अखलाख मॉब लिंचिंग केस में 22 जनवरी को सुनवाई और 23 को होगी गवाही, यह है अब तक का पूरा अपडेट

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अखलाक मॉब लिंचिंग केस में ट्रांसफर याचिका पर जिला न्यायाधीश ने सुनवाई की है। अब 22 जनवरी को तय होगा केस किस अदालत में चलेगा। इसके बाद 23 जनवरी को अखलाक पक्ष की गवाही दर्ज होगी। आइए खबर में पूरा अपडेट जान लेते हैं।

अखलाक मॉब लिंचिंग मामले में दाखिल ट्रांसफर याचिका (टीए) पर गौतमबुद्ध नगर के जिला न्यायाधीश ने गुरुवार को सुनवाई की। अखलाक के परिजनों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता यूसुफ सैफी ने बताया कि सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष की ओर से किसी प्रकार की बहस नहीं की गई। आरोपियों के वकील ने कोर्ट से दस्तावेज जमा करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा, जिसे स्वीकार करते हुए अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 22 जनवरी तय की है। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि 23 जनवरी को अखलाक पक्ष की ओर से गवाही कराई जाएगी। यह मामला लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया में है और ट्रांसफर याचिका के चलते इसकी सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।


22 जनवरी को तय होगी अदालत
22 जनवरी को होने वाली सुनवाई के बाद यह तय किया जाएगा कि अखलाक मॉब लिंचिंग केस की सुनवाई अतिरिक्त जिला न्यायाधीश की फास्ट ट्रैक कोर्ट (एफटीसी) में जारी रहेगी या इसे किसी अन्य अदालत में स्थानांतरित किया जाएगा। गौरतलब है कि आरोपियों की ओर से 8 जनवरी को एफटीसी से मामले को किसी दूसरी अदालत में ट्रांसफर कराने के लिए याचिका दायर की गई थी। यह ट्रांसफर याचिका छह आरोपियों—विनय, शिवम, सौरभ, संदीप, गौरव और हरिओम—की तरफ से दाखिल की गई है। आरोपियों का तर्क है कि मौजूदा अदालत में निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं है, इसलिए मामले को अन्यत्र स्थानांतरित किया जाना चाहिए।


आरोपों को बताया झूठा
ट्रांसफर याचिका में आरोपियों के वकीलों ने दावा किया है कि पुलिस द्वारा उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप निराधार और झूठे हैं। उनका कहना है कि उन्हें साजिश के तहत इस मामले में फंसाया गया है। आरोपियों ने यह भी दलील दी कि मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने निर्दोष लोगों के खिलाफ दर्ज मुकदमा वापस लेने के निर्देश दिए थे। हालांकि, फास्ट ट्रैक कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने धारा-321 सीआरपीसी के तहत मुकदमा वापस लेने के आवेदन को सुनवाई के बाद खारिज कर दिया था।


अब गवाही पर टिकी निगाहें
23 जनवरी को अखलाक पक्ष की ओर से होने वाली गवाही को मामले के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। यह गवाही केस की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। लंबे समय से लंबित इस मामले में ट्रांसफर याचिका, गवाही और कोर्ट के आगामी फैसले को लेकर पीड़ित परिवार के साथ-साथ कानूनी विशेषज्ञों की भी नजर बनी हुई है।

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