हादसे में जिस निर्माणधीन बिल्डिंग में गई युवराज की जान, प्राधिकरण को पता ही नहीं, वह प्लॉट किसका? जांच के लिए बनाई समिति

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नोएडा सेक्टर-150 हादसे के तीन दिन बाद भी प्राधिकरण यह तय नहीं कर पाया है कि घटना स्थल वाला भूखंड किस बिल्डर का है। फिलहाल इस मामले की जांच के लिए समिति गठित की गई है और रिपोर्ट के बाद कार्रवाई की जाएगी।

नोएडा के सेक्टर-150 में हुए दर्दनाक हादसे को तीन दिन बीत जाने के बाद भी नोएडा प्राधिकरण यह स्पष्ट नहीं कर पाया है कि जिस भूखंड पर यह घटना हुई, वह आखिर किस बिल्डर का है। इस खुलासे के बाद प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला सामने आने के बाद अब नोएडा प्राधिकरण ने जांच के लिए एक समिति का गठन किया है, जो भूखंड के आवंटन से लेकर अब तक की पूरी स्थिति की पड़ताल करेगी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई किए जाने की बात कही जा रही है।


लोटस ग्रीन को आवंटित था भूखंड, कंपनी ने टुकड़ों में बेचकर कमाया मुनाफा
नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक सेक्टर-150 का यह भूखंड है। इसे एससी-02 के नाम से जाना जाता है। पहले लोटस ग्रीन बिल्डर को आवंटित किया गया था। आरोप है कि प्राधिकरण से भूखंड लेने के बाद लोटस ग्रीन ने इसे छोटे-छोटे हिस्सों में अन्य बिल्डरों को बेच दिया। अब जिस हिस्से पर हादसा हुआ है, वह किस बिल्डर को बेचा गया था, इसकी स्पष्ट जानकारी प्राधिकरण के पास नहीं है। इसी वजह से जिम्मेदारी तय करने में लगातार देरी हो रही है। अधिकारियों का कहना है कि कागजी रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं, लेकिन फिलहाल स्थिति पूरी तरह साफ नहीं हो सकी है।


समिति करेगी आवंटन से लेकर पूरी प्रक्रिया की जांच, रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई
नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ सतीश पाल ने बताया कि इस पूरे मामले की जांच के लिए एक समिति बना दी गई है। समिति यह पता लगाएगी कि संबंधित भूखंड किसे आवंटित किया गया था, कब आवंटन हुआ, नक्शा कब पास हुआ और निर्माण न होने की स्थिति में प्राधिकरण स्तर पर क्या कार्रवाई की गई। इसके अलावा यह भी जांच होगी कि सुरक्षा मानकों का पालन क्यों नहीं किया गया। समिति की रिपोर्ट आने के बाद दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।


13.29 लाख वर्गमीटर का भूखंड, आपसी विवाद में बिल्डर काम छोड़कर भागे
जिस भूखंड पर हादसा हुआ, उसका कुल क्षेत्रफल करीब 13 लाख 29 हजार वर्गमीटर बताया जा रहा है। साल 2014 में इस भूखंड का आवंटन हुआ था, जिसके बाद इसके 24 सब-डिवीजन किए गए। शुरुआत में अलग-अलग बिल्डरों ने यहां निर्माण कार्य शुरू किया, लेकिन स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट के फंसने और आपसी विवादों के चलते कई बिल्डर काम अधूरा छोड़कर चले गए। हालांकि इसी प्रोजेक्ट के तहत तीन बिल्डरों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राहत मिली थी, जिसके बाद उन्हें नक्शा पास कराकर निर्माण की अनुमति दी गई। अब इस हादसे ने एक बार फिर सेक्टर-150 में अधूरी परियोजनाओं और प्राधिकरण की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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