरी निकायों को बिना उपचारित अपशिष्ट जल नालों में छोड़ने से सख्त रूप से मना किया गया था।
NGT के निर्देशों के बाद तैयार हुई योजना
एनजीटी ने अभिषेक कुसुम गुप्ता बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में 3 अगस्त 2022 को आदेश देते हुए कहा था कि कोई भी शहरी निकाय बिना ट्रीट किया गया सीवेज सिंचाई नालों में न छोड़े। इसके बाद नोएडा प्राधिकरण ने ड्रेनों की स्थिति, प्रदूषण स्तर और उपचार के उपायों का वैज्ञानिक आकलन कराने के लिए CSIR–NEERI को जिम्मेदारी सौंपी। प्राधिकरण और नीरी के बीच 21 जुलाई 2022 को एमओयू साइन हुआ। नीरी ने नोएडा क्षेत्र की करीब 30 ड्रेनों का अध्ययन किया, जिनमें से 24 ड्रेन सक्रिय पाई गईं। इन ड्रेनों को D1 से D24 तक कोड देकर उनके प्रवाह और प्रदूषण भार के आधार पर वर्गीकृत किया गया, ताकि चरणबद्ध तरीके से ट्रीटमेंट की योजना बनाई जा सके।
कई ड्रेन पहले ही इंटरसेप्ट, बाकी पर तय हुई समयसीमा
कोर्ट के निर्देशों के तहत कुछ ड्रेनों को पहले ही इंटरसेप्ट किया जा चुका है। ड्रेन D20 को होजरी कॉम्प्लेक्स क्षेत्र के सीवेज पंपिंग स्टेशन पर ट्रैप किया गया है, जबकि ड्रेन D6, D7 और D8 को सेक्टर-33 के संप वेल पर जोड़ा गया है। बोर्ड के अनुसार ड्रेन D2 फिलहाल सूखी है और ड्रेन D5 पहले से एसटीपी-54 का शोधित जल लेकर सिंचाई नाले में मिलती है, इसलिए इन पर अतिरिक्त काम की जरूरत नहीं है। वहीं बाकी ड्रेनों को जून 2026 तक इंटरसेप्ट करने की समयसीमा तय की गई है, ताकि बिना ट्रीट किया गया सीवेज यमुना में न पहुंचे।
नई STP और आधुनिक तकनीक से होगा ट्रीटमेंट
अधिक प्रदूषण भार वाली ड्रेनों के लिए नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने को भी हरी झंडी दी गई है। नीरी की डीपीआर के अनुसार ड्रेन D3, D21 और D24 के लिए एमबीबीआर तकनीक आधारित एसटीपी बनाए जाएंगे, जिन पर करीब 75 करोड़ रुपए खर्च होंगे और इन्हें जून 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। वहीं ड्रेन D22 के लिए FABAS तकनीक आधारित एसटीपी को मंजूरी दी गई है, जिस पर लगभग 127.5 करोड़ रुपए खर्च होंगे। अन्य प्रमुख ड्रेनों के लिए दिसंबर 2028 तक चरणबद्ध तरीके से काम होगा, जबकि कम और मध्यम प्रदूषण वाली ड्रेनों में बायो-रिमेडिएशन और फाइटो-रिमेडिएशन तकनीक अपनाई जाएगी।
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