नोएडा में अब क्रिमिनल्स की खैर नहीं, क्राइम कंट्रोल के लिए आ गई एआई आधारित नई टेक्नोलॉजी, जानकर आप भी कहेंगे- शानदार

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नोएडा पुलिस ने अपराध नियंत्रण के लिए एआई आधारित “यक्ष” ऐप का इस्तेमाल शुरू किया है। अपराधियों की डिजिटल कुंडली, फेस और वॉयस रिकग्निशन के जरिए निगरानी तेज होगी। ऐप की मॉनिटरिंग लखनऊ पुलिस मुख्यालय से की जा रही है।

नोएडा में बढ़ते अपराध पर लगाम लगाने और प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए नोएडा पुलिस ने अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा लेना शुरू कर दिया है। यूपी पुलिस के एआई आधारित “यक्ष” ऐप के जरिए अपराध और अपराधियों की डिजिटल कुंडली तैयार की जा रही है। हर थाने में चौकी और बीट स्तर पर अपराधियों से जुड़ा पूरा डेटा फीड कराया जा रहा है, जिससे पुलिस को रियल टाइम में सटीक जानकारी मिल सके। अधिकारियों के मुताबिक, ऐप के ट्रायल के नतीजे काफी सकारात्मक सामने आए हैं और अब इसे तेजी से लागू किया जा रहा है।


अपराधियों का पैटर्न और हॉटस्पॉट डिजिटल रिकॉर्ड में
यक्ष ऐप पर सिर्फ अपराधियों का नाम ही नहीं, बल्कि उनके इलाके, आपराधिक इतिहास, सक्रिय गैंग, अपराध के पैटर्न और हॉटस्पॉट की पूरी जानकारी दर्ज की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी क्षेत्र में अगर कोई वारदात होती है तो एआई तुरंत उस तरह के अपराध से जुड़े संदिग्ध अपराधियों की सूची सामने ला देगा। इससे जांच की दिशा तय करने में समय बचेगा और अपराधियों तक तेजी से पहुंचा जा सकेगा। दिल्ली और आसपास के जिलों से जुड़े उन अपराधियों और गैंग का भी डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है, जिनकी नोएडा में सक्रियता रहती है।


थानों से पकड़े गए और फरार अपराधियों की फोटो फीडिंग
नोएडा के सभी 26 थानों से पकड़े गए अपराधियों और फरार आरोपियों की फोटो ऐप में अपलोड की जा रही है। इसके साथ ही यह भी दर्ज किया जा रहा है कि कौन सा अपराधी जेल में है और कौन बाहर। इससे पुलिस के लिए निगरानी और छंटनी की प्रक्रिया आसान हो गई है। बीट कॉन्स्टेबल अपने क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों और व्यक्तियों की फोटो व जानकारी भी ऐप के जरिए रिपोर्ट करेंगे, जिससे ग्राउंड लेवल की सूचनाएं सीधे सिस्टम में पहुंच सकें।


लखनऊ से होगी पूरी निगरानी, जिलों के बीच बनेगा तालमेल
यक्ष ऐप की पूरी मॉनिटरिंग लखनऊ स्थित पुलिस मुख्यालय से की जा रही है। अगर कोई अपराधी नोएडा छोड़कर गाजियाबाद या प्रदेश के किसी अन्य जिले में ठिकाना बदलता है और सत्यापन में यह सामने आता है, तो संबंधित जिले की पुलिस को तुरंत अलर्ट किया जाएगा। इससे जिलों के बीच समन्वय मजबूत होगा और अपराधियों की निगरानी लगातार बनी रहेगी।


चेहरे और आवाज से होगी अपराधियों की पहचान
इस ऐप की सबसे खास बात एआई पावर्ड फेसियल रिकग्निशन और वॉयस सर्च फीचर है। संदिग्ध व्यक्ति की फोटो डालते ही उसके आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी सामने आ जाएगी। वहीं, बड़े अपराधियों के वॉयस सैंपल सुरक्षित किए जा रहे हैं, ताकि आवाज के आधार पर भी पहचान संभव हो सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे ऐप में डेटा बढ़ेगा, इसकी सटीकता और उपयोगिता और बेहतर होती जाएगी।

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