नोएडा में जल आपूर्ति सुधारने के लिए धांसू प्लान, पूरा मामला जान आप कहेंगे- ये तो बढ़िया है!
- Shiv Kumar
- 19 Jan, 2026
नोएडा में जल आपूर्ति व्यवस्था को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए प्राधिकरण अब क्लाउड बेस्ड रिमोट मॉनिटरिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम लागू करने जा रहा है। इस नई व्यवस्था के तहत रिमोट सेंसर के माध्यम से हर कनेक्शन पर पानी की आपूर्ति, टीडीएस स्तर, गंगाजल सप्लाई, नलकूप और रैनीवेल संचालन से जुड़ा डेटा रियल टाइम में उपलब्ध होगा। इससे प्राधिकरण को यह तुरंत पता चल सकेगा कि कहां और क्यों पानी की आपूर्ति बाधित है। इस परियोजना के लिए कंपनी का चयन इसी सप्ताह कर लिया जाएगा। छह जनवरी तक आवेदन मांगे गए थे, जिसमें केवल एक कंपनी ने आवेदन किया। यह तीसरी बार टेंडर आमंत्रित किया गया था, ऐसे में उसी कंपनी को कंसिडर किया जाएगा।
पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 6 सेक्टरों से होगी शुरुआत
नोएडा प्राधिकरण के जीएम आरपी सिंह ने बताया कि यह सिस्टम पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जाएगा, ताकि इसकी प्रभावशीलता को परखा जा सके। पायलट प्रोजेक्ट के तहत 6 सेक्टरों का चयन किया गया है, जिसमें सेक्टर-14, 14ए, 15, 15ए, 16 और 16ए शामिल हैं। इन सेक्टरों में सभी पानी की लाइनों, भूमिगत और ओवरहेड जलाशयों, नलकूपों और यमुना किनारे स्थित रैनीवेल को इस सिस्टम से जोड़ा जाएगा। हर सेक्टर के प्रवेश बिंदु पर, जहां से पानी की सप्लाई अलग-अलग दिशाओं में जाती है, वहां रिमोट सेंसर लगाए जाएंगे। इससे यह साफ हो सकेगा कि किस लाइन से कितने घरों या संस्थानों में पानी नहीं पहुंच रहा है और समस्या कहां उत्पन्न हो रही है।
छह महीने में सिस्टम होगा इंस्टॉल, पूरे शहर में लागू करने की तैयारी
इस पायलट प्रोजेक्ट पर करीब 1 करोड़ 80 लाख 97 हजार रुपये की लागत आने का अनुमान है। चयनित कंपनी को छह महीने के भीतर पूरा सिस्टम इंस्टॉल करना होगा, जिसके बाद जल आपूर्ति से जुड़े आंकड़े मिलने शुरू हो जाएंगे। चूंकि यह पायलट प्रोजेक्ट है, इसलिए शुरुआती दौर में कंपनी खुद इसकी मॉनिटरिंग करेगी और पूरा डेटा नोएडा प्राधिकरण को उपलब्ध कराएगी। प्राधिकरण अधिकारियों का कहना है कि यदि यह प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो भविष्य में इसे पूरे नोएडा की जल आपूर्ति व्यवस्था में लागू किया जाएगा। इससे न केवल शिकायतों का त्वरित समाधान होगा, बल्कि पानी की बर्बादी पर भी काफी हद तक रोक लग सकेगी।
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