नोएडा के नए प्रशासनिक भवन की दीर्घायु के लिए PU फ्लोरिंग अनिवार्य, बेसमेंट सुरक्षा पर उठे अहम सवाल
- Shiv Kumar
- 20 Jan, 2026
सेक्टर-96, नोएडा में बन रहा नया नोएडा प्रशासनिक भवन आधुनिक प्रशासनिक ढांचे की दिशा में एक बड़ा और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस भवन की कुल लागत 100 करोड़ रुपये से अधिक है। लेकिन इतने बड़े बजट की इस इमारत में बेसमेंट फ़्लोरिंग और दीर्घकालिक संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। निर्माण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बेसमेंट की सुरक्षा में शुरुआती स्तर पर तकनीकी सावधानियां नहीं बरती गईं, तो भविष्य में यह लापरवाही भारी नुकसान का कारण बन सकती है।
बेसमेंट ही है पूरी इमारत की नींव
निर्माण क्षेत्र के जानकारों के अनुसार किसी भी बहुमंज़िला या बड़े प्रशासनिक भवन में बेसमेंट पूरी इमारत का स्ट्रक्चरल आधार होता है। कॉलम, बीम, स्लैब और ऊपर की सभी मंज़िलों का पूरा भार अंततः बेसमेंट स्ट्रक्चर पर ही आता है। ऐसे में बेसमेंट कंक्रीट की मजबूती और सुरक्षा से कोई भी समझौता पूरी इमारत की उम्र और स्थायित्व को प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि आजकल निर्माण में की गई छोटी-छोटी चूकें आगे चलकर गंभीर संरचनात्मक समस्याओं और करोड़ों रुपये की मरम्मत का कारण बन जाती हैं।
बेसमेंट में PU फ़्लोरिंग क्यों है आवश्यक
बेसमेंट संरचनाएं लगातार भूमिगत नमी, वाटर प्रेशर, सीपेज और केमिकल रिएक्शन के संपर्क में रहती हैं। समय के साथ सामान्य कंक्रीट में माइक्रो क्रैक्स विकसित हो जाते हैं, जिनके जरिए पानी और नमी अंदर प्रवेश करने लगती है। इससे रिइन्फोर्समेंट स्टील में जंग लगने लगती है और बेसमेंट स्लैब की लोड-बेयरिंग क्षमता कमजोर होने लगती है। चूंकि पूरा भवन बेसमेंट पर निर्भर करता है, इसलिए इसकी सुरक्षा केवल सौंदर्य का नहीं, बल्कि पूरी इमारत की संरचनात्मक सुरक्षा का विषय बन जाती है।
PU फ़्लोरिंग कैसे बढ़ाती है भवन की उम्र
PU (पॉलीयूरीथेन) फ़्लोरिंग बेसमेंट कंक्रीट पर एक सीमलेस, इलास्टिक और वाटरप्रूफ लेयर बनाती है। यह कंक्रीट को पानी और केमिकल्स से सुरक्षित रखती है, माइक्रो क्रैक्स को फैलने से रोकती है और थर्मल मूवमेंट व भारी लोड वाइब्रेशन को सहन करने में मदद करती है। विशेषज्ञों के मुताबिक PU फ़्लोरिंग रिइन्फोर्समेंट स्टील को जंग से बचाती है और कंक्रीट की डिज़ाइन लाइफ को दो से तीन गुना तक बढ़ा सकती है। इससे बेसमेंट की मजबूती लंबे समय तक बनी रहती है।
100 करोड़ की इमारत में ‘माइनर टेंडर’ पर सवाल
निर्माण क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ यह सवाल भी उठा रहे हैं कि जब पूरा प्रशासनिक भवन 100 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से तैयार किया जा रहा है, तो बेसमेंट की सुरक्षा से जुड़े PU फ़्लोरिंग जैसे माइनर टेंडर पर आपत्ति क्यों की जा रही है। PU फ़्लोरिंग की लागत कुल परियोजना बजट का बहुत छोटा हिस्सा होती है, लेकिन इसके लाभ दशकों तक मिलते हैं। यदि यह कार्य समय पर नहीं कराया गया, तो भविष्य में बेसमेंट लीकेज, स्लैब डैमेज और फाउंडेशन से जुड़ी गंभीर समस्याएं सामने आ सकती हैं।
दूरदर्शी निर्णय की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि ‘इलाज से बेहतर है बचाव’ का सिद्धांत भवन निर्माण पर भी पूरी तरह लागू होता है। समय पर की गई तकनीकी सावधानी न केवल सरकारी संपत्ति की रक्षा करती है, बल्कि टैक्सपेयर्स के पैसे का जिम्मेदार और दूरदर्शी उपयोग भी सुनिश्चित करती है।
Leave a Reply
Your email address will not be published. Required fields are marked *






