ग्रेटर नोएडा में सोसायटीज की जनरल बॉडी मीटिंग में हंगामा, दुर्व्यवहार का आरोप, जीबीएम को किया बर्खास्त, जानें पूरा मामला

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ग्रेटर नोएडा वेस्ट की आम्रपाली गोल्फ होम्स और किंग्सवुड सोसायटी में जीबीएम के दौरान हंगामा हो गया। निवासियों ने एडहॉक एओए पर दुर्व्यवहार और टेंडर में पारदर्शिता न होने के आरोप लगाए और बैठक को बर्खास्त कर स्वतंत्र जांच की मांग की।

ग्रेटर नोएडा वेस्ट की आम्रपाली गोल्फ होम्स और किंग्सवुड सोसायटी में रविवार को आयोजित जनरल बॉडी मीटिंग (जीबीएम) उस वक्त हंगामे में बदल गई, जब बड़ी संख्या में मौजूद निवासियों ने एडहॉक अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (एओए) के सदस्यों पर दुर्व्यवहार और तानाशाही रवैये के आरोप लगाए। बैठक शुरू होते ही सवाल-जवाब को लेकर माहौल गर्म हो गया और आखिरकार नाराज निवासियों ने जीबीएम को बर्खास्त कर दिया। इस दौरान सोसायटी परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठे।


सवाल पूछने पर छीना गया माइक, लगाए अभद्र भाषा के आरोप
सोसायटी निवासी गौरव और शिवराज ने बताया कि जैसे ही जीबीएम की शुरुआत हुई, लोगों ने सोसायटी से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाने शुरू किए। आरोप है कि एडहॉक एओए के सदस्यों ने न तो सवाल पूरे होने दिए और न ही जवाब देने की कोशिश की। निवासियों का कहना है कि उनके हाथों से माइक छीन लिया गया और विरोध करने पर अपशब्दों का इस्तेमाल किया गया। इस व्यवहार से नाराज होकर लोग भड़क उठे और बैठक का विरोध शुरू हो गया। इसी दौरान सुरक्षाकर्मियों और निवासियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई, जिससे माहौल और ज्यादा बिगड़ गया।


डेढ़ करोड़ रुपये मासिक टेंडर पर उठे सवाल
जीबीएम में मौजूद निवासियों ने हाल ही में पास किए गए एफएमएस (फैसिलिटी मैनेजमेंट सर्विस) टेंडर का पूरा ब्यौरा मांगा। आरोप है कि इस टेंडर के तहत करीब डेढ़ करोड़ रुपये प्रति माह की एजेंसी नियुक्त की गई है, लेकिन एडहॉक एओए ने इससे जुड़े दस्तावेज दिखाने से इनकार कर दिया। सतीश, राजाराम और उज्जवल समेत कई निवासियों ने आरोप लगाया कि जब पारदर्शिता की मांग की गई, तो एओए अध्यक्ष ने आपत्तिजनक और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। इससे लोगों का गुस्सा और भड़क गया और बैठक को तत्काल समाप्त करने का फैसला लिया गया।


निवासियों ने बुलाई अलग बैठक, स्वतंत्र जांच की मांग
हंगामे के बाद निवासियों ने अपनी अलग बैठक आयोजित की, जिसमें सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि एडहॉक एओए द्वारा लिए गए सभी बड़े वित्तीय फैसलों, खासतौर पर एफएमएस टेंडर की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए। निवासियों का कहना है कि यह प्रस्ताव जल्द ही कोर्ट रिसीवर और रजिस्ट्रार को सौंपा जाएगा, ताकि उचित कार्रवाई हो सके। लोगों ने साफ कहा कि सोसायटी का संचालन किसी भी हाल में गाली-गलौज, तानाशाही और अपारदर्शिता के आधार पर नहीं किया जा सकता। इस पूरे घटनाक्रम के बाद सोसायटी प्रबंधन और एडहॉक एओए की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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